Vadh 2 Movie Review :यह सीक्वल फिल्म ओरिजिनल से भी है बेहतर

Updated at : 06 Feb 2026 6:05 AM (IST)
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vadh 2 movie review

vadh 2 movie review

सिनेमाघरों में आज रिलीज हुई फिल्म वध 2 देखने की प्लानिंग है तो इससे पहले पढ़ ले यह रिव्यु

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फिल्म -वध 2
निर्माता -लव रंजन
निर्देशक -जसपाल सिंह संधू
कलाकार -संजय मिश्रा, नीना गुप्ता,कुमुद मिश्रा,अक्षय डोगरा ,शिल्पा शुक्ला,अमित के सिंह,योगिता बिहानी और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग – साढ़े तीन

vadh 2 movie review :बॉलीवुड में इनदिनों सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों का दौर चल रहा है.बॉर्डर 2 और मर्दानी 3 के बाद आज शुक्रवार वध 2 ने सिनेमाघरों में दस्तक दी है. यह फिल्म साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म वध का सीक्वल है.जिसमें अपराधी और पीड़ित के बीच की रेखा कहानी के अंत तक आते आते धुंधली हो जाती है.वध 2 भी उसी विचारधारा को ना सिर्फ आगे बढाती है बल्कि पिछली फिल्म से और बेहतर भी बनी है.बहुत कम सीक्वल फिल्मों के लिए बॉलीवुड में यह बात कही जा सकती है. कुलमिलाकर यह फिल्म देखनी बनती है.

ये है फिल्म की कहानी

इस बार इस क्राइम ड्रामा की कहानी के लिए मध्यप्रदेश का एक जेल चुना गया है. कहानी की शुरुआत 28 साल पहले होती है.युवा मंजू सिंह (नीना गुप्ता )को दो हत्याओं को दोषी बताते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है और कहानी 28 साल बाद यानी वर्तमान में पहुंच जाती है.मंजू उम्रदराज हो गयी है. जल्द ही उसकी रिहाई होने वाली है लेकिन इतने सालों में जेल और उसमें रहने वाले लोग कई लोग उसके अपने बन गए है. ऐसा ही एक ख़ास रिश्ता वह पुलिसकर्मी शम्भूनाथ ( संजय मिश्रा )से सांझा करती हैं. मध्यप्रदेश के इस जेल में महिला वार्ड के साथ -साथ पुरुषों का भी वार्ड है. इसी जेल में एक दबंग विधायक का भाई केशव (अक्षय डोगरा )भी बंद है,लेकिन कैदी होने के बावजूद जेल में उसकी मनमानी चलती है.हर कोई उससे परेशान है.महिला कैदी नैना (योगिता बिहानी )से लेकर नए जेलर प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा ) तक. इसी बीच अचानक से केशव गायब हो जाता है. जांच के लिए नए ऑफिसर अतीत (अमित )की एंट्री होती है.शक की सुई प्रकाश सिंह से लेकर शम्भुनाथ सभी पर घूमती है. कुछ महीने बाद केशव की लाश मिलती है. किसने उसे मारा और क्यों. सारे सबूत प्रकाश सिंह के खिलाफ हैं. मंजू और शम्भूनाथ इसमें कैसे जुड़े हैं. यह सब सवालों के जवाब यह फिल्म देती है.

