बॉलीवुड की फिल्मों में इतिहास की दस्तक, दमदार कहानी ने बदली सोच, कई ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया गदर

Edited by Ashish Lata
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Historical films in Bollywood

बॉलीवुड लंबे समय से कहानी कहने का एक सशक्त माध्यम रहा है. बीते कुछ समय से इस इंडस्ट्री ने ऐतिहासिक आख्यानों को नया आकार देने और गुमनाम नायकों को प्रकाश में लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. जिससे दर्शकों को एंटरटेनमेंट के साथ-साथ ज्ञान भी मिला है.

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भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से बॉलीवुड, हमेशा से समाज और इतिहास का आईना रहा है. जहां पहले फिल्मों का फोकस काल्पनिक कहानियों, रोमांस और मसाला एंटरटेनमेंट पर अधिक था, वहीं हाल के वर्षों में ऐतिहासिक और वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्मों का चलन तेजी से बढ़ा है. इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बॉलीवुड उन कहानियों को बड़े पर्दे पर ला रहा है, जो कभी किताबों में पढ़ने पर आपको झकझोर कर रख देती थी. यह नया सिनेमा न केवल दर्शकों को अतीत से रूबरू करवा रहा है, बल्कि उन्हें एक नया नजरिया भी दे रहा है. हाल ही में रिलीज हुई छावा इसका सटीक उदाहरण है. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तो शानदार कमाई की ही, लेकिन छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान को भी दिखाया.

सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि ज्ञान, प्रेरणा और जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम

आज के दौर में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रेरणा और जागरूकता फैलाने का भी एक प्रभावी माध्यम बन चुका है. बीते वर्षों में कई ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्में बनी हैं, जिन्होंने इतिहास को पुनः जीवंत कर दिया. उदाहरण के लिए, “तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर” ने मराठा योद्धा तान्हाजी मालुसरे की वीरता को दिखाया, जबकि “केसरी” ने सारागढ़ी की लड़ाई में सिख सैनिकों के बलिदान को बड़े पर्दे पर उतारा. इसी तरह “पद्मावत”, “मणिकर्णिका”, और “सम्राट पृथ्वीराज” जैसी फिल्मों ने ऐतिहासिक चरित्रों को नई पहचान दी.

ऐतिहासिक फिल्मों का कलेक्शन

किताबों में दर्ज घटनाओं को मिला नया नजरिया

इतिहास को लेकर हर किसी का अपना दृष्टिकोण होता है और बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्में दर्शकों को एक नया नजरिया देने का काम कर रही हैं. जब हम इतिहास की किताबों में किसी घटना के बारे में पढ़ते हैं, तो उससे सिर्फ तथ्य लेते थे, लेकिन जब फिल्म देखते हैं, तो उसके भावनात्मक गहराई से जुड़ जाते हैं. उदाहरण के लिए, “शेरशाह” फिल्म ने कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी को जिस तरीके से दिखाया, वह केवल किताबों से महसूस करना संभव नहीं था. दर्शक डिंपल चीमा की अधूरी लवस्टोरी देखकर रो पड़े थे. इसी तरह, “गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल” ने कारगिल युद्ध में पहली महिला पायलट की भूमिका को दिखाया, जो किताबों में केवल कुछ लाइनों तक सीमित थी.

ऐतिहासिक फिल्में फिर से की गई गलतियों को सुधारने का देती है मौका

ऐतिहासिक फिल्मों का एक और बड़ा योगदान यह है कि वे हमें अतीत की गलतियों से सीखने का अवसर देती हैं. उदाहरण के लिए, “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम” पर आधारित फिल्में हमें यह सिखाती हैं कि किस प्रकार विदेशी ताकतों ने हमारी कमजोरियों का फायदा उठाया और हमें गुलाम बनाया. वहीं, “पानीपत” जैसी फिल्में हमें यह सिखाती हैं कि कैसे रणनीतिक भूलों के कारण बड़ी सेनाओं को हार का सामना करना पड़ा.

ऐतिहासिक फिल्मों को बनाने में इन चुनौतियों का करना पड़ता है सामना

  • ऐतिहासिक घटनाओं पर फिल्में बनाना आसान नहीं होता. इसके पीछे कई चुनौतियां होती हैं. जिसमें सबसे पहले तो तथ्यों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लग सकता है. उदाहरण के लिए, “पद्मावत” और “पानीपत” जैसी फिल्मों को लेकर विवाद हुए थे.
  • कई बार फिल्में राजनीतिक और सामाजिक समूहों की भावनाओं को ठेस पहुंचा देती हैं, जिससे विवाद और प्रदर्शन होने लगते हैं. वहीं सेंसर बोर्ड भी सीन्स को काटने के लिए कहते हैं.
  • फिल्ममेकर्स को यह संतुलन बनाना पड़ता है कि वे दर्शकों को बांधकर भी रखें और तथ्यों के साथ भी न्याय करें.

