Human Trafficking In Jharkhand : तस्करी की शिकार लड़कियों का स्कूलों में नामांकन नहीं, पीड़ित छात्रओं को फिर सताने लगा भविष्य का डर

Updated at : 11 Feb 2021 2:02 PM (IST)
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Human Trafficking In Jharkhand : तस्करी की शिकार लड़कियों का स्कूलों में नामांकन नहीं, पीड़ित छात्रओं को फिर सताने लगा भविष्य का डर

सीडब्ल्यूसी की माने, तो 59 में से कितनी लड़कियों का नामांकन हुआ है, इसकी कोई जानकारी शिक्षा विभाग द्वारा नहीं दी गयी है. जबकि शिक्षा विभाग से पूछताछ करने पर पता चला कि अबतक मात्र 15 लड़कियों का नामांकन हो गया है. जिन लड़कियों का अबतक नामांकन नहीं हुआ है, उन लड़कियों का नामांकन अब नये सत्र अप्रैल महीने में किया जायेगा.

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gumla news, jharkhand human trafficking latest case गुमला : गुमला जिले से मानव तस्करी की शिकार नाबालिग लड़कियों का स्कूलों में नामांकन नहीं हो रहा है. इन लड़कियों के नामांकन में खुद शिक्षा विभाग रुचि नहीं ले रहा है. सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी गुमला) ने मानव तस्करी की शिकार 59 लड़कियों की सूची शिक्षा विभाग को सौंपते हुए नामांकन करने की मांग की थी, ताकि सभी लड़कियां कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूल में नामांकन लेकर शिक्षा ग्रहण कर सके.

सीडब्ल्यूसी की माने, तो 59 में से कितनी लड़कियों का नामांकन हुआ है, इसकी कोई जानकारी शिक्षा विभाग द्वारा नहीं दी गयी है. जबकि शिक्षा विभाग से पूछताछ करने पर पता चला कि अबतक मात्र 15 लड़कियों का नामांकन हो गया है. जिन लड़कियों का अबतक नामांकन नहीं हुआ है, उन लड़कियों का नामांकन अब नये सत्र अप्रैल महीने में किया जायेगा.

दोबारा तस्करी का शिकार होने का डर

जिन लड़कियों ने पढ़ने की इच्छा प्रकट की है, अगर उन लड़कियों का कस्तूरबा स्कूल में नामांकन में विलंब होता है, तो वे दोबारा मानव तस्करी का शिकार हो सकती हैं. ऐसी संभावना सीडब्ल्यूसी ने जतायी है. सीडब्ल्यूसी की माने, तो मानव तस्कर नाबालिग लड़कियों को ठगने में माहिर रहते हैं. नया शहर घूमने की ललक में लड़कियां तस्करी का शिकार हो जाती हैं.

सीडब्ल्यूसी सदस्य ने कहा :

सीडब्ल्यूसी के सदस्य संजय भगत ने कहा कि मानव तस्करी की शिकार लड़कियां दिल्ली व अन्य शहरों से मुक्त करा कर गुमला लायी गयी हैं. इन लड़कियों ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की थी. इसके लिए सभी लड़कियों की सूची बना कर शिक्षा विभाग को सौंपी गयी है. इनमें कई लड़कियां कोई एक साल, तो कई छह, सात व आठ महीने से नामांकन की आस में हैं, परंतु अभी तक कितनी बच्चियों का नामांकन हुआ, उसकी कोई सूची शिक्षा विभाग ने नहीं दी है.

Posted By : Sameer Oraon

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