लाइट... कैमरा... एक्शन: नागपुरी फिल्मों में लग रहा बॉलीवुड का तड़का, विदेशों में हो रही शूटिंग

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jan 2020 9:57 AM

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हमर झॉलीवुड:नागपुरी फिल्मों की दुनिया 1992 से शुरू हुई. पहली नागपुरी फिल्म सोना कर नागपुर से शुरू हुआ यह सफर अब काफी लंबी दूरी तय कर चुका है़ नागपुरी फिल्मों की स्क्रीनिंग विश्व प्रसिद्ध कान फिल्म फेस्टिवल में हो चुकी है़ इसमें फुलमनिया और लोहरदगा जैसी नागपुरी फिल्में शामिल हैं. नागपुरी फिल्मी दुनिया यानी झॉलीवुड […]

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हमर झॉलीवुड:नागपुरी फिल्मों की दुनिया 1992 से शुरू हुई. पहली नागपुरी फिल्म सोना कर नागपुर से शुरू हुआ यह सफर अब काफी लंबी दूरी तय कर चुका है़ नागपुरी फिल्मों की स्क्रीनिंग विश्व प्रसिद्ध कान फिल्म फेस्टिवल में हो चुकी है़ इसमें फुलमनिया और लोहरदगा जैसी नागपुरी फिल्में शामिल हैं. नागपुरी फिल्मी दुनिया यानी झॉलीवुड की झंकार बॉलीवुड तक पहुंच चुकी है़ यहां की फिल्मों में भी लाइट, कैमरा और एक्शन का कमाल दिखने लगा है़ फिल्म मेकिंग तीन चरण प्री प्रोडक्शन, प्रोडक्शन और पोस्ट प्रोडक्शन से होकर गुजर रहा है. बेहतर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है़ ग्लैमर का तड़का दिख रहा है़ काॅस्ट्यूम डिजाइनर और प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट काम कर रहे हैं. नागपुरी फिल्मों की शूटिंग विदेशों में होने लगी है़ एक-एक नागपुरी फिल्म पर 70 लाख रुपये तक खर्च किये जा रहे हैं. पढ़िए लता रानी की रिपोर्ट…

झॉलीवुड की फिल्मों में बढ़ चुकी है स्क्रिप्ट राइटर्स की डिमांड

पहले झॉलीवुड की फिल्मों में प्री-प्रोडक्शन नहीं होता था़ अब प्री-प्रोडक्शन के तौर पर स्टोरी लिखी जाती है़ स्क्रिप्ट राइटर की डिमांड बढ़ गयी है, जबकि पहले नागपुरी फिल्मों में इसकी जरूरत नहीं महसूस की जाती थी़ आज स्क्रिप्ट राइटर को पैकेज मिल रहा है़ हाल है कि झारखंड के कई स्क्रिप्ट राइटर मुंबई शिफ्ट कर चुके हैं.

फिल्म मेकिंग से पहले अब वर्कशॉप
अब फिल्म मेकिंग से पहले वर्कशॉप होता है़ यह टेक्निकल मीटिंग होती है़ फिल्म से जुड़े सभी लोग जुटते हैं. इससे पता चलता है कि कोई फिल्म बनने जा रही है. फिल्मों का बजट तैयार हो रहा है. बजट के अनुरूप कलाकारों और अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है. जो सेलेक्ट होते हैं, वे प्रोडक्शन हाउस के वर्कशॉप में शामिल होते हैं.

रेड और फाइव डी कैमरा से बेहतर हो रही क्वालिटी

अब झॉलीवुड में बॉलीवुड की तरह ही रेड कैमरा का प्रयोग हो रहा है़ इससे पहले रेड कैमरा को मुंबई से रेंट पर लाया जाता था. अब कैमरामैन इसे रांची में उपलब्ध करा रहे हैं. यह कैमरा काफी मंहगा होता है. इससे झॉलीवुड फिल्मों की क्वालिटी बेहतर हो रही है़ फाइव-डी कैमरा का भी प्रयोग हो रहा है. . कैमरे की बॉडी की कीमत करीब तीन लाख होती है़ लेंस के लिए 50 हजार और खर्च करने पड़ते हैं.

