सच को जितना दबाओगे, वह उतनी ही ताकत से लौटेगा, 'सतलुज' हटाए जाने पर भड़के राम गोपाल वर्मा, बोले- इसे दिखाओ

दिलजीत दोसांझ और राम गोपाल वर्मा, फोटो- इंस्टाग्राम
राम गोपाल वर्मा ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' की जमकर तारीफ की है. उन्होंने इसे 'कभी न भरने वाला जख्म' बताते हुए फिल्म को हटाए जाने पर सत्ताधारियों पर निशाना साधा है.
Ram Gopal Varma On Satluj: दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' रिलीज के बाद से लगातार चर्चा में बनी हुई है. 3 जुलाई को यह फिल्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. फिल्म ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. अब फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा फिल्म के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं.
Ram Gopal Varma Reviews Satluj: राम गोपाल वर्मा बोले-'यह फिल्म नहीं, कभी न भरने वाला जख्म है'
राम गोपाल वर्मा ने एक्स पर लिखा, "मैंने अभी 'सतलुज' देखी. यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि ऐसा गहरा जख्म है जो कभी नहीं भर सकता. यह हमारी इतिहास की सबसे अंधेरी घटनाओं में से एक की परतों को सामने लाती है. यह ऐसी फिल्म है जो सिनेमा को सच का सामना कराने का माध्यम बनाती है. दिलजीत दोसांझ ने बिना किसी दिखावटी हीरो वाली छवि के बेहद शांत लेकिन अंदर से जलते हुए गुस्से के साथ अभिनय किया है. उनके किरदार के हथियार सिर्फ एक रजिस्टर और उनका जमीर हैं. अर्जुन रामपाल ने उस व्यवस्था के नैतिक पतन को बेहद प्रभावशाली ढंग से दिखाया है, जिसे देखकर सब कुछ बेहद वास्तविक और डरावना लगता है."
Ram Gopal Varma Praises Director Honey Trehan: राम गोपाल वर्मा ने की डायरेक्टर की तारीफ
राम गोपाल वर्मा ने निर्देशक हनी त्रेहान के बारे में लिखा, "निर्देशक हनी त्रेहान ने इस फिल्म को सनसनीखेज बनाने की बजाय एक धीमी लेकिन दमदार जांच-पड़ताल वाली थ्रिलर की तरह पेश किया है. पूरी कहानी सरकारी फाइलों, श्मशान घाट के रिकॉर्ड और धीमी आवाज में होने वाली बातचीत के जरिए आगे बढ़ती है. यही संयम फिल्म को और ज्यादा असरदार बना देता है, क्योंकि यहां सच्चाई किसी सनसनी से नहीं बल्कि अपने वास्तविक रूप में सामने आती है."
Ram Gopal Varma On Satluj Removal: फिल्म हटाए जाने पर बोले राम गोपाल वर्मा
फिल्म को जी5 से हटाए जाने पर भी राम गोपाल वर्मा ने अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा, "फिल्म की रिलीज और प्रदर्शन को लेकर जो विवाद हुए हैं, वही साबित करते हैं कि जब कोई कला सत्ता में बैठे लोगों को असहज कर देती है, तब वह अपना असली काम कर चुकी होती है. यही सच्ची कला का मकसद है और 'सतलुज' बिल्कुल वैसी ही फिल्म है. यह ऐसी फिल्म है जिसे देखा जाना चाहिए, लोगों को दिखाई जानी चाहिए, इस पर चर्चा होनी चाहिए और बहस होनी चाहिए. इसे फिल्म के पीड़ितों की तरह 'एनकाउंटर' नहीं किया जाना चाहिए. मैं सत्ता में बैठे सभी लोगों से अपील करता हूं कि कृपया 'सतलुज' के साथ वही मत कीजिए जो जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था. सच को जितना छिपाने की कोशिश करेंगे, वह उतनी ही ताकत से सामने आएगा."
About Satluj: 'सतलुज' की कहानी क्या है?
'सतलुज' करीब चार साल की देरी के बाद 3 जुलाई को जी5 पर रिलीज हुई थी. फिल्म पहले 'पंजाब '95' के नाम से बनाई गई थी. फिल्म में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति की निजी तलाश कैसे धीरे-धीरे कथित गुमशुदगी और हिरासत में हुई मौतों जैसे बड़े मामलों का खुलासा करती है. पंजाब के उथल-पुथल भरे दौर की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म अन्याय, चुप्पी और व्यवस्था के खिलाफ एक संघर्ष की कहानी है.
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By Divya Keshri
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