Film Review: बिना किसी शोर शराबे के दिल को छू जाने वाली कहानी है सरदार उधम
Published by : Shaurya Punj Updated At : 16 Oct 2021 5:09 PM
विक्की कौशल की फिल्म सरदार उधम रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म की दर्शक खूब तारीफ कर रहे हैं. आइये जानते हैं कैसी है इसकी कहानी.
फ़िल्म -सरदार उधम
निर्देशक-शूजित सरकार
कलाकार- विक्की कौशल,अमोल पराशर, बनिता संधू,
स्टीफन होगन, कस्त्री एवर्टन, शॉन स्कॉट और अन्य
प्लेटफार्म- अमेज़न प्राइम वीडियो
रेटिंग- साढ़े तीन
इतिहास की कुछ तारीखें कभी नहीं भूली जा सकती हैं. 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल और गवर्नर डायर के इशारे पर हज़ारों मासूमों पर अंधाधुन गोलियां बरसायी गयी थी. यह नरसंहार भारतीय स्वन्त्रता संघर्ष के इतिहास का एक काला अध्याय है. महान क्रांतिकारी उधम सिंह ने लंदन जाकर गवर्नर माइकल ओ डायर के सीने में छह गोलियां मार इस नरसंहार का बदला लिया था. इस बदले को पूरा करने के लिए उन्हें 21 साल का इंतज़ार करना पड़ा था.
शूजित सरकार निर्देशित फिल्म सरदार उधम बदले की इसी 21 साल की जर्नी को दिखाता है. दो घंटे चालीस मिनट की इस फ़िल्म को देखने के बाद यह बात महसूस होती है कि यह सिर्फ बदले की कहानी नहीं है. यह क्रांति की कहानी है. यह हमें क्रांतिकारी नायक उधम सिंह को करीब से जानने का मौका देती है. यह फ़िल्म दिखाती है कि उधम सिंह गवर्नर माइकल ओ डायर सिर्फ मारना नहीं चाहते थे. डायर के घर काम करते हुए ऐसे कई मौके आए थे जब वे उसे आसानी से मार सकते थे लेकिन उनका मकसद डायर की हत्या करना भर ही नहीं था बल्कि भारतीय क्रांति की आवाज़ को पूरी दुनिया को सुनाना था, ताकि भारत में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ अंतर्राष्टीय दबाव बनाया जा सकें.
गुलाम भारत के एक युवा की बेचैनी को भी यह फ़िल्म दिखाती है, जो विदेशी जमीं पर भी अपनी गुलामी के दर्द को महसूस करता है. क्रस्टी से जब विक्की कौशल का किरदार कहता है कि तुम शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर अपना विरोध जता सकती हो. क्योंकि तुम एक बराबर हो हम नहीं है इसलिए हमें अलग रास्ता अख्तियार करना होगा.
फ़िल्म अपने सब प्लॉट्स के ज़रिए उधम सिंह की ज़िंदगी में प्यार और भगत सिंह की अहम मौजूदगी को दर्शाती है तो जलियांवाला बाग नरसंहार का साक्षी भी बनाती है. कहानी के सब प्लॉट्स आयरलैंड स्वन्त्रता,द्वितीय विश्वयुद्ध जैसे वैश्विक उथल पुथल को भी समेटे है. फ़िल्म अतीत और वर्तमान में चलती रहती है, लेकिन जिस परिपक्वता के साथ इसे दिखाया गया है. यह बाधा नहीं बनता है.
यह बॉलीवुड वाली मसाला बायोपिक नहीं है बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज है. आमतौर पर ऐसी कहानियों में बॉलीवुड में ओवर द टॉप होने की परम्परा रही है, लेकिन शूजित ने वो रास्ता अख्तियार नहीं किया है. वो जिस खामोशी के साथ क्रांतिकारी उधम सिंह की सशक्त कहानी को बयां कर गए हैं। वह खास है.
फ़िल्म शोर शराबा नहीं करती है लेकिन आपके दिल को झकझोरने का पूरा माद्दा भी रखती है. लेखन टीम की तारीफ करनी होगी जनरल डायर के किरदार को उन्होंने बॉलीवुड का टिपिकल अंग्रेज खलनायक नहीं बनाया है लेकिन उस किरदार से आपको घृणा होती है. गुस्सा आता है जब वह जालियांवाला बाग नरसंहार को जस्टिफाय करता है. जब वह कहता है कि अफ्रीका और भारत जैसे देशों में गोरों को राज करना जन्मसिद्ध अधिकार है. जालियांवाला बाग नरसंहार को जिस भावनात्मक तरीके से चित्रित किया है. वह रोंगटे खड़े कर जाता है. सिनेमा का माध्यम कितना प्रभावी है यह दृश्य इस बात का गवाह है.
अभिनय की बात करें तो यह फ़िल्म एक एक्टर के तौर पर विक्की कौशल को एक पायदान ऊपर ले जाती है. विक्की कौशल ने अपने इस किरदार के लिए उम्र के कई पड़ावों को पूरी शिद्दत के साथ जिया है. चीख पुकार और भारी भरकम डायलॉग के बिना उन्होंने अपने किरदार को इस कदर प्रभावी बना दिया है कि फ़िल्म देखते हुए आपकी नज़रें उनसे नहीं हटती है. सीमित स्क्रीन स्पेस के बावजूद अमोल पराशर भगत सिंह के किरदार में अपने संवाद से अलग रंग भरते हैं तो बिनीता संधू की भी खामोशी याद रह जाती है।ब्रिटिश एक्टर्स शॉन स्कॉट, स्टीफन होगन, कस्त्री एवर्टन सहित सभी उम्दा रहे हैं.
फ़िल्म की तकनीकी पक्ष पर बात करें तो सिनेमेटोग्राफी शानदार है. जिस तरह से फ़िल्म में 1919 से 1940 के दौर को सेट्स, लोकेशंस,कॉस्ट्यूम के ज़रिए बारीकी से उकेरा गया है. वो अंतराष्ट्रीय फिल्मों की याद दिलाता है. पंजाब,रूस से लेकर लंदन तक के दृश्यों को कैमरे में बेहतरीन ढंग से कैद किया गया है. फ़िल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी और संवाद के साथ न्याय किया गया है. फ़िल्म की लंबाई फ़िल्म देखते हुए थोड़ी अखर सकती है लेकिन यह भारत के उस महान क्रांतिकारी की कहानी को बयां करती है. जिसके 21 सालों के संघर्ष से भारत की आधी से अधिक आबादी अनजान है. कुछ फिल्में अच्छी और बुरी से परे ज़रूरी होती है. सरदार उधम उसी फेहरिस्त में आती है.
Posted By Ashish Lata
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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