प्रेमंचद की कहानी ‘क्रिकेट मैच’ पर फिल्म बनाना चाहते हैं विशाल भारद्वाज, बोले- आखिरी गेंद फेंके तक…

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प्रेमंचद की कहानी ‘क्रिकेट मैच’ पर फिल्म बनाना चाहते हैं विशाल भारद्वाज, बोले- आखिरी गेंद फेंके तक…

ओंकारा’, ‘मकबूल’, ‘सात खून माफ’, ‘कमीने’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले विशाल भारद्वाज, प्रेमचंद की कहानी ‘क्रिकेट मैच’ पर फिल्म बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा, इस कहानी में एक विदेशी युवती है, जो भारत आकर भारतीयों को लेकर एक क्रिकेट टीम बनाती है.

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फिल्म निर्देशक, निर्माता और संगीतकार विशाल भारद्वाज प्रेमचंद की कहानी ‘क्रिकेट मैच’ पर फिल्म बनाने की ख्वाहिश रखते हैं और उनका कहना है कि अगर कभी कोई ‘फाइनेंसर’ मिला तो वह प्रेमचंद के साथ ही प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार शिवानी की किसी कहानी पर और महान उर्दू शायर मीर तकी ‘मीर’ पर ‘गालिब’ जैसी बायोपिक बनाना चाहेंगे.

विशाल भारद्वाज बनाने चाहते हैं प्रेमंचद की कहानी ‘क्रिकेट मैच’ पर फिल्म

‘ओंकारा’, ‘मकबूल’, ‘सात खून माफ’, ‘कमीने’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले विशाल ने संपन्न 17वें जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) में यह बात कही. विशाल भारद्वाज ने कहा कि उन्हें आजादी से पहले लिखी गई प्रेमचंद की यह कहानी इसलिए पसंद है कि यह क्रिकेट को केंद्र में रखकर लिखी गई है और इस खेल ने उनकी जिंदगी में भी बहुत बड़ी भूमिका अदा की है. विशाल ने बताया कि इस कहानी में एक विदेशी युवती है, जो भारत आकर भारतीयों को लेकर एक क्रिकेट टीम बनाती है और अंत में होता ये है कि टीम के सारे खिलाड़ी उस युवती से प्रेम करने लग जाते हैं.

आखिरी गेंद तक खेल नहीं होता है खत्म इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदी लेखकों में उन्हें शिवानी भी बहुत पसंद हैं और वह उनकी किसी कहानी को भी सुनहरे पर्दे पर उतारना चाहेंगें और साथ ही महान उर्दू शायर मीर तकी ‘मीर’ पर गालिब जैसी यादगार बायोपिक बनाने का भी उनका सपना है. भारद्वाज ने अपने जीवन पर क्रिकेट के भारी प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि क्रिकेट से उन्होंने एक बात सीखी कि आखिरी गेंद फेंके जाने तक मैच खत्म नहीं होता है.

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दर्शकों की पसंद से बननी चाहिए फिल्म

फिल्म इंडस्ट्र्री में गला काट प्रतिस्पर्धा, फिल्मों की सफलता-विफलता को प्रभावित करने वाली ताकतों संबंधी एक सवाल पर विशाल भारद्वाज ने कहा कि इस प्रकार की प्रवृति पहले भी कभी बालीवुड में नहीं रही, लेकिन जहां तक किसी कलाकार या निर्देशक को ‘चलाने या गिराने’ की बात है तो यह किसी के हाथ में नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘जिस के सिर पर ऊपर वाले का हाथ होता है, उसे कोई रोक नहीं सकता. दर्शकों को पसंद आता है तो चलता है.’’

12वीं फेल पर क्या बोले विशाल

फिल्म ‘12वीं फेल’ की सफलता को फिल्मों के लिए ‘एक उम्मीद की किरण’ बताते हुए विशाल ने कहा कि आजकल ऐसी फिल्मों के लिए पैसा जुटाना बहुत मुश्किल है. हर कोई डरा रहता है, हर कोई इस खोज में लगा रहता है कि थियेटर में क्या चलेगा? यह फिल्म बॉक्स आफिस पर 70 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी है.

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