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साउथ वाले ओरिजिनल कंटेंट बना रहे हैं हम रीमेक और रीमिक्स में ही लगे रहते हैं- दिव्येंदु शर्मा

मिर्जापुर फेम अभिनेता दिव्येन्दु शर्मा फ़िल्म मेरे देश की धरती में जल्द ही नज़र आनेवाले हैं. यह फ़िल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

By उर्मिला कोरी
Updated Date
Divyendu Sharma
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मिर्जापुर फेम अभिनेता दिव्येन्दु शर्मा फ़िल्म मेरे देश की धरती में जल्द ही नज़र आनेवाले हैं. यह फ़िल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी. दिव्येन्दु कहते हैं कि वे पहले भी कई फिल्मों का हिस्सा रहे हैं लेकिन इस समय ओटीटी की वजह से उनके दर्शक बढ़ गए हैं. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत.

इस फ़िल्म में आपको सबसे ज़्यादा क्या अपील कर गया था?

इसकी कहानी जिस मुद्दे पर यह बात कर रही है. हम अपने देश के किसानों के हालात के बारे में जानते हैं लेकिन कुछ नहीं कर पाते हैं. ये फ़िल्म बताती है कि आप क्या कर सकते हैं. यह फ़िल्म बताती है कि सिर्फ परेशानियों को दिखाने से ही जिम्मेदारी खत्म नहीं होती है. उसका समाधान भी दिखाना ज़रूरी है तो. ये फ़िल्म वो काम करती है.

निजी जिंदगी में आप फार्मिंग या गार्डेनिंग में रुचि रखते हैं?

मुझे गार्डेनिंग से प्यार है. मेरे घर की एक बालकनी पूरी तरह से पेड़ पौधों को समर्पित है. मेरे पास नारंगी का एक पौधा है. वो पौधा दस साल से है और उसमें बहुत अच्छे फ्रूट्स आते हैं. इसके अलावा लेमन ग्रास,पुदीना भी मेरे गार्डेन में होता है. आगे चलकर मैं फार्मिंग में भी कुछ करना चाहूंगा.

आपकी यह फ़िल्म थिएटर में रिलीज हो रही है ,आप ओटीटी के स्टार हैं क्या दोनों के दर्शक एक हैं?

मुझे लगता है कि दोनों दर्शक एक ही हैं. जो ओटीटी पर शोज देखते हैं और थिएटर में फिल्में. ओटीटी तो मेरे लिए बहुत फायदेमंद रहा है क्योंकि उसकी वजह से ही मेरे दर्शक बढ़े हैं. फिल्में मैं हमेशा से करता आ रहा हूं लेकिन मेरे दर्शक अब इतने ज़्यादा हुए हैं. मुझे एयरपोर्ट पर एक बंदा मिला था. उसने कहा था कि सर हम क्वारंटीन थे. अस्पताल में थे. आपकी मिर्जापुर 2 रिलीज हुई थी. हम सबने देखी थी. हमने उस मुश्किल वक़्त को भी उस शो की वजह से आसानी से काट लिया था. बहुत खुशी हुई कि भगवान ने हमें ये मौका दिया कि हम किसी की ज़िंदगी में खुशी ला सके.

क्या प्रोजेक्ट किस माध्यम पर रिलीज होगा यह बात आपके लिए मायने रखती है?

मैं बस कहानी और किरदार को देखता हूं अगर वो मुझे अपील करते हैं तो वो ओटीटी पर आए या सिनेमाघरों में मुझे फर्क नहीं पड़ता है. ओटीटी की पहुंच बहुत बड़ी हो गयी है. हां मैं ये ज़रूर चाहूंगा कि मेरे देश की धरती फ़िल्म लोग ज़रूर देखें. यह एक अहम मुद्दे के बारे में बात करती है.वो भी इंटरटेनिंग तरीके से. हमारे देश में बेरोजगारी अभी भी एक बड़ी समस्या है. जिस तरह से मेरे किरदार को इस फ़िल्म में राह मिली. भारत के दूसरे युवाओं को भी मिलेगी.

