KBC के नए सीजन का रजिस्ट्रेशन शुरु, इन 5 महिला करोड़पति से सीखिये कैसे उन्होंने सपनों को पंख दिये

KBC- साल 2000 तारीख 3 जुलाई कौन बनेगा करोड़पति के पहले एपिसोड की शुरुआत स्टार प्लस पर हुई. जब ये शो शुरु हुआ तो शायद ही किसी ने सोचा था कि क्विज शो लोगों को पसंद आएगा. लेकिन अमिताभ बच्चन ने इस शो के साथ इतिहास रच दिया. इस शो के अब तक 11 सीजन आ चुके हैं और 12वें सीजन का रजिस्ट्रेशन शनिवार शाम से शुरू हो चुका है. कई लोग शो में पहुंचने, हॉट सीट पर बैठने और सवालों का जवाब देते हुए करोड़पति बनने का सपना देखते हैं. हालांकि, यह सपना पूरा कुछ ही लोगों का हो पाया है. अब तक के 11 सीजन में पांच महिलाओं ने अपने ज्ञान औऱ बुदि्ध से शो में करोड़पति बनीं.
साल 2000 तारीख 3 जुलाई कौन बनेगा करोड़पति के पहले एपिसोड की शुरुआत स्टार प्लस पर हुई. जब ये शो शुरु हुआ तो शायद ही किसी ने सोचा था कि क्विज शो लोगों को पसंद आएगा. लेकिन अमिताभ बच्चन ने इस शो के साथ इतिहास रच दिया. इस शो के अब तक 11 सीजन आ चुके हैं और 12वें सीजन का रजिस्ट्रेशन शनिवार शाम से शुरू हो चुका है. कई लोग शो में पहुंचने, हॉट सीट पर बैठने और सवालों का जवाब देते हुए करोड़पति बनने का सपना देखते हैं. हालांकि, यह सपना पूरा कुछ ही लोगों का हो पाया है. अब तक के 11 सीजन में पांच महिलाओं ने अपने ज्ञान औऱ बुद्धि से शो में करोड़पति बनीं. तो आइये आपको बताते हैं उन महिलाओं के बारे में जो इस शो में खाली हाथ आई और करोड़पति बन कर गईं. साथ ही लोगों को हौसला दिया कि कैसे वो अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं.
बबीता ताड़े (सीजन-11 विनर)
कौन बनेगा करोड़पति के 11वें सीजन में महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली बबीता ताड़े (Babita Tade) ने एक करोड़ रुपये जीते थे. बबीता अमरावती के पंचकुला के पंचाफुलेबाई हरने स्कूल में मिड-डे मील बनाती हैं. इस काम के लिए उन्हें महीने में सिर्फ 1500 रुपये मिलते हैं.
बबीता ने शो पर खुलासा किया था कि वह दुनिया भर में होने वाली घटनाओं से खुद को अपडेट रखने के लिए सिर्फ अखबार पढ़ती हैं. बबीता के पति इसी स्कूल में चपरासी हैं. उन्होंने शो में हर एक सवाल बहुत सोच-समझ कर दिया था. बबीता ने शो में कहा था कि इस शो को जीतकर वो ये साबित करना चाहती है कि एक खिचड़ी बनानी वाली भी अपने सपने पूरे कर सकती हैं. अमिताभ बच्चन ने उन्हें शो के दौरान एक फोन गिफ्ट किया था.
विनीता जैन (सीजन-10 विनर)
असम की विनीता जैन 2 अक्टूबर को कौन बनेगा करोड़पति सीजन-10 की पहली महिला करोड़पति बनीं थी. असम की विनीता एक ट्यूशन टीचर हैं. केबीसी सीजन-10 में विनीता से एक करोड़ का सवाल पूछा गया था, जिसका सही जवाब देकर वो करोड़पति बनीं थी.
उन्होंने शो के दौरान बताया था कि, साल 2003 की बात है. मेरे पति बिजनेस के सिलसिले में बाहर जाते रहते थे. एक दिन वो घर नहीं लौटे. पता चला कि उनका अपहरण कर लिया गया है. उन दिनों चरमपंथियों का खौफ रहता था. हम भी उसी चपेट में आ गए. मेरे घरवालों ने कोई कमी नहीं छोड़ी. कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. हालात से समझौता करते हुए हमने सोचा कि इंतजार करते हुए हमें आगे बढ़ना होगा. मैंने सोचा कि पढ़ाने का काम ले लूं. घर पर भी रहूंगी और अपने बच्चों की देखभाल भी कर सकूंगी.” उन्होंने जीती रकम से अपने बेटे के लिए डेंटल क्लीनिक खोला. अभी वो एक स्कूल की प्रिसिंपल हैं.
