ये नहीं देखा तो क्या देखा, एक ऐसी कहानी, जिसमें एक दादा अपने ही पोते को दफना कर भूल गया

अगर आप इस हफ्तें घर बैठे कोई अच्छी सी थ्रिलर फिल्म देखना चाहते हैं तो ये फिल्म देखकर आपको खूब मजा आएगा. फिल्म में ऐसे ट्विस्ट है जिसे देखकर आपको लगेगा कि आगे कहानी में क्या होगा. इस फिल्म का नाम और किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ये स्ट्रीम हो रही, आपको बताते हैं.
सोचिए एक ऐसी कहानी जिसमें एक दादा अपने ही पोते को दफना कर भूल जाते हैं. वह भूल जाते हैं कि उनके पोते की मौत हो चुकी है और उन्होंने अपने ही हाथों से उसे दफनाया है. ये कहानी किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है, बल्कि इंसानी दर्द, याददाश्त की बीमारी और एक टूटे हुए परिवार की स्टोरी है. एक ऐसा दादा जो अपने भूलने की बीमारी को स्वीकार नहीं कर पाए है और हर दिन अपने मरे हुए पोते की खोज में निकल जाते हैं. आइए आपको बताते हैं इस फिल्म का नाम और पूरी कहानी.
एक रिटायर्ड आर्मी अफसर की कहानी
केरल के जंगलों के पास क रिटायर्ड आर्मी अफसर अप्पू पिल्लै अपने छोटे से परिवार के साथ रहता है. इस परिवार में उसका बेटा अजयचंद्रन और उसकी नई बहू अपर्णा है. अजयचंद्रन की पहली पत्नी प्रवीणा की मौत कैंसर से हो चुकी है. उनका एक बेटा है चाचू दो एक साल पहले गायब हो गया था. उसके गायब होने के बाद से ही अजय अपने अपने रिश्तेदार और साले के साथ मिलकर उसे खोजता है. हर दिन उनकी तलाश जारी रहती है, लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंचते. कहानी का एक ट्विस्ट आपको पता चल गया कि अजय का बेटा एक साल से गायब है. दूसरा ट्विस्ट आता है कि अजय की पत्नी अपर्णा को अपने ससुर का बिहेवियर थोड़ा अलग लगता है. तब अजय उसे एक छुपा हुआ सच बताता है कि उसके पिता को चीजों को भूलने की बीमारी है. इसी बीमारी की वजह से उन्हें आर्मी से निकाला गया था, लेकिन अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्होंने यह बात किसी को नहीं बताई और दुनिया से छिपाकर रखी.
पुलिस को मिला किसका कंकाल ?
कहानी अब आगे और दिलचस्प होती है. अप्पू पिल्लै ने जो जमीन दो साल पहले अपने पड़ोसी को बेची थी, वहां पर खुदाई में एक कंकाल मिलता है. अब आप सोच रहे होंगे कि ये कंकाल अप्पू पिल्लै के पोते चाचू का हो सकता है. लेकिन ये कंकाल एक बंदर का होता है और इसका खुलासा फोरेंसिक जांच में पता चलता है. अब आपके दिमाग में आ रहा होगा कि आखिर चाचू कहां है? क्या वह जिंदा है ? या वह मर गया. अब कहानी आगे बढती है और सस्पेंस भी बढ़ता जाता है. अजय की पत्नी जो उससे चाचू के बारे में बार-बार पूछती रहती है, उसका सब्र खत्म हो जाता है. वह उसे चाचू के साथ क्या हुआ था वह बताता है. हुआ ये था कि तीन साल पहले प्रवीणा ने चाचू को पिस्तौल से खेलते पकड़ा. इसमें छीना-झपटी में गलती से प्रवीणा से गोली चल गई और चाचू मर गया. सदमे में प्रवीणा ने ज्यादा दवाइयां खा लीं. जब अजय आता है तो अपने मरे हुए बेटे और पत्नी को बेहोश देखकर घबरा जाता है. वह अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल ले जाता है. जब वह लौटकर आता है तो चाचू की बॉडी गायब थी. अप्पू पिल्लै अपने पोते को दफना चुका था और सारे सबूत जला चुका है. ये सब करने के बाद वह सब कुछ भूल जाता है. ऐसे में वह अपने पोते को हर दिन खोजने में निकल जाता है.
फिल्म का क्या है नाम?
इस फिल्म का नाम ‘किष्किंधा कांडम’ है और आप इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म डिज्नी+ हॉटस्टार पर देख सकते हैं. फिल्म का बजट 7 करोड़ रुपये था और मूवी ने अपने बजट से 10 गुना ज्यादा का कलेक्शन किया था. आईएमडीबी के आंकड़ों के अनुसार मूवी ने अपने खाते में बॉक्स ऑफिस पर 76.52 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. फिल्म ओरिजिनली मलयालम भाषा में रिलीज हुई थी और हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषा के दर्शक भी इसे देख पाएंगे.
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By दिव्या केशरी
दिव्या केशरी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम की लीड के रूप में कार्यरत हैं. वह 2020 से प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी हुई हैं और तब से लगातार फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री की खबरों को कवर कर रही हैं. उनके पास लगभग 8 साल का जर्नलिज्म एक्सपीरियंस है. एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में उनकी मजबूत पकड़ फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बीटीएस अपडेट्स, थ्रोबैक स्टोरी, गॉसिप और ट्रेंडिंग एंटरटेनमेंट न्यूज पर है. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को आसान, भरोसेमंद और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि पाठक सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि खबर से जुड़ाव भी महसूस करें.
शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.
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