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Bhoot Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कितना डरावना है ये ''भूत''

Updated at : 21 Feb 2020 1:51 PM (IST)
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Bhoot Film Review : फिल्‍म देखने से पहले जानें कितना डरावना है ये ''भूत''

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म – ‘भूत : पार्ट वन द हॉन्टेड शिप’ निर्माता – धर्मा प्रोडक्शन निर्देशक – भानू प्रताप सिंह कलाकार- विक्की कौशल, आकाश धर, आशुतोष राणा, मेहर विज और अन्य रेटिंग – ढाई रुपहले परदे पर लार्जर देन लाइफ रोमांटिक फिल्में बनाने के लिए प्रसिद्ध धर्मा प्रोडक्शन ‘भूत’ के साथ अपनी पहली […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म – ‘भूत : पार्ट वन द हॉन्टेड शिप’

निर्माता – धर्मा प्रोडक्शन

निर्देशक – भानू प्रताप सिंह

कलाकार- विक्की कौशल, आकाश धर, आशुतोष राणा, मेहर विज और अन्य

रेटिंग – ढाई

रुपहले परदे पर लार्जर देन लाइफ रोमांटिक फिल्में बनाने के लिए प्रसिद्ध धर्मा प्रोडक्शन ‘भूत’ के साथ अपनी पहली हॉरर फिल्म लेकर आए हैं. बॉलीवुड में हॉरर फिल्में बनती रही हैं लेकिन यह पहला मौका होगा जब बॉलीवुड के किसी बड़े बैनर ने इस जॉनर पर हाथ आजमाया है.
उम्मीद थी कि इस जॉनर में कुछ अलग देखने को मिलेगा लेकिन यहां भी मामला ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे पर ही आकर अटक गया है जो रामसे ब्रदर्स से लेकर भट्ट कैम्प वाली हॉरर फिल्मों में हम सालों से देखते आए हैं.

फ़िल्म की कहानी पृथ्वी (विक्की कौशल) की है और वह एक शिपयार्ड कंपनी में अधिकारी है. वह अपनी पत्नी और बेटी को एक हादसे में खो चुका है. वह अभी भी उस हादसे से उबरा नहीं है. इसी बीच मुम्बई के जुहू बीच पर सी बर्ड नाम का एक हॉंटेड शिप आ कर अटक जाता है. शिप की वजह से जुहू बीच पर अजीबो-गरीब हादसे होने लगते हैं.

पृथ्वी और उसकी टीम को शिप को वहां से हटाने की जिम्मेदारी मिलती है. पृथ्वी शिप पर जाता है तो वह एक अलग ही सच से रूबरू होता है. उस शिप पर 13 साल की एक लड़की सालों से फंसी है क्योंकि एक बुरी आत्मा ने उसे कैद करके रखा है. वो आत्मा ऐसा क्यों कर रही है ? क्या उसके पीछे का अतीत है ? क्या पृथ्वी उस बुरी आत्मा से उस लड़की को बचा पाएगा ? यही आगे की कहानी है.

फ़िल्म की पटकथा कमज़ोर है. फ़िल्म का फर्स्ट हाफ फिर भी उम्मीद जगाता है लगता है कि फ़िल्म कुछ अलग दिखाएगी जो अब तक की हिंदी भूतिया फिल्मों में नज़र नहीं आया है लेकिन सेकंड हाफ में वही घिसा पिटा भूत को भगाने का तरीका सामने आ जाता है. राज़ की तरह यहां भी लाश को जलाना हैए आत्मा के मुक्ति के फार्मूले के तहत. यहां भी आशुतोष राणा प्रोफेसर हैं.

मंत्रों और पेट्रोल के ज़रिए लाश को ढूंढने और जलाने में हमारे नए फिल्मकार भी इसी फॉर्मूले को ही क्यों भुनाने में जुटे रहते हैं. फ़िल्म का क्लाइमेक्स सपाट हो गया है. फ़िल्म हॉरर है लेकिन शुरुआत के कुछ दृश्यों को छोड़ दे तो फ़िल्म डराने में चूक जाती है. सफेदी की चमकार वाला भूत का मेकअप डराता कम हंसाता ज़्यादा है. वीएफएक्स भी औसत रह गया है. दीवारों पर भूत का रेंगना नया नहीं है. फ़िल्म के कई दृश्यों में दोहराव भी है.

अभिनय की बात करें तो विक्की ने अच्छा काम किया है. पूरी फिल्म में उनका किरदार एक ही जोन में है हालांकि यह किरदार की ज़रूरत था लेकिन वह अखरता है. आशुतोष राणा का किरदार भी चंद दृश्यों वाला ही है.उनके किरदार को जल्दी जल्दी से निपटाने वाला मामला बन गया है. दोस्त की भूमिका में आकाश धर जमे हैं. मेहर का काम ठीक ठाक है. चंद दृश्यों में नज़र आयी भूमि ने भी अच्छा काम किया है.

फ़िल्म के गीत संगीत की बात करें तो फ़िल्म में एक ही गाना है. बैकग्राउंड स्कोर अच्छा बन पड़ा है जो कई दृश्यों को प्रभावी बना जाता है. फ़िल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है. फ़िल्म शिप पर ही फिल्मायी गयी है जो फ़िल्म की कहानी के साथ बखूबी न्याय करता है. कुलमिलाकर अगर आप हॉरर जॉनर के फिल्मों के शौकीन हैं और कुछ अलग या ज़्यादा की उम्मीद नहीं है तो यह फ़िल्म एक बार देख सकते हैं.

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