वीर शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती को प्रशासन भूला, वंशजों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Feb 2022 9:49 PM
jharkhand news: वीर शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती को गुमला प्रशासन भूल गया. प्रशासन ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा का मरम्मत तक नहीं कराया. मजबूरन वंशजों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया. वहीं, शहीद स्थल की उपेक्षा समेत सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहने की बात कही गयी.
Jharkhand news: गुमला के वीर शहीद तेलंगा खड़िया की 216वीं जयंती को प्रशासन भूल गया. घाघरा गांव स्थित शहीद की क्षतिग्रस्त प्रतिमा का प्रशासन ने मरम्मत तक नहीं कराया. मजबूरन वंशजों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा पर ही माल्यार्पण किया. वंशजों के पास पैसे भी नहीं है. इसके बावजूद वंशजों ने अपने शहीद तेलंगा की पूजा कर उन्हें याद किया.
जमींदारों के डर से मुरगू गांव से भागकर घाघरा गांव में बसे शहीद के 16 वंशजों ने अपने देवता घर में भी तेलंगा खड़िया की पूजा की. उनकी यादों को ताजा किया. साथ ही सच्चाई, प्रेम व गलत कामों के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया. बता दें कि शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती पर गुमला जिले के दर्जनों गांवों में उनकी पूजा की जाती है. गुमला शहर के चंदाली स्थित शहीद के समाधि स्थल भी उपेक्षित रहा. शहीद के वंशज विकास खड़िया ने कहा कि मेरे परदादा ने देश की आजादी में अहम भूमिका निभायी. अंग्रेजों से युद्ध किये. जमींदारी प्रथा के खिलाफ आवाज उठायी. जूरी पंचायत की स्थापना की. इसके बाद भी शहीद तेलंगा खड़िया को गुमला प्रशासन भूलता जा रहा है. क्षतिग्रस्त प्रतिमा व समाधि स्थल तक की मरम्मत कराने में प्रशासन असमर्थ नजर आ रहा है. उन्होंने सरकार से इसपर ध्यान देने की मांग किया है.
अंबाटोली गांव में शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती मनायी गयी. हंदू खड़िया ने कहा कि वीर शहीद तेलंगा खड़िया के बताये मार्ग पर चलने की जरूरत है. उनके जीवन काल से प्रेरित होकर आज हमसब मिल कर उनके सपनों को सकार करने की प्रेरणा ले. आजादी के 74 साल बीत जाने के बाद भी आज तक उनके परिवारों को किसी प्रकार का सहयोग नहीं मिल पाया है. उनके समाधि स्थल तक को जमीन माफियाओं द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है. उनके समाधि स्थल को सरकार के द्वारा सुरक्षा प्रदान किया जाये. मौके पर इंदू रानी किडो, भूषण सिंह, अनुस सोरेंग, बाल गोविंद खड़िया, बसंत गुप्ता, विनय लकड़ा, मनोज, सुबोध, सचिन खड़िया, जितेश्वर खड़िया, पेरू उरांव, सुषमा केरकेट्टा, मंगरा खड़िया, सुरेश खड़िया, माठा खड़िया, नरेश खड़िया, सागर खड़िया, धनपैत खड़िया, रमेश खड़िया, अमृत खड़िया, जोगेंद्र खड़िया, अभिषेक सोरेंग, निमरोध एक्का, संतोष टेटे समेत अन्य मौजूद थे.
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पालकोट प्रखंड के बघिमा गांव के खेल मैदान में वीर शहीद तेलंगा खड़िया की जंयती खड़िया समाज द्वारा मनायी गयी. मुख्य अतिथि प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष विनय लकड़ा ने वीर शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुभारंभ किया. विनय लकड़ा ने कहा कि खड़िया समाज के साथ सभी जाति समाज को अंधविश्वास, कुरीतियों, नशापान, अशिक्षा से दूर रहना होगा. सबसे बड़ी बात समाज को आने वाले पीढ़ी को शिक्षित करना होगा. तब जाकर हम एक उज्जवल व सुखमय समाज का निर्माण करेंगे. समाज में नाचगान से नहीं, बल्कि एकजुटता से समाज संगठित होगा. जिसे हमें मिलकर एक साथ करना होगा. समारोह में प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से आये नृत्य मंडलियों द्वारा आदिवासी नाच पेश प्रस्तुत किया गया.
सिसई प्रखंड के पोढ़ा व घाघरा के चौराहे पर स्वतंत्रता सेनानी तेलंगा खड़िया की 216वीं जयंती परिजनों द्वारा मनायी गयी. झारखंड सेनानी कोष संचालन समिति गृह मंत्रालय के सदस्य लाल प्रवीरनाथ शाहदेव, सुनीता शाहदेव, तेलंगा खड़िया की परपोती बहू नीलम जगरानी, बासु खड़िया, जितिया खड़िया, विकास खड़िया, मुन्ना खड़िया, चंद्रनाथ उरांव, जितनु भगत, सोहरी खड़िया, पुनी खड़िया, लक्ष्मी महलिन ने प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित किया.
लाल प्रवीण नाथ शाहदेव ने कहा शहीद तेलंगा खड़िया का जन्म 9 फरवरी, 1806 में हुआ था. वे साधारण किसान परिवार में जन्म लिया था. बचपन से वीर साहसी थे. ऐसे महापुरुष की जंयती और पुण्यतिथि पर वृहत कार्यक्रम होना चाहिए. जबकि जयंती व पुण्यतिथि परिजनों तक ही सिमट कर रह गया है. जयंती व शहादत दिवस पर कार्यक्रम करने के लिए झारखंड सेनानी कोष से 25-25 हजार दिया जाता है. उन्होंने 23 अप्रैल, 2022 तक प्रशासन से प्रतिमा का जीर्णोद्धार कराने की मांग की. परपोती बहू नीलम जगरानी ने कहा कि गांव में पीसीसी रोड, पीने की पानी की व्यवस्था नहीं है. तेलंगा खड़िया के परिजनों में 16 परिवार में 6 परिवार को 6 शहीद आवास मिला है. उन्होंने कहा कि सोलर लाइट की व्यवस्था, जलमीनार, सरना घेराबंदी का प्रखंड प्रशासन द्वारा आश्वासन दी थी. लेकिन अब तक नहीं बना है.
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रिपोर्ट : दुर्जय पासवान, गुमला.
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