Film Review: जानें कैसी है ''पटाखा''

By Prabhat Khabar Digital Desk
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फ़िल्म: पटाखा

निर्माता: इरोज और विशाल भारद्वाज

निर्देशक: विशाल भारद्वाज

कलाकार: राधिका मदान, सान्या मल्होत्रा, विजय राज, सुनील ग्रोवर और अन्य

रेटिंग: तीन

अब तक कई साहित्यिक कृतियों पर फिल्में बना चुके निर्माता निर्देशक विशाल भारद्वाज इस बार चरण सिंह पथिक की लघु कहानी दो बहनें को अपने सिनेमा के लिए चुना है. फ़िल्म की कहानी का बैकड्रॉप राजस्थान का एक गाँव है जहां दो बहनें चंपा कुमारी (राधिका मदान) औऱ गेंदा कुमारी (सान्या) की है.दोनों बहनें एक दूसरे की खून की प्यासी हैं. बस बेवजह लड़े जा रहे हैं. दोनों बहनें एक दूसरे से बस छुटकारा पाना चाहती हैं.

दोनों को प्यार को जाता है बड़की को जगन से छोटकी को विष्णु से. दोनों घर से भागकर उनसे शादी कर लेती हैं. दोनों को लगता है कि अब दोनों को एक दूसरे की शक्ल नहीं देखनी पड़ेगी.

लेकिन मालूम पड़ता है कि जगन और विष्णु दोनों सगे भाई हैं फिर दोनों बहनें एक ही छत के नीचे. फिर क्या होता है इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी. कहानी में बापू, ठरकी पटेल और डिपर की भी अहमियत है. यह फ़िल्म देखने के बाद मालूम होगी. फ़िल्म की कहानी को काफी मनोरंजक तरीके से कही गयी है रियलिस्टिक रखते हुए जो फ़िल्म की एक बड़ी खासियत है.

फ़िल्म में भारत पाकिस्तान के युद्ध को कहानीऔर संवाद के साथ बहुत अच्छे से जोड़ा गया है. फ़िल्म की खामियों की बात करें तो फ़िल्म सेकंड हाफ में लंबी जान पड़ती है. कहानी में आखिर में जो ट्विस्ट जोड़ा गया है. वह फ़िल्म देखते हुए पहले ही समझ आ जाता है.

अभिनय की बात करें तो राधिका मदान और सान्या ने बेहतरीन काम किया है. फ़िल्म के पहले फ्रेम से आखिरी फ्रेम तक वह पूरी तरह से अपने किरदार में रची बसी हैं फिर चाहे लुक हो ,भाषा हो या फिर बॉडी लैंग्वेज. सुनील ग्रोवर ने नारदमुनि यानी डिपर के किरदार में खूब मनोरंजन किया है. विजय राज और सानंद वर्मा ने भी कमाल का काम किया है बाकी के किरदार अपनी अपनी भूमिकाओं में जमे हैं.

फ़िल्म का लुक, संगीत और भाषा तीनों पूरी तरह से राजस्थानी रंग में रंगे हुए थे. हां भाषा में ज़रूरत से ज़्यादा राजस्थानी शब्द आम दर्शकों को थोड़ा अजीब सा लग सकता है. कुलमिलाकर विशाल भारद्वाज की देशी अंदाज़ वाली यह पटाखा मनोरंजन का धमाका है.

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