Film Review: जानें कैसी है सनी देओल की फिल्‍म ''ब्‍लैंक''

Updated at : 02 May 2019 12:34 PM (IST)
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Film Review: जानें कैसी है सनी देओल की फिल्‍म ''ब्‍लैंक''

उर्मिला कोरी फिल्म : ब्लैंक निर्देशक: बहजाद खम्बाटा कलाकार: करण कपाड़िया, सनी देओल, ईशिता दत्त, जमील खान, करणवीर और अन्य रेटिंग : ढाई स्टार किड की भीड़ में फिल्म ‘ब्लैंक’ से डिंपल कपाडिया के भतीजे और दिवंगत अभिनेत्री सिंपल कपाडिया के बेटे करण कपाडिया ने फिल्म ‘ब्लैंक’ से अपनी शुरुआत की है. कहानी एक्शन और […]

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उर्मिला कोरी

फिल्म : ब्लैंक

निर्देशक: बहजाद खम्बाटा

कलाकार: करण कपाड़िया, सनी देओल, ईशिता दत्त, जमील खान, करणवीर और अन्य

रेटिंग : ढाई

स्टार किड की भीड़ में फिल्म ‘ब्लैंक’ से डिंपल कपाडिया के भतीजे और दिवंगत अभिनेत्री सिंपल कपाडिया के बेटे करण कपाडिया ने फिल्म ‘ब्लैंक’ से अपनी शुरुआत की है. कहानी एक्शन और थ्रिलर जॉनर की है. फिल्म की शुरुआत दिलचस्प तरीके से होती है करण कपाडिया( हनीफ) हथकड़ी पहने हुए एक सुनसान जगह पर जद्दोजहद कर रहा है. दूरी पर दीवान (सनी देओल) के हुकुम से उस पर बंदूक का निशाना लगाया है. इसी बीच सनी को फोन आता है और कहानी कुछ घंटों पहले चली जाती है.

हनीफ मुम्बई के अलग अलग जगह पर रह रहे लोगों को कुछ निर्देश दे रहा है. इसी बीच अचानक उसका एक्सीडेंट हो जाता है. अस्पताल में मालूम होता है कि वो सुसाइड बॉम्बर है. जिसके बाद आतंक विरोधी जत्था इस केस से जुड़ता है जिसकी अगुवाई दीवान करता है.

यह बात भी सामने आती है कि हनीफ के शरीर से लगे बम के तार 25 और बम से जुड़े हैं. हनीफ की मौत होगी तो सभी बम धमाके एक साथ हो जाएंगे. क्या दीवान इस आतंकी घटना को रोक पाएंगे. फ़िल्म में एक फ्लैशबैक भी है और एक आतंकी सरगना बच्चों को तालीम दे रहा है कि आंतकी घटनाओं को अंजाम देने से कैसे उन्हें जन्नत मिलेगी।ये सब क्या है इसी ट्विस्ट और टर्न पर फ़िल्म की कहानी को बुना गया है.

फिल्म की कहानी पेज पर जैसे लगती है रुपहले परदे पर उस तरह से उतर नहीं पायी है. कमजोर स्क्रीनप्ले और पूर्वअनुमानित कहानी के टिवस्ट् फिल्म को कमजोर बनाते हैं. फ़िल्म में लॉजिक की कमी भी लगती है. जब हनीफ की मौत से 25 धमाके हो सकते थे तो आतंकवादी उसे क्यों ज़िंदा पकड़ना चाहते हैं. फ़िल्म की कहानी में ऐसी और भी खामियां हैं.

अभिनय की बात करें तो नवोदित करण कपाड़िया एक्शन के मामले में जमे हैं लेकिन एक्सप्रेशन के मामले में पूरी तरह से चूक गए हैं. पूरी फिल्म में उनके चेहरे पर एक ही भाव है. सनी देओल अपने चिर परिचत अंदाज में नजर आएं हैं. जमील खान, करणवीर शर्मा और ईशिता दत्ता ने अपने किरदार के अनुरुप काम किया है.

फिल्म के गीत संगीत की बात करें तो गाने हो या फिल्म का बैकग्राऊंड म्यूजिक बहुत ही लाउड है. थोड़े वक्त के बाद वो कानों को चुभता महसूस होता है. अक्षय कुमार वाला गीत भी बेहद औसत है. दूसरे पहलूओं की बात करें तो फिल्म की एडिटिंग पर थोड़ा और काम किया जाना चाहिए. कुलमिलाकर ब्लेंक एक औसत फ़िल्म है.

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