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कैसे लगता है Chandra Grahan? वैज्ञानिक दृष्टि से जानिए इस पूरी खगोलीय घटना को

Updated at : 04 Jun 2020 6:25 PM (IST)
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कैसे लगता है Chandra Grahan? वैज्ञानिक दृष्टि से जानिए इस पूरी खगोलीय घटना को

Chandra Grahan 2020 or Lunar Eclipse June 2020 : Know whole astronomical event scientifically हिंदू धर्म में ग्रहण से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. वहीं, विज्ञान का भी इसे लेकर अपने दावे हैं. ऐसे में आइये जानते हैं 5 जून 2020 को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर क्या है वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कैसे लगता है यह चंद्रग्रहण, समझते है पूरी खगोलीय घटना को विस्तार से..

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Chandra Grahan 2020 or Lunar Eclipse June 2020 : Know whole astronomical event scientifically हिंदू धर्म में ग्रहण से जुड़ी कई मान्यताएं हैं. वहीं, विज्ञान का भी इसे लेकर अपने दावे हैं. ऐसे में आइये जानते हैं 5 जून 2020 को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर क्या है वैज्ञानिक दृष्टिकोण और कैसे लगता है यह चंद्रग्रहण, समझते है पूरी खगोलीय घटना को विस्तार से..

जिस तरह सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य से होकर गुजरती है. उसी तरह चंद्र ग्रहण में भी चंद्रमा पृथ्वी के पीछे आ जाता है. यही कारण है कि सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के पीछे लगभग सीधे अवस्था में पहुंच जाते हैं उसी खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है. वहीं, शास्त्रों की मानें तो यह केवल पूर्णिमा को ही घटित हो सकता है. चांद के इसी रूप को ‘ब्लड मून’ कहा जाता है. विशेषज्ञों की मानें तो चंद्र ग्रहण के शुरू होते ही चांद का रंग पहले काला फिर धीरे-धीरे सुर्ख लाल रंग में तब्दील होने लगता है.

उपछाया चंद्र ग्रहण क्या है

आपको बता दें कि 5 जून को लगने वाला ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण है. दरअसल, उपछाया चंद्र ग्रहण तब लगता है जब धरती की परिक्रमा करने समय चांद पेनुम्ब्रा से होकर गुजरता है. इस दौरान सूरज और चांद के बीच पृथ्‍वी घूम कर तो आ जाती है लेकिन, तीनों सीधी लाइन में नहीं होती. यही कारण है कि इस दौरान चांद की छोटी सी सतह पर अंब्र नहीं पड़ती. जिसके कारण चांद के अन्य हिस्सों में पृथ्‍वी के बाहरी हिस्‍से की छाया पड़ने लगती है. इस घटना को पिनम्‍ब्र या उपछाया कहा जाता है.

हालांकि, धार्मिक लिहाज से उपछाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण नहीं माना जाता है. यही कारण है कि इस ग्रहण में कोई सूतक काल नहीं लगता है. जबकि चंद्रमा ग्रहण से 9 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है जो ग्रहण के समाप्त होते ही समाप्त भी हो जाता है.

कब दिखाई देगा चंद्रग्रहण

भारत में 5 जून को लगने वाला ग्रहण साल का दूसरा चंद्रग्रहण है. जो रात को 11 बजकर 16 मिनट में शुरू होगा और 6 जून की रात 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. पंडित सुनिल सिंह की मानें तो इसे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका सहित दुनियाभर के अन्य स्थानों से देखा जाएगा.

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