कवि से गीतकार ऐसे बने अनजान
Updated at : 21 Jul 2019 2:02 PM (IST)
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बॉलीवुड में 300 से अधिक फिल्मों के लिए गाने लिखने वाले लालजी पांडे यानी अनजान को बचपन से ही शेरो-शायरी से गहरा लगाव था. वह बनारस में आयोजित कवि सम्मेलन-मुशायरे में हिस्सा लेते थे. तब गायक मुकेश बनारस आये थे. वहां के मशहूर क्लार्क होटल के मालिक ने गुजारिश की कि एक दफा वे अनजान […]
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बॉलीवुड में 300 से अधिक फिल्मों के लिए गाने लिखने वाले लालजी पांडे यानी अनजान को बचपन से ही शेरो-शायरी से गहरा लगाव था. वह बनारस में आयोजित कवि सम्मेलन-मुशायरे में हिस्सा लेते थे. तब गायक मुकेश बनारस आये थे. वहां के मशहूर क्लार्क होटल के मालिक ने गुजारिश की कि एक दफा वे अनजान की कविता सुन लें. मुकेश ने कविता सुनी, तो काफी प्रभावित हुए. अनजान को फिल्मों के लिए गीत लिखने की सलाह दी.
अनजान बंबई तो पहुंच गये. लेकिन यहां कई संगीतकारों से मिलने के बाद भी काम नहीं मिल रहा था. संघर्ष के इस दौर में कभी यार्ड में पड़ी लोकल ट्रेनों में, तो कभी किसी बिल्डिंग की सीढ़ी पर रात गुजारी. यहां तक कि दो जोड़ी कपड़ों को बारी-बारी से धोकर पहना करते. बच्चों को ट्यूशन भी देते. आखिरकार हुनर को मौका मिला. 1969 में ‘बंधन’ के लिए लिखा गाना- ‘बिना बदरा के बिजुरिया कैसे चमके…’ लोकप्रिय हुआ.
70 के दशक में अमिताभ बच्चन की फिल्मों के लिए लिखे कई गाने- ‘खइके पान बनारस वाला (डॉन)…’, ‘खून पसीने की मिलेगी तो खायेंगे…(खून पसीना)’ आदि ने उन्हें स्थापित कर दिया. 90 के दशक में उनके बेटे समीर ने विरासत को आगे बढ़ाया. अलका याग्निक, उदित नारायण, कुमार शानू, सोनू निगम को समीर के गीतों ने ही बनाया.
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