संजय टुडू की डॉक्यूमेंट्री 'मैन मेलोडी एंड डॉल्स' अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में चयनित

Published by : Dashmat Soren Updated At : 17 Jul 2024 10:43 PM

विज्ञापन

डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'मैन मेलोडी एंड डॉल्स का पोस्टर

डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'मैन मेलोडी एंड डॉल्स' को "आईलिंडेन डेज 2024 इंटरनेशनल एथनोग्राफिक फिल्म फेस्टिवल" में इंट्री मिली है. यह फिल्म फेस्टिवल 19 से 26 जुलाई तक मैसेडोनिया गणराज्य के बिटोला शहर में होगा. 'मैन मेलोडी एंड डॉल्स' का स्क्रीनिंग 25 जुलाई को होगी. फिल्म 'मैन, मेलोडी एंड डॉल्स' संताल समुदाय की प्राचीन कठपुतली कला पर आधारित है

विज्ञापन

जमशेदपुर: शहर के युवा फिल्म निर्माता संजय टुडू की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मैन मेलोडी एंड डॉल्स’ को “आईलिंडेन डेज 2024 इंटरनेशनल एथनोग्राफिक फिल्म फेस्टिवल” में इंट्री मिली है. यह फिल्म फेस्टिवल 19 से 26 जुलाई तक मैसेडोनिया गणराज्य के बिटोला शहर में होगा. ‘मैन मेलोडी एंड डॉल्स’ का स्क्रीनिंग 25 जुलाई को होगी. फिल्म ‘मैन, मेलोडी एंड डॉल्स’ संताल समुदाय की प्राचीन कठपुतली कला पर आधारित है, जिसमें पश्चिम बंगाल के उत्तर दीनाजपुर जिले के रायगंज निवासी डोमन मुर्मू के जीवन संघर्ष को दिखाया गया है. डोमन मुर्मू एक कठपुतली कला के कलाकार हैं, जिनका जीवन कठिनाइयों से भरा हुआ है, लेकिन उन्होंने अपनी कला के प्रति अटूट समर्पण दिखाया है. संजय टुडू ने इस फिल्म के माध्यम से मुर्मू की अद्वितीय प्रतिभा और उनके कला के प्रति समर्पण को दर्शाया है. संजय टुडू का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का उद्देश्य संताल समुदाय की इस प्राचीन कला को पुनर्जीवित करना और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाना है. मुर्मू की कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे किसी व्यक्ति का समर्पण और दृढ़ संकल्प किसी भी कठिनाई को पार कर सकता है. ‘मैन मेलोडी एंड डॉल्स’ का चयन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो संजय टुडू के मेहनत और उनके दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है. इस फेस्टिवल में फिल्म की स्क्रीनिंग से निश्चित रूप से संताल समुदाय की कठपुतली कला को वैश्विक पहचान मिलेगी और डोमन मुर्मू जैसे कलाकारों के संघर्ष और समर्पण को सराहना मिलेगी

फीचर फिल्म अश्वत्थामा से मिली अलग पहचान

जमशेदपुर के आदिवासी युवा फिल्म निर्माता संजय टुडू ने पुणे में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीच्यूट से फिल्म संपादन में डिप्लोमा प्राप्त करके अपनी फिल्म निर्माण यात्रा शुरू की. अपने संपादन कौशल का उपयोग करते हुए संजय टुडू सिनेमा इंडस्ट्री में एक अलग छाप छोड़ीहै. संजय ने पुष्पेंद्र सिंह के साथ फीचर फिल्म “अश्वत्थामा” का एडिटिंग किया था. जिसका प्रीमियर 2017 में बुसान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में हुआ. फिल्म “अश्वत्थामा” ने उसे राष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान दिलाया. वहीं संजय द्वारा संपादित लघु फिल्म ‘डेज़ ऑफ ऑटम’ ने 2016 में केरल के अंतर्राष्ट्रीय वृत्तचित्र और लघु फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता था.

रंगमहल’ में सहायक निर्देशक के रूप में किया काम

संजय टुडू प्रतिभा प्रांतिक बसु की ‘रंगमहल’ में सहायक निर्देशक के रूप में भी उभरी. जिसे 2019 में बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया था. संजय कुमार टुडू की संपादन कला राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रशंसित लघु फिल्मों और वृत्तचित्रों में चमकती रही है. 2019 में फर्स्ट कट फिल्म फेस्टिवल में उनके असाधारण योगदान को स्वीकार किया गया. जहां उन्हें ‘दमोरनर्सएले’ के लिए सर्वश्रेष्ठ एडिटर (वृत्तचित्र) के रूप में सम्मानित किया गया. संजय टुडू मूलरूप से चांडिल क्षेत्र के तेरेडीह (चांडिल डैम के पास) गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई मास कम्युनिकेशन में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, रांची से से की है. जबकि फिल्म संपादन में पीजी डिप्लोमा की पढ़ाई फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीच्यूट, पुणे से वर्ष 2018 में की है.

चांडिल विस्थापितों पर भी बना रहे फिल्म

संजय टुडू चांडिल डैम विस्थापितों की कहानी पर आधारित एक संताली फिल्म बनाने जा रहे हैं. जल्द ही इसकी शूटिंग होगी. फिल्म नाम संताली में तीसेमरूवाड़ा गाते रखा गया है. वहीं इसका अंग्रेजी में व्हेनविल यू रिटर्न रखा गया है.

विज्ञापन
Dashmat Soren

लेखक के बारे में

By Dashmat Soren

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola