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EXCLUSIVE: इस वजह से जूही चावला ने ठुकराई थी माधुरी दीक्षित की ये फिल्‍म

Updated at : 28 Jan 2019 3:00 PM (IST)
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EXCLUSIVE: इस वजह से जूही चावला ने ठुकराई थी माधुरी दीक्षित की ये फिल्‍म

90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री जूही चावला अपनी आगामी फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं. समलैंगिकता के मुद्दे पर बनी इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट को वो बेहद खास करार देती हैं. इसके साथ एक अरसे बाद अनिल कपूर के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. फिल्‍म में […]

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90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री जूही चावला अपनी आगामी फिल्म ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ को लेकर बेहद उत्साहित हैं. समलैंगिकता के मुद्दे पर बनी इस फ़िल्म की स्क्रिप्ट को वो बेहद खास करार देती हैं. इसके साथ एक अरसे बाद अनिल कपूर के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. फिल्‍म में सोनम कपूर और राजकुमार राव भी मुख्‍य भूमिका में हैं. जूही चावला ने अपने करियर और इस फिल्‍म के बारे में हमारी संवाददाता उर्मिला कोरी खास बातचीत की. पढ़ें…

‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ में एक बार फिर अनिल कपूर के साथ हैं. क्या चीज़ें हैं जो उनमें अब तक नहीं बदली ?

वह बूढे नहीं हो रहे हैं. वह जैसे सालों पहले थे वैसे ही आज भी हैं. वह बहुत मेहनती हैं. वक्त के पाबंद. हमेशा सेट पर समय पर पहुंच जाते हैं. फिटनेस को लेकर वह हमेशा से जागरुक रहे हैं. काम करो रिर्हसल करो यह सब उनका चलता रहता था . यह सब आज भी कायम है. जहां तक बदलाव की बात है ( हंसते हुए) मुझे पता है ये पढ़कर अनिल जी मुझे मार डालेंगे लेकिन जब पहले हम काम करते थे जब शॉट नहीं होता था तो अनिलजी आइने पर खुद को निहारा करते थे. वह खुद को देखते थे और अपनी गालों को अंदर लेते. मैं कहती थी कि आप ऐसा क्यों करते हैं तो वो कहते कि मैं चाहता हूं कि मेरे गाल थोड़े अंदर चले जाएं. निर्देशक इंद्र कुमार के साथ अनिल और मैंने हमदोनों ने ही फिल्में की हैं. इंद्र कुमार ने कहा कि आप अनिल को जाकर आज बोल दो कि आपका चेहरा थोड़ा सा सूजा हुआ लग रहा है फिर देखो उसका पूरे दिन सेट पर रिएक्शन .आमिर होता था तो मैं ये प्रैंक कर देती थी लेकिन अनिल मेरे सीनियर रहे हैं तो किसी और ने ये प्रैंक किया. अनिल जी को बस ये बोलने की देर थी और पूरा दिन अपना चेहरा आइने में देखते रहे और सबसे पूछते कि सच्ची आज चेहरा सूजा हुआ है क्या. थैंक गॉड अब ये उनकी आदत नहीं रही .

अनिल कपूर की बेटी सोनम भी इस फ़िल्म में आपके साथ है ?

सोनम के साथ काम करने के अनुभव की बात करुं तो मैंने सोनम को बचपन से देखा है. ‘दीवाना मस्ताना’ में मैंने और अनिल जी ने साथ में काम किया था. फिल्म का एक शेड्यूल स्विटजरलैंड में हुआ था. बीस दिन का शेड्यूल था अनिल जी की पूरी फैमिली, डेविड धवन जी की फैमिली और केतन देसाई के फैमिली साथ थी. मैं अपनी मां के साथ थी. उस दौरान मैंने सोनम को देखा था 12 -13 साल की उम्र रही होगी. अब उसके साथ काम कर रही हूं और इस फिल्म में भी दोनों बाप और बेटी की ही भूमिका में हैं. अच्छा लगा. ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ कि शूटिंग के दौरान वो अक्सर मुझसे पूछती रहती थी कि मेरे पिता कैसे थे सेट पर अपनी पुरानी फिल्मों के बारे में. सोनम से कहा कि मैंने उससे बहुत कुछ सीखा. उसने संजय लीला भंसाली को असिस्ट किया है इसलिए उसे कैमरे के पीछे की भी समझ है. सोनम ने एक बात और कही कि जब मैं अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ती हूं तो मेरे दिमाग में दो हजार सवाल होते हैं. वो सारे सवाल मैं अपने निर्देशक से पूछती हूं. उनका दिमाग खा जाती हूं लेकिन जब मैं सेट पर आ जाती हूं तो फिर कोई सवाल नहीं होता है. मुझे अच्छा लगा उसकी बात सुनकर लगा कि मुझे भी ऐसे काम करना चाहिए.

