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The Family Man Season 2 Review : मनोज बाजपेयी के फैंस के लिए ट्रीट है 'फैमिली मैन 2'

By उर्मिला कोरी
Updated Date
The Family Man Season 2 Review
The Family Man Season 2 Review
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The Family Man Season 2 Review

वेब सीरीज - फैमिली मैन 2

निर्देशक - राज एंड डीके,सुपर्ण वर्मा

कलाकार - मनोज बाजपेयी, सामंथा,शारिब हाशमी,सीमा विश्वास,विपिन शर्मा,रविन्द्र विजय

प्लेटफार्म - अमेज़न प्राइम वीडियो

एपिसोड - नौ

रेटिंग - तीन

वेब सीरीज तांडव के रिलीज के बाद हुई कॉन्ट्रोवर्सी ने फैमिली मैन 2 की रिलीज तारीख को आगे बढ़ा दिया था. 4 जून की रिलीज तारीख घोषित हुई ही थी कि सीरीज अलग ही विवाद में पड़ गयी. सीरीज के प्रसारण पर रोक लगाने की भी मांग उठने लगी थी. इन तमाम विवादों के बावजूद आखिरकार इस सीरीज ने अमेज़न प्राइम वीडियो पर दस्तक दे दिया है हालांकि सीरीज के शुरुआत में डिस्क्लेमर के ज़रिए डिजिटल प्लेटफार्म अपना बचाव करते हुए साफ लिख दिया है कि वे सीरीज की कहानी और किरदारों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं.

वैसे आम दर्शक का इस डिस्क्लेमर से कोई लेना देना नहीं है. सीरीज की कहानी और किरदार मनोरजंन से कितना इत्तेफाक रखते हैं ? सेक्रेड गेम्स और मिर्जापुर 2 के दूसरे सीजन की तरह क्या यह सीजन भी उम्मीदों पर कमतर तो नहीं रह जाएगा. उनके जेहन में ये सवाल थे लेकिन कहानी से जुड़ा प्रेडिक्टेबल लेकिन एंगेजिंग ड्रामा और शानदार कलाकारों के धारदार अभिनय ने इस सीजन भी सभी का दिल जीत लिया है.

पहला सीजन जहां खत्म हुआ था वहां से दूसरे सीजन की शरुआत नहीं होती है. कहानी कुछ साल आगे बढ़ चुकी हैं हालांकि बैक स्टोरी के ज़रिए दिल्ली पर हुए गैस के हमले वाले क्लाइमेक्स सीक्वेंस की जानकारी मिल जाती है. वर्तमान में श्रीकांत टास्क फोर्स छोड़ एक आईटी कंपनी में काम कर रहा है. उसके पास नयी कार आ गयी. उसका नया फ्लैट भी बनने लगा है. 9 टू 5 की इस जॉब में वह अपने परिवार को पूरा समय दे रहा है लेकिन ना तो वो खुश है और ना ही सुचि( प्रियामणि).

इस कहानी के साथ साथ समानांतर में एक और कहानी चलती है. जिसके तार श्रीलंका से होते हुए लंदन और तमिलनाडु पहुँच गए हैं. इस बार आंतकवादी अपने प्लान को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई भारत की शांति भंग करने के लिए इस बार तमिल रेबिलियन्स को सपोर्ट कर रही है. श्रीकांत की बेटी की जान पर बन आयी है. श्रीकांत को अपनी बेटी को बचाना है साथ ही प्रधानमंत्री बासु पर होने वाले आत्मघाती हमले को भी विफल करना है. कैसे श्रीकांत इन सबको रोकेगा यही सीरीज की कहानी है.

सीरीज की शुरुआत धीमी हुई है. शुरुआत के तीन एपिसोड्स में फैमिली पर ज़्यादा फोकस किया है. एपिसोड 3 से कहानी अपनी रफ्तार पकड़ती है और थ्रिलर और एडवेंचर कहानी का अहम हिस्सा बन जाते हैं जो अंत तक बरकरार रहते हैं. कहानी से जुड़ा रहस्य इस बार चौंकाता नहीं है क्योंकि भारतीय राजनीति के जिस पहलू को इस बार कहानी का प्लाट बनाया गया है उससे हर कोई वाकिफ है. हां एंगेज ज़रूर रखता है. इसके साथ ही हिंदी बेल्ट के दर्शकों को थोड़ी परेशानी भाषा से हो सकती है. सीरीज में कई जगह संवाद में तमिल भाषा का प्रयोग किया गया. उस दौरान किरदारों को बातों को समझने के लिए नज़रें सबटाइटल्स पर टिकी रहनी ज़रूरी है.

सीरीज सीधे तौर पर ना सही लेकिन व्यवस्था और हालातों पर भी यह सीरीज सवाल उठाती है. यह सीरीज देशों के नीतियों पर भी उंगली उठाती है जो आए दिन विद्रोही समूह को जन्म दे रही है. सीरीज में तमिलियों के दर्द को कश्मीर के मुसलमानों से जोड़कर भी एक दृश्य में बयां किया गया है. श्रीलंका के तमिलियन्स को दक्षिण भारत के कुछ जगहों से स्थानीय सपोर्ट मिल रहा है. किसी के लिए आतंकवादी तो किसी के लिए वही इंसान सैनिक होता है. सीरीज इस मुद्दे को भी छूती है.

यह सीरीज उन अनसंग हीरोइज्म को भी सलाम करती है जो भले ही देश के नेता या उनकी पॉलिटिकल सोच के खिलाफ हों लेकिन उनकी रक्षा के लिए वे अपनी जान की बाज़ी लगा सकते हैं. पेरेंट्स के काम और फैसलों का असर बच्चों पर कितना पड़ता है. इस सीरीज में इसे भी दिखाया गया है.

अभिनय की बात करें तो एक बार फिर मनोज बाजपेयी श्रीकांत तिवारी के किरदार में दिल जीत ले जाते हैं. वह अपने किरदार की झुंझलाहट, गुस्से को ह्यूमर से भरे संवादों के ज़रिए बखूबी जीते दिखते हैं. एंटागोनिस्ट के तौर पर फ़िल्म में सामन्था जानदार अभिनय किया हैं. एक बेचारी सी लड़की से खूंखार और निर्दयी अपराधी बन जाने का उनका ट्रांसफॉर्मेशन उनके उम्दा अभिनय को दर्शाता है.

शारिब हाशमी को सीरीज का दूसरा हीरो कहना गलत ना होगा. उनकी और मनोज बाजपेयी की केमिस्ट्री सीरीज के हाइलाइट पॉइंट्स में से एक है. रविन्द्र विजय,अश्लेषा ठाकुर,प्रियामणि, दिलीप ताहिल,विपिन शर्मा,सनी हिंदुजा,शाहाब अली, आनंद सामी,गोपी सहित सभी कलाकारों के अभिनय की भी तारीफ बनती है.

सीरीज की सिनेमेटोग्राफी उम्दा है. दक्षिण भारत की गलियों, घरों और रास्तों को जिस तरह से शो में दिखाया गया है. वह उसे रियलिटी के और करीब पहुंचा देता है. संवाद पिछले सीजन की तरह चुस्त होने के साथ साथ चुटीले भी हैं तो एक्शन पिछले सीजन से ज़्यादा उम्दा है.

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