फिल्म में ढेर सारी हैं खूबियां

साल 2022 में घर के भीतर के एक वध को दिखाया गया था. इस बार जेल के भीतर इसे अंजाम दिया गया है. जेल अब तक कई फिल्मों और वेब सीरीज में नज़र आ चुकी है.जिसमें जेल की जिंदगी, कैदियों के संघर्ष,जेल के भीतर के गिरोहों और जेल कर्मचारियों के जीवन को दिखाया गया है.वध 2 की कहानी का आधार भी जेल है, लेकिन जेल इस कहानी आधार होते हुए भी इसका ट्रीटमेंट अलग है.यह फिल्म दो प्रौढ़ लोगों की इंटेंस लव स्टोरी है. जहां दो लोग एक दूसरे से बिना मिले भी इस कदर प्यार में हैं कि एक दूसरे के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.फिल्म धीरे -धीरे आगे बढ़ती है.यह ऐसी थ्रिलर फिल्म है. जो आपका धैर्य मांगती है लेकिन एक बार जब यह रफ़्तार पकड़ लेती है तो फिर रूकती नहीं है.फिल्म में जबरदस्त इंटेंस ड्रामा है.आपको लगता है कि आप जो समझ रहे हैं. फिल्म उसी तरफ ही बढ़ रही है लेकिन आखिर के आधे घंटे में परदे पर बहुत कुछ ऐसा घटता है, जो आपने सोचा नहीं है और वही पहलू इस फिल्म को और मज़ेदार बनाती है.फिल्म की स्क्रिप्ट में कई लेयर्स है.फिल्म क्राइम ड्रामा के साथ -साथ समाज के स्याह पक्ष को भी आइना दिखाती है. जातिवादी मानसिकता पर यह फिल्म चोट करती है.न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है.जब नैना का किरदार कहता है कि वह बेगुनाह है,लेकिन उसकी बेल नहीं हो पा रही है जबकि वही केशव का किरदार कहता है कि वह अपनी मर्जी से जेल में रुका हुआ है. यह फिल्म आखिर में जैसी करनी वैसी भरनी की सीख भी देती है. फिल्म का ट्रीटमेंट वास्तविकता के करीब रखा गया है.जेल में कोई कैमरा नहीं था. यह बात नए जेलर प्रकाश सिंह के आने से ही साफ़ हो जाती है कि जल्द ही जेल में कैमरा लगाया जाएगा. फिल्म में संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की केमिस्ट्री कमाल की है. जेल की दीवार के आरपार बातचीत वाला दृश्य दोनों के शानदार अभिनय को दर्शाता है. फिल्म के आखिर में उनपर फिल्माया गीत सुकून देता है. इस क्राइम थ्रिलर फिल्म के संवाद इंटेंस होने के साथ -साथ चुटीले भी हैं, जो किरदारों को और निखारते हैं. सिनेमेटोग्राफी कहानी के साथ न्याय करती है.बैकग्राउंड म्यूजिक भी अच्छा बन पड़ा है. वध का सीक्वल होते हुए भी यह एक नयी फिल्म है. अगर आपने पिछली फिल्म नहीं भी देखी है तो यह आप देख सकते हैं. पिछली फिल्म के मुख्य कलाकार और किरदारों के नाम बस एक हैं.

कुछ खामियां भी रह गयी हैं

फिल्म से जुड़ी खामियों की बात करें तो स्क्रीनप्ले में कुछ खामियां रह गयी हैं. मंजू और शंभू नाथ की शुरुआत बॉन्डिंग को दिखाया जाना था. जिससे यह बात और पुख्ता होती कि शम्भूनाथ का किरदार मंजू के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार है. इसके साथ ही प्रकाश सिंह की भतीजी और उसके पति से किस तरह से मंजू जुड़ी हुई थी. इस पर भी फिल्म में बात होनी चाहिए थी. फिल्म के क्लाइमेक्स में बस एक सीन के ज़रिये उस दृश्य को खत्म कर दिया गया है. जो अखरता है क्योंकि फिल्म के क्लाइमेक्स का आधार वही सीन है.मंजू के परिवार के बारे में भी जिक्र नहीं किया गया है..

कलाकारों का परफॉरमेंस है जबरदस्त

फिल्म की कास्टिंग पर गौर करें तो संजय मिश्रा,नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा,शिल्पा शुक्ला जैसे नाम शुमार हैं, जिससे यह तय हो जाता है कि ये नाम अपने अभिनय से फिल्म की कहानी को और प्रभावी बनाएंगे.ऐसा हुआ भी है.इन मंझे हुए अभिनेताओं के साथ युवा अभिनेता अमित के सिंह की भी तारीफ बनती है.इन दिग्गज कलाकारों के बीच उन्होंने सशक्त उपस्थिति दर्शायी है.योगिता बिहानी अपने किरदार के अनुरूप मासूम नज़र आयी हैं तो अक्षय डोगरा अपने अभिनय से नफरत बटोरने में कामयाब हुए हैं.जो एक्टर के तौर पर उनकी जीत है. बाकी के किरदारों ने अपनी -अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.

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Urmila Kori

लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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