अक्सर ये बात सामने आती रहती है कि 90 के दशक में फिल्मों की स्क्रिप्ट और डायलॉग सेट पर ही लिखे जाते थे ?

उस वक्त मैं भी नयी थी. मुझे पता नहीं था. वो लोग रात भर सीन बैठकर बनाते थे फिर सुबह सीन आते थे. डायलॉग वहीं सेट पर राइटर आते थे और डायरेक्टर के साथ बैठकर लिख देते थे. हम बैठकर तैयार होते रहते थे फिर सीन आता था और डायलॉग हाथ से लिखा हुआ. हमें स्क्रिप्ट मिलती ही नहीं थी. जब हमें फिल्म ऑफर होती थी तो पांच छह लाइन की कहानी निर्देशक हमें बता देता था कि लडका यहां मिलेगा लड़की यहां मिलेगी फिर ये ये होगा और फिल्म खत्म. ये एक्टर हैं ये प्रोडयूसर हैं. बस उसी पर अपनी गट् फीलिंग पर फ़िल्म को हां बोल देते थे. मैं इस बात को कहने के साथ साथ ये भी कहना चाहूंगी कि आइना फिल्म की पूरी स्क्रिप्ट लिखी हुई थी. डर की भी बाऊंड स्क्रिप्ट थी. यशजी ने बैठकर मुझे पूरी फिल्म सुनायी थी. कुछ मेकर्स थे जो ऐसे काम करते थे. वैसे मेरे कैरियर की बेस्ट फिल्मों में से एक हम है राही प्यार के बनते बनते ऐसे ही बनी थी. सबकुछ सेट पर ही लिखा जाता था.

आपके कैरियर में आपने आमिर और शाहरुख के साथ बहुत सारी फिल्में की लेकिन सलमान के साथ नहीं. सलमान का कहना है कि आपने बीवी हो तो ऐसी में उनके साथ काम करने से इनकार कर दिया था ?

मुझे पता है ऐसा सलमान ने बोला है. वो शुरुआत के दिन थे. किसको हां बोला किसको ना बोला था. इतना तो मुझे याद ही नहीं. हां या ना हुई होगी. उनको याद रह गया . मैं तो भूल गया. फिल्में भले ही न की हो लेकिन हमने साथ में शोज किए हैं.उस वक्त वर्ल्ड टूर पर बहुत जाते थे. आमिर सलमान रवीना के साथ मैं. उसका एक्सपीरियंस है.

अक्सर लोग मिड लाइफ क्राइसिस की बात करते हैं आप खुद को खुश रखने के लिए क्या करती हैं ?

मुझे लगता है कि लाइफ बहुत ही सिंपल है. हम उसी कॉम्पिलिकेटेड बना देते हैं. खुश रहने के लिए वो करना पड़ता है. जो हमें खुशी देता है. मैंने खुद ने धीरे धीरे उन चीजों को करना बंद कर दिया जो मुझे खुशी नहीं देते थे. जैसे पार्टी में जाना. हां दोस्त की पार्टी हो तो अच्छा है क्योंकि मजा आता है. बस अपीयरेंस के लिए जाओ तो वो गलत है. हर चीज में मुझे अपने आप को ढालना है. जो मुझे पसंद नहीं है तो क्यों करना है. बस आपको इतना समझना है. आप खुद को किस प्रेशर में डाल रहे हो. लोग क्या कहेंगे ..फीयर ऑफ मिसिंग आउट ये आजकल बहुत सुनती हूं. यही बातें आपको ज्यादा परेशान कर जाती हैं. मैं कुछ भी अब प्लान नहीं करती हूं. मुझे लगता है कि भगवान सबसे बड़ा प्लानर है. उस पर छोड दो. दो तीन का बस प्लान कर लिया. वो बहुत है.

90 के दौर में आपकी और माधुरी दीक्षित की प्रतिस्पर्धा के बारे में बहुत चर्चा होती थी ?

हां थी, उस वक़्त भले ही मैं बोलती थी कि ऐसा नहीं था लेकिन था. माधुरी के अपोजिट मैं खुद को सेकंड लीड में नहीं देख सकती थी इसलिए ‘दिल तो पागल है’ नहीं की थी. मीडिया ही थी जिम्मेदार. तुलना होती थी तो करना ही पड़ती थी. माधुरी क्यों रवीना,करिश्मा सभी से प्रतिस्पर्धा रहती थी. (हंसते हुए) 1942 ए लव स्टोरी में मनीषा कोइराला को देखकर अपना कैरियर तो खत्म हो जाएगा. नई लड़की आ गई है. मुझे कौन काम देगा.

ऑटोबायोग्राफी इनदिनों आम है आपकी कोई ऐसी प्लानिंग है ?

ऑटोबायोग्राफी तो संभव नहीं है क्योंकि ज़िन्दगी के कुछ ऐसे पन्ने हैं जिन्हें मैं फिर से याद नहीं करना चाहूंगी. हां अपनी फिल्म से जुड़े सेट्स के कुछ किस्सों कहानियों को मैं ज़रूर किताब की शक्ल में सामने लाना चाहूंगी.

आपके बच्चे क्या कर रहे हैं ?

वे दोनों ही बोडिंग स्कूल में हैं. मेरी मां जब बचपन में मुझे कहती थी कि तुम्हें बॉडिंग स्कूल डालेंगे तो मैं रोने लगती थी कि मैं नहीं जाऊंगी तो मेरी मां ने नहीं भेजा. आज मेरे बच्चे बोडिंग स्कूल में हैं लेकिन उन्होंने खुद इस बात को चुना कि वे बोडिंग स्कूल जाएंगे. मेरी बेटी 12वीं में हैं बेटा 9वीं में है. मेरे बच्चे बहुत पढ़ाकू हैं खासकर मेरी बेटी उसे तो बचपन से ही हर विषय में ए स्टार ही मिला है. वो स्पोर्टस में भी अच्छी है. वो स्कूबा ड्राइव करती है. वो फुटबाल में भी बहुत अच्छा करती है. उसने अभी तक तय नहीं किया उसे क्या करना है। कभी मॉडल बनना चाहती है. कभी सर्जन. एक दिन वो मेरे एक हार्ट सर्जन दोस्त के साथ कुछ घंटों के लिए थी जिसके बाद. वो बोली मुझे नहीं करना है.

प्लास्टिक, रेडिएशन सहित आप कई सोशल मुद्दों से जुड़ी हैं क्या आप हमेशा से ऐसी थी ?

जो आज मैं हूं वो कल नहीं थी. उस वक्त लोग मुझे समाजिक कार्यों के बारे में बोलते थे तो मैं भाग जाती थी. क्या है ये क्यो करते हैं. लोग क्यों कहते हैं कि सोसाइटी को वापस कुछ देना चाहिए. मुझे लगता था बस काम करो. मैं सिर्फ अपने कैरियर पर फोकस करती थी. मुझे लगता है कि टर्निंग प्वाइंट जिंदगी का उस वक्त आया जब मेरे बच्चे हुए. आप अपने बच्चों के लेकर प्रोटेक्टिव तो होते ही हैं लेकिन आप दूसरे बच्चों के बारे में भी सोचते हैं कि ये कैसे पल जाते हैं. रास्ते के बच्चों के देखकर लगता है कि ये दुनिया कैसे चल रही है. फिर पिछले कुछ सालों में जो मेरी जिंदगी में हुआ. उस सबने मुझे बदल दिया.

90 के दौर में आप चर्चित अभिनेत्री थी उस वक़्त किस तरह फैंस अपना प्यार ज़ाहिर करते थे ?

घर पर चिठ्यिां आती थी. खासकर कयामत से कयामत तक की रिलीज के बाद।हर रोज कम से कम सौ खत आते थे. ब्लू, फोल्ड वाले. पापा बहुत ही उत्साहित रहते थे. वो सभी को खुद से रिप्लाय करते थे. मुझे वो लिखकर सुनाते भी थे.वो चाहते थे कि हर फैंस तक मेरा जवाब पहुंचे. लोगों इतने प्यार से भेजा हैं. इस बात को भी कहना चाहूंगी कि जैसे जैसे काम बढ़ता गया. ये सब भी छूट गया. चिट्ठियों के अलावा मेरे वक्त मे फैंस एलबम लेकर आते थे. मैगजीन, न्यूजपेपर, पोस्टकार्ड वाली फोटोज के एलबम निकाल निकाल कर पूरी एलबम मेरी फोटोज की बनाकर ले आते थे. उसको बहुत अच्छे से डेकोरेट भी करते थे. कई बार तो ऐसा होता था कि मेरे पास भी कई तस्वीरें नहीं होती थी. मैं कहती थी कि आप मुझे ही ये एलबम दे दीजिए. अभी भी वैसे कई एलबम मेरे पास होंगे.

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