झारखंड में शिफ्ट हो रहे लाइट इक्विपमेंट
लाइट के प्रति भी हमारी फिल्म इंडस्ट्री काफी अवेयर हो चुकी है़ अधिकतर लाइट इक्विपमेंट मुंबई से मंगवाये जाते हैं. झॉलीवुड में बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए मुंबई के लाइट टेक्नीशियंस ने अपना इक्विटमेंट झारखंड में शिफ्ट कर लिया है.

ऑडिशन से सेलेक्शन
अब झॉलीवुड की फिल्मों के लिए ऑडिशन लिये जाते हैं, जो पहले नहीं होता था. इससे स्थानीय कलाकारों को बेहतर मंच मिल जाता है.

आर्ट डायरेक्टर की बढ़ी है भूमिका
किसी भी फिल्म को बनाने के दौरान डायरेक्टर को जिन चीजों की जरूरत पड़ती है, उसे पूरा करने की जिम्मेदारी आर्ट डायरेक्टर पर होती है़ ये आर्ट डायरेक्टर पेंटिंग और स्कल्पचर फिल्ड से जुड़े होते हैं. इन्हें कला का ज्ञान होता है. शूटिंग के पहले सारी चीजें उपलब्ध करा देते हैं. इनकी भूमिका भी झॉलीवुड में बढ़ चुकी है़ साथ ही असिस्टेंट डायरेक्टर भी काम करने लगे हैं.

ये हैं चुनौतियां
हर वर्ष बनती है दो दर्जन फिल्में, लेकिन रिलीज एक चौथाई
झारखंड में प्रति वर्ष 20 से 25 फिल्माें का निर्माण हो रहा है, लेकिन रिलीज सिर्फ चार-पांच फिल्में ही हो पाती हैं. जानकारों के अनुसार फिल्मों की तुलना में यहां एलबम का बाजार ज्यादा अच्छा है़ प्रतिदिन एक-दो एलबम और गाने रिलीज होते हैं. कारोबार के नाम पर यहां की फिल्में काफी पीछे हैं. अलग-अलग रीजनल लैंग्वेज के कारण एक फिल्म पर दर्शकों का फोकस नहीं हो पाता है़

बॉलीवुड की तुलना में कलाकारों की फीस काफी कम
नागपुरी फिल्मों के एक जाने-माने डायरेक्टर के अनुसार झॉलीवुड के कलाकारों की फीस कम है़ हालांकि जिस बजट में यहां की फिल्में बनती हैं, उसके अनुसार संतोषजनक कहा जा सकता है़ झॉलीवुड में आज भी कलाकारों को प्रतिदिन के हिसाब से फीस मिलती है़ झॉलीवुड के अभिनेता और अभिनेत्री को प्रतिदिन दो हजार से पांच हजार रुपये तक फीस दी जाती है़ वहीं एक फिल्म पर 10 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक खर्च हो रहे हैं.

विदेशों में पहुंच चुकी है झॉलीवुड की झंकार
कान फिल्म फेस्टिवल में हुई स्क्रीनिंग
वर्ल्ड के प्रसिद्ध कान फिल्म फेस्टिवल (फ्रांस) में मई 2019 में नागपुरी फिल्म फुलमनियां की स्क्रीनिंग हो चुकी है. इस फिल्म के राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर लाल विजय शाहदेव थे. लोहरदगा की भी स्क्रीनिंग कान फिल्म फेस्टिवल में हुई है. इस फिल्म की डायरेक्टर नेहा सांडिल्य और प्रोड्यूसर लाल विजय शाहदेव हैं.

दुबई में नागपुरी एलबम की शूटिंग
हाल ही में नागपुरी फेम विवेक नायक छह कलाकारों की टीम के साथ दुबई से नागपुरी एलबम की शूटिंग करके लौटे हैं. दुबई में शूट एलबम तोर ख्याबों में.. को अब तक एक मिलियन व्यू मिल चुका है.

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