कभी बंदूक से गोलियां बरसाने वाला गुमला का सुफल आज सफलता से पढ़ा रहा विकास का पाठ

Updated at : 02 Aug 2021 10:12 PM (IST)
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कभी बंदूक से गोलियां बरसाने वाला गुमला का सुफल आज सफलता से पढ़ा रहा विकास का पाठ

Good News, Jharkhand News ( गुमला) : गुमला जिला अंतर्गत सिसई प्रखंड में चापी गांव है. एक समय था जब इस गांव में भाकपा माओवादियों का साम्राज्य था. कभी भाकपा माओवादी में शामिल होकर सुफल उरांव इस क्षेत्र का बागडोर संभाला था. लेकिन, मुख्यधारा से जुड़कर लोकतंत्र का सारथी बन गया है.

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Good News, Jharkhand News (दुर्जय पासवान, गुमला) : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत सिसई प्रखंड में चापी गांव है. एक समय था जब इस गांव में भाकपा माओवादियों का साम्राज्य था. गांव के लोग हर रोज नयी जिंदगी जीते थे. इस गांव में पुलिस भी जाने से कतराती थी. इसी गांव के सुफल उरांव जो कभी भाकपा माओवादी में शामिल होकर इस क्षेत्र का बागडोर संभाला था. उसके नाम से इलाका कांपता था. लेकिन, बदलते समय और सोच ने आज सुफल उरांव को एक नयी पहचान दी है. वह मुख्यधारा से जुड़कर आज लोकतंत्र का सारथी बन गया है.

आज सुफल उरांव लरंगो पंचायत का मुखिया है. मुखिया बनकर न वह सिर्फ क्षेत्र के विकास के लिए काम कर रहा है, बल्कि मुख्यधारा से भटके युवकों को भी सही राह देने का काम कर रहा है. सुफल उरांव की सोच है कि नयी पीढ़ी संस्कारित एवं अच्छे सोच के साथ पढ़ाई-लिखाई कर आगे बढ़े. गांव के युवा शिक्षा को हथियार बनाकर विकास में सहभागी बने. समाज व देश के प्रति युवा अपना दायित्व का निभाये. उन्होंने कहा कि गलत राह से इंसान का कभी भला नहीं हो सकता.

ऐसे माओवादी बना था सुफल

सिसई प्रखंड अंतर्गत लरंगो पंचायत के चांपी गांव में आज से 23 साल पहले घोर नक्सल इलाका था. इस क्षेत्र में वर्ष 1997 में भाकपा माओवादी प्रवेश किया. उस समय चांपी माओवादियों का सेफ जोन हुआ करता था. माओवादियों के नीति व सिद्धांत से प्रभावित होकर सुफल उरांव माओवादी में शामिल हो गया था. ठेकेदारी, जमींदारी प्रथा व पुलिस के खिलाफ वह हथियार उठा लिया. वह 7 वर्षों तक संगठन में रहा. वर्ष 2004 में पुलिस के हाथों वह पकड़ा गया. दो वर्षों तक जेल में रहा. वर्ष 2006 में जब जेल से छूटा, तो उसकी सोच बदली और वह मुख्यधारा से जुड़ गया. अब वह लोकतंत्र का सच्चा सारथी बन गया है.

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इस प्रकार मुख्यधारा से जुड़ा

सुफल की सोच शुरू से पारदर्शी रहा है. नक्सली रहते समय उसकी सोच बदली. जंगल में रहकर जनकल्याण के कार्य नहीं हो सकता है. यही सोच उसे राजनीति में ले लाया. वर्ष 2008 में झारखंड पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एनोस एक्का व प्रधान महासचिव अशोक कुमार भगत के संपर्क में आने के बाद सुफल झापा का सदस्य बन गया. उसी समय सुफल के नेतृत्व में सिसई ब्लॉक मैदान में विशाल नगाड़ा पिटावन सम्मेलन हुआ था. वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में सिसई विधानसभा क्षेत्र से झापा के टिकट से चुनाव लड़ा. लेकिन, जीत न सका. फिर भी जनता की सेवा करता रहा.

वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी फूलमनी देवी को मुखिया का चुनाव जीता कर अलग पहचान बनायी. पत्नी के साथ 5 वर्षों तक सामाजिक कार्यों में बढ़कर हिस्सा लिया. वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में लरंगो पंचायत से सुफल चुनाव लड़ा और अच्छे मतों से विजयी बना. अभी भी अपने पंचायत क्षेत्र में गांव व लोगों के विकास के लिए काम कर रहा है.

Posted By : Samir Ranjan.

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