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दुख की बात है अधिकतर शादियां इसी वजह से टिकी हैं: Kirti Kulhari

By उर्मिला कोरी
Updated Date
 Kirti Kulhari की वेब फ़िल्म शादिस्तान जल्द होगी रिलीज
Kirti Kulhari की वेब फ़िल्म शादिस्तान जल्द होगी रिलीज
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अपने किरदारों से स्वतंत्र और सशक्त महिला की छवि को हमेशा अलग अलग तरीके से परिभाषित करने वाली अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी जल्द ही डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब फ़िल्म शादिस्तान में नज़र आनेवाली हैं. उनकी इस फ़िल्म,तलाक,शादी जैसे कई मुद्दों पर उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश

एक्टर के तौर पर शादिस्तान में आपको क्या खास लगा ?

इस फ़िल्म की जो थीम है. वो मुझे खास लगी. मेरा किरदार साशा का है. वो काफी अलग है. एक्टर के तौर पर मुझे वो एक्सप्लोर करना था. फ़िल्म की थीम की बात करूं तो यह फ़िल्म सवाल पूछती है कि क्या आप आज़ाद है. आप जो आज यहां हैं ।जिस भी हालात या मुकाम पर. वो अपनी मर्जी से हैं या किसी और वजह से हैं. ये बहुत ही सिंपल सवाल है. जो हर किसी को अपने आप से पूछना चाहिए कि आज़ाद होने का मतलब उनके लिए क्या है.

निजी जिंदगी में आपके लिए आज़ादी के क्या मायने हैं ?

मैंने जो आपको अभी कहा वही मेरे लिए मायने रखता है। मेरे लिए आज़ादी वही है कि मेरी ज़िंदगी की छोटी सी छोटी बड़ी से बड़ी चॉइस हो वो मेरी मर्जी से हो।दो बातें होती हैं. आप चाहते बहुत कुछ हैं लेकिन क्या उसपर काम करने की मजबूती और समझ आप में हैं. हर फैसले के साथ परिणाम भी जुड़े होते हैं क्या आप उनको संभालने के लिए तैयार हैं. हमेशा आप सही फैसला लो ये ज़रूरी नहीं लेकिन हर फैसला आपको जरूर कुछ सीखा जाता है. इन बातों को कहने के साथ मैं कहना चाहूंगी कि कुछ ज़िन्दगी ने मौके दिए कुछ मौके मैंने खुद के लिए बनाए. मैंने अपनी ज़िंदगी को ऐसे बनाया कि मैं अपने फैसले खुद ले सकूं. कई बार हमारे फैसलों में समाज,परिवार या लाइफ पार्टनर की रजामंदी नहीं होती है लेकिन फिर भी क्या आपमें अकेले आगे बढ़ने की हिम्मत होगी।वो महत्वपूर्ण होता है.

आपकी ज़िंदगी का कौन सा फैसला था जिसके लिए आप में अकेले आगे बढ़ने की हिम्मत थी ?

हमें बड़े बड़े फैसले याद रहते हैं. चाहे वो कैरियर चूज करना हो. शादी करना हो. बच्चे पैदा करने हो. ये हमें दिखती है कि ये मैंने फैसले किए थे या मुझे ये फैसले करने के मौके नहीं मिले थे लेकिन उसके अलावा भी फैसले करने पड़ते हैं रोजमर्रा की ज़िंदगी में. जो हमें परिभाषित करते हैं. मैं अपनी बात करुं तो मैं थोड़ी अलग बचपन से रही हूं. बातों का मैंने बतंगड़ बनाया है. जब मुझे चीज़ें समझ नहीं आयी या ठीक नहीं लगी. बहुत सारी चीज़ें हमारी परवरिश में शामिल होती हैं. जिनके सही या गलत होने को आप समझ नहीं पाते इसलिए सवाल भी जल्दी नहीं उठा पाते हैं. एक्टिंग कैरियर को चुनना मेरे लिए बहुत बड़ा फैसला था. मैंने अपने माता पिता से उनकी रजामंदी मांगी थी।मेरे माता पिता हमेशा से सपोर्टिव रहे हैं लेकिन ये तय था कि अगर वो मुझे हां नहीं भी कहते तो मैं एक्टिंग को ही अपना कैरियर बनाती थी. दूसरा फैसला शादी को लेकर था जब मुझे सही लगा तो ही मैंने शादी की और जब मुझे सही नहीं लगा तो मैंने तलाक का फैसला लिया. ये कोई भी फैसला आसान नहीं था लेकिन आपको खुद के लिए लड़ना पड़ता है.