अनामिका मजूमदार (सीजन- 9 विनर)
केबीसी-9 की पहली करोड़पति जमशेदपुर की रहने वाली अनामिका मजूमदार बनी थीं. जब उनसे ये पूछा गया कि वो इन जीते गए पैसों से क्या करेंगी तो उन्होंने कहा कि वो केबीसी से मिले रुपयो को अपने एनजीओ पर खर्च करेंगी. दो बच्चों की मां अनामिका एक सोशल वर्कर हैं. ये ‘फेथ इन इंडिया’ नाम से एक एनजीओ चलाती हैं. अनामिका जब सोशल वर्क नहीं करतीं तो भी वो गरीब बच्चों को पढ़ाती थीं. अनामिका एक डांसर भी हैं और वो घर के पास वाली स्लम बस्ती के बच्चों को डांस सिखाती हैं.
सुनमीत कौर (सीजन-6 विनर)
केबीसी सीजन 6 की विनर सुनमीत की कहानी ने अमिताभ को काफी प्रभावित किया था. फैशन डिजाइनिंग की डिग्री के बाद भी सुनमीत के ससुराल वाले उन्हें डिजाइनिंग में आगे करियर नहीं बनाने दे रहे थे. लेकिन सुनमीत ने आशा नहीं छोड़ी. उन्होंने टिफिन सर्विस सेंटर खोला, हालांकि ये बिजनेस फ्लॉप रहा. इसके बाद उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरु किया, जिससे उन्हें नॉलेज मिला और उसी के दम पर KBC सीजन-6 जीता. खुद के पैरों पर खड़े होने की कोशिश और ससुराल से सपॉर्ट न मिलने के अभाव में भी जिस कॉन्फिडेंस के साथ कौर ने जीत हासिल की उसने रियल लाइफ में भी कई लोगों को प्रेरणा दी. अब सुनमीत इंडिपेंडेंट हैं और अपना फैशन हाउस चला रही हैं.
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राहत तस्लीम (सीजन-4 विनर)
मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की तैयार कर रहीं राहत तस्लीम केबीसी सीजन 4 में 1 करोड़ रुपये की राशि जीतने में कामयाब होते हुए करोड़पति बनी थीं. वे 2010 में प्रसारित हुए चौथे सीजन में करोड़पति बनी थीं. शो जीतने से बने पैसों से उन्होंने गारमेंट्स का एक शोरूम खोल लिया था. राहत ने एक बार मीडिया को इंटरव्यू में बताया था कि कई कंपनियों ने उन्हें शो जीतने के बाद अपने प्रॉडक्ट्स का ब्रांड एंबेस्डर बनने का न्यौता दिया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था.
फिलहाल वे गारमेंट्स का बिजनेस चलाती हैं. तस्लीम ने माना था कि शो जीतने के बाद उनकी जिंदगी में बड़े बदलाव आए थे. तस्लीम मूलता गिरिडीह की निवासी हैं. उनके परिवार में उनके पति और बेटा हैं. कुछ साल पहले उनकी बेटी की शादी हो चुकी है. अब वो सऊदी अरब में अपने ससुराल में रहती है. उनका बेटा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर चुका है और बिजनेस में हेल्प करता है.
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लेखक के बारे में
By दिव्या केशरी
दिव्या केशरी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम की लीड के रूप में कार्यरत हैं. वह 2020 से प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी हुई हैं और तब से लगातार फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री की खबरों को कवर कर रही हैं. उनके पास लगभग 8 साल का जर्नलिज्म एक्सपीरियंस है. एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में उनकी मजबूत पकड़ फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बीटीएस अपडेट्स, थ्रोबैक स्टोरी, गॉसिप और ट्रेंडिंग एंटरटेनमेंट न्यूज पर है. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को आसान, भरोसेमंद और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि पाठक सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि खबर से जुड़ाव भी महसूस करें.
शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.
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दिव्या केशरी का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता सिर्फ मनोरंजन की खबरें देना नहीं, बल्कि पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और रोचक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिसकी मदद से वह किसी भी खबर की गहराई तक पहुंचती हैं. वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, Google Discover फ्रेंडली और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करती हैं, ताकि पाठकों को सही जानकारी आसानी से मिले और उनका पढ़ने का अनुभव बेहतर हो.
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