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फिल्‍म रिव्‍यू: एक पुरानी रोमांटिक स्‍टोरी है ”सनम तेरी कसम”

II अनुप्रिया अनंत II फिल्म : सनम तेरी कसम कलाकार : हर्षवर्धन राणे, मानवा होकेन, मुरली शर्मा, विजय राद निर्देशक : राधिका राव और विनय सप्रू रेटिंग : 2 स्टार राधिका राव और विनय सप्रू ने इससे पहले सलमान खान की फिल्म ‘लकी’ और ‘आइ लव न्यूयॉर्क’ भी निर्देशित की थी. हालांकि दोनों फिल्में कामयाब […]

II अनुप्रिया अनंत II

फिल्म : सनम तेरी कसम

कलाकार : हर्षवर्धन राणे, मानवा होकेन, मुरली शर्मा, विजय राद

निर्देशक : राधिका राव और विनय सप्रू

रेटिंग : 2 स्टार

राधिका राव और विनय सप्रू ने इससे पहले सलमान खान की फिल्म ‘लकी’ और ‘आइ लव न्यूयॉर्क’ भी निर्देशित की थी. हालांकि दोनों फिल्में कामयाब नहीं रही. लेकिन फिल्म की कहानी लोगों ने पसंद की थी. इस बार वे ‘सनम तेरी कसम’ लेकर आये हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की की इर्द-गिर्द घूमती है, जो हर तरह से फिट है. पढ़ी लिखी है. अच्छी नौकरी करती है. लेकिन उसे अपने लिये सुयोग्य वर नहीं मिल रहा.

उसके पिता को आइआइटी आइआइएम ही चाहिए. लेकिन आइआइएम, आआइटी वालों को वह पसंद नहीं आती. फिल्म इंदर और सरस्वती के इर्द-गिर्द घूमती. इंदर सरस्वती के ही अपार्टमेंट में रहता और अपने तरीके से जिंदगी जीता है. उसके क्रिमनल रिकॉर्ड भी हैं और यही वजह है कि वह सोसाइटी वालों की आंखों की किरकिरी है. एक गलतफहमी के कारण सरस्वती को उसके पिता घर से निकाल देते हैं और सरस्वती इंदर के साथ अपनी नयी दुनिया की शुरुआत करती है.

लेकिन दोनों एक दूसरे से प्यार का इजहार नहीं करते. इंदर का एकतरफा प्यार है और कहानी दोनों की प्रेम कहानी दर्शाती है. दरअसल, यह फिल्म कई म्यूजिक एलबम और पुरानी दिखाई गयी कई फिल्मों का मिश्रण है. ऐसी प्रेम कहानियां पहले भी दिखाई जाती रही है. फिल्म के गाने बेहतरीन हैं और उनकी वजह से फिल्म में थोड़ी दिलचस्पी बनी रहती है. शेष फिल्म में कहानी में कुछ भी नयापन नहीं हैं. लेकिन यह दोनों कलाकारों की खासियत है कि दोनों कलाकारों ने इस फिल्म में बेहतरीन परफॉरमेंस दिया है. चूंकि फिल्म में इमोशनल दृश्य अधिक हैं.

ऐसे में कलाकार का लगातार परफॉर्म करना कठिन होता है. लेकिन दोनों ने बेहतरीन काम किया है. मावरा काफी मासूम सी नजर आयी हैं और उनमें काफी संभावनाएं दिखती हैं. उम्मीदन आगे भी वह बेहतरीन किरदारों में नजर आयें तो उन्हें और बेहतरीन मौके मिलेंगे. राधिका और विनय प्रेम कहानी को लेकर और भी कई नये प्रयोग कर सकते थे. उन्हें अच्छे परफॉरमर मिले थे. चूंकि वक्त भी वैलेंटाइन महीने का है तो इससे बड़ा फायदा हो सकता था. लेकिन फिल्म की कहानी निराश करती है.

खासतौर से शुरुआत से लेकर अंत तक फिल्म का मूड ट्रेजिक ही रखा गया है. अभिनेत्री या अभिनेता के बिछुड़ने का कारण कोई बीमारी हो. ऐसा अक्सर हम फिल्मों में देखते आये हैं. सो इस दौर में भी यही कहानी दिखाना प्रासंगिक नहीं लगता. खासतौर से सरस्वती के पिता का उसका क्रिया क्रम किया जाना व उनके कई दृश्य. ओवर मेलोड्रामेटिक हैं और वे बोर करते हैं. फिल्म अंतराल के बाद अत्यधिक खींच दी गयी है.

अगर उसे दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत किया जाता तो शायद फिल्म अधिक रोचक बन सकती थी. मुरली शर्मा के किरदार को भी पूरी तरह फिल्मी दर्शाया गया है. फिल्म के ट्रेलर और गानों के आधार पर उम्मीद अधिक थी. लेकिन फिल्म उस स्तर पर खरी नहीं उतरी है.

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