फैसले लेते हुए क्या अकेले रह जाने का डर जेहन में नहीं होता है ?

ये रहा होगा कुछ साल पहले लेकिन फिलहाल मेरी सोच बदल गयी है. मुझे अकेलापन छूता भी नहीं है. मैं अपने आप में बहुत खुश हूं. ये बात भी समझ आ गयी है कि अगर आप अकेलेपन की मानसिकता से जूझ रहे हैं तो शादी होकर बच्चे होकर भी अकेले रहेंगे. पूरी दुनिया आपके आसपास होगी लेकिन आप अकेले रहेंगे. अकेलेपन की जो बीमारी है उसका इलाज आप कर सकते हैं. आपके आसपास के लोग नहीं.

आपको मजबूती कहां से मिलती है ?

ये बहुत अच्छा सवाल है. कभी इस बारे में सोचा नहीं था इस बारे में. बात ये है कि आप जब थोड़ी हिम्मत दिखाते हैं तो अगली बार थोड़ी और हिम्मत आपको महसूस होती है फिर और हिम्मत महसूस होती है. ये हर इमोशन के साथ होता है. अगर आप किसी डर को नहीं छोड़ पा रहे हैं तो अगली बार आपको और डर लगेगा। डर जैसे बढ़ता है. हिम्मत भी वैसे बढ़ती है. ऐसी है ज़िन्दगी जिस राह पर चल पडो. वो आगे दिखाती जाती है. मैं भगवान में बहुत विश्वास करती हूं. जो परमात्मा है उनकी तरफ मेरे हाथ हमेशा जोड़े रहते हैं. यकीन है कि जो हो रहा है अच्छा है जो होगा वो भी अच्छा ही होगा.सिंपल बात है लेकिन बहुत स्ट्रेंथ मिलती है.

यह फ़िल्म शादी के मुद्दे को उठाती है ,आपके लिए आदर्श शादी क्या है ?

किसी भी शादी में सही कारणों से बंधे. किसी को सहारा बनाने के लिए. कोई आपकी ज़रूरत पूरा करें इसलिए शादी मत कीजिए लेकिन दुख की बात ये है कि अधिकतर शादियां इसी वजह से टिकी हैं. प्यार और साथ के लिए बहुत कम लोग साथ में रहते हैं. बाकी सब एक दूसरे की जरूरतें पूरी कर रहे हैं चाहे फिजिकल हो, इमोशनल हो,मेन्टल हो या फिर आर्थिक हो।यही सब दुनिया में चल रहा है शादी के नाम पर रिश्तों के नाम पर.

आपके किरदार साशा की बात करें तो क्या तैयारियां रहीं ?

मैं हमेशा से सिंगर और म्यूजिशियन से प्रभावित रही हूं इसलिए सोचा था कि परदे पर जब भी करूंगी ढंग से करूंगी. सिंगिंग मैं बचपन से सीख रही हूं लेकिन ज़्यादा मौके नहीं मिलते हैं रियाज़ के लिए. इस फ़िल्म में जो मेरे को एक्टर्स हैं वो रियल म्यूजिशियन्स हैं तो उनसे बहुत मदद मिली. परफॉर्म करते हुए कैसे माइक पकड़ना है. स्टेज पर जब बैंड मेंबर बात करते हैं तो किस तरह से करते हैं।वो सब सीखा और समझा.

फ़िल्म ओटीटी पर ही रिलीज होगी ये पहले से तय था ?

हां ओटीटी रिलीज ही हमारा लक्ष्य थी. फ़िल्म से जुड़े ज़्यादातर लोग नए हैं फिर चाहे निर्माता,निर्देशक हो या फिर एक्टर्स. इस फ़िल्म के अपने दर्शक होंगे और हम चाहते थे कि ओटीटी के ज़रिए ये अपने सही दर्शकों तक पहुंचे ना कि थिएटर में रिलीज के लिए अटकी रहें.

मौजूदा लॉक डाउन की वजह से आपका कोई प्रोजेक्ट जिसकी शूटिंग रुक गयी ?

मैं दो वेब सीरीज की शूटिंग कर रही थी. हॉटस्टार पर आनेवाली ह्यूमन जिसमें शेफाली शाह मेरे साथ हैं. इसकी दस बारह दिन की शूटिंग बची है. फोर मोर शॉट्स की शूटिंग शुरू ही हुई थी. वो भी रुक गयी.

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