टेक्नोलॉजी और वीएफएक्स से ऐतिहासिक फिल्मों का मिला नया लुक

आज के डिजिटल युग में वीएफएक्स और नई टेक्नोलॉजी ने ऐतिहासिक फिल्मों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया है. जिसमें वॉर एरिया से लेकर खूंखार लड़ाई तक शामिल है. उदाहरण के लिए “बाहुबली” भले ही एक काल्पनिक फिल्म थी, लेकिन इसके ऐतिहासिक संदर्भ और ग्रैंड विजुअल्स देखने को मिले. इसी तरह, “आरआरआर” ने स्वतंत्रता संग्राम के दो नायकों की काल्पनिक कहानी को अविश्वसनीय विजुअल इफेक्ट्स के साथ प्रस्तुत किया, जिससे यह एक ऐतिहासिक फैंटेसी बन गई.

भविष्य में ऐतिहासिक फिल्में कर सकती हैं शानदार कमाई

बॉलीवुड में ऐतिहासिक फिल्मों का भविष्य उज्जवल है. छावा की रिलीज़ इस उभरती प्रवृत्ति का एक प्रमाण है. यह फिल्म छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर प्रकाश डालती है. इस फिल्म ने न केवल दर्शकों को ऐतिहासिक प्रवृत्ति समझाया, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी धुआंधार कमाई की. पीरियड ड्रामा ने 15 दिनों में 400 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया.

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Ashish Lata

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By Ashish Lata

आशीष लता हिंदी डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार और कंटेंट स्ट्रेटेजिस्ट हैं, इनके पास पत्रकारिता एवं डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर एवं एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह बॉलीवुड, टेलीविजन, ओटीटी, वेब सीरीज, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स और प्रीमियम डिजिटल कंटेंट पर काम करती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म आशीष लता की सबसे पसंदीदा बीट्स में से एक है. फिल्मों, टीवी शोज, ओटीटी कंटेंट और सेलिब्रिटी वर्ल्ड की हर छोटी-बड़ी अपडेट पर उनकी खास नजर रहती है. उन्होंने बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS (Behind The Scenes) अपडेट्स, सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल, वायरल मोमेंट्स, वेब सीरीज रिव्यू, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स और एक्सक्लूसिव एंटरटेनमेंट स्टोरीज पर लगातार काम किया है. ट्रेंडिंग टॉपिक्स को ऑडियंस की पसंद के साथ जोड़कर पेश करना उनकी सबसे बड़ी ताकत है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, इनसाइट्स और एंटरटेनमेंट का ऐसा बैलेंस देखने को मिलता है, जो पाठकों को जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें अंत तक जुड़े रहने के लिए भी प्रेरित करता है. बदलते डिजिटल ट्रेंड्स, ऑडियंस बिहेवियर और सर्च पैटर्न को समझते हुए वह ऐसा कंटेंट तैयार करती हैं, जो न सिर्फ जानकारीपूर्ण और भरोसेमंद हो, बल्कि पाठकों के लिए आसान, एंगेजिंग और पढ़ने लायक भी हो. SEO और रीडर-फर्स्ट अप्रोच के साथ उनका फोकस हमेशा उन खबरों पर रहता है जो लोगों के लिए सबसे ज्यादा मायने रखती हैं. अपने पत्रकारिता सफर में आशीष लता ने सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया और अलग-अलग राज्यों से जुड़ी बड़ी खबरों को भी करीब से कवर किया है. पत्रकारिता की शुरुआत आशीष लता ने प्लस न्यूज से की, जहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स तैयार कीं. फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के इंटरव्यू भी किए. ग्राउंड जर्नलिज्म का यह अनुभव आज भी उनके कंटेंट को गहराई, विश्वसनीयता और तथ्यपरक दृष्टिकोण प्रदान करता है. इसके बाद उन्होंने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया. आशीष लता की पत्रकारिता की नींव मजबूत शैक्षणिक बैकग्राउंड और ऑन-ग्राउंड अनुभव पर आधारित है. उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. अकादमिक सीख और न्यूजरूम के वास्तविक अनुभव का यही मेल उन्हें खबरों को गहराई से समझने और आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करता है. फैक्ट-आधारित रिपोर्टिंग, रिसर्च और जर्नलिज्म के 5Ws+1H सिद्धांतों पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिसके कारण उनका कंटेंट विश