मौजूदा दौर की बात करें तो साउथ फिल्मों की कामयाबी के बाद ऐसी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं कि कहानी से ज़्यादा वीएफएक्स और हीरोइज्म फ़िल्म की ज़रूरत है?

साउथ की जिन तीनों फिल्मों ने हमारे यहां बिजनेस किया है. वो सिर्फ इसलिए की उसमें कहानी थी इसलिए नहीं कि सिर्फ वीएफएक्स था. इन तीनों ही फिल्मों पर गौर करें तो वो इमोशनल कहानी थी. बॉलीवुड में उसकी कमी होने लगी है. हम ज़्यादातर रीमेक बनाने में ही लगे रहते हैं. तीन एक के बाद एक साउथ फ़िल्म लोगों को अपील कर रही है मतलब साफ है कि एक्शन और ड्रामा के साथ साथ उससे जुड़ा इमोशन भी कनेक्ट हुआ है. इसके साथ ही साउथ वाले हमसे ज्यादा रिस्क भी लेते हैं. इतने बड़े बजट की फ़िल्म बनाना आसान नहीं है. जो रिस्क लेगा. उसको फायदा भी मिलेगा.

इस फ़िल्म में शहर से गांव आप रहने जाते हैं ,क्या निजी जिंदगी में आप गाँव में रहे हैं?

नहीं, ज़िन्दगी में रहने का मौका नहीं मिला था हां इस फ़िल्म के दौरान ज़रूर 35 से 40 दिन गांव वालों के साथ रहा हूं. मध्यप्रदेश में शूटिंग हुई है. भोपाल के सिहोर में भी. शूटिंग के दौरान सभी एक परिवार की तरह बन गए थे. कौन किस घर में रहता था. सब पता होता था. भूख लगती थी तो बेधड़क किसी के घर में भी जाकर खा लेता था. एक महिला थी. वो मेरे लिए मिठाई बनाकर हर दूसरे दिन लाती थी और चुपके से मेरे हाथ में देकर चली जाती थी. बहुत ही कमाल का अनुभव गांव में शूटिंग का रहा.

फ़िल्म के ट्रेलर में आप निराशा में आत्महत्या करने जा रहे हैं निजी जिंदगी में लो फील करने पर खुद को कैसे मोटिवेट किया है?

जो सिचुएशन है उससे साइड हटकर देखना ज़रूरी होता है. थोड़ा दूर से देखेंगे तो हल निकल जाएगा. फ़िल्म की स्क्रिप्ट लिखते हुए जब सबकुछ हमारे हाथ में होता है तो भी हम दिक्कतें डालते हैं वरना कहानी एकदम बेकार हो जाएगी. ज़िन्दगी का भी यही सीधा और साफ पैटर्न हैं. ऊपर जाएंगे तो नीचे भी आएंगे. नीचे होंगे तो ऊपर भी जाएंगे. सबके मजे लो. टेंशन मत लो. यही सोचकर अपने लो फेज से डील करता आया हूं.

मुम्बई जब आए थे तो क्या तय किया था कि एक्टिंग में इतना ही समय संघर्ष के लिए दूंगा वरना कुछ और करूंगा?

नहीं बिल्कुल भी नहीं,मुझे और कोई काम आता ही नहीं है. चुपचाप यही करते रहो. तय कर लिया था क्योंकि बाकी चीजों में बहुत बेकार हूं.

आनेवाले प्रोजेक्ट्स?

यशराज फिल्म्स के लिए एक फ़िल्म कर रहा हूं. इम्तियाज़ अली के साथ एक फ़िल्म कर रहा हूं. अप्पलॉज के साथ एक वेब सीरीज है. ये तीनों प्रोजेक्ट्स की लगभग शूटिंग हो गई है.

मिर्जापुर 3 में दर्शक आपको मिस करेंगे या आप दिखेंगे?

वो तो राज़ की बात है. कैसे बता सकता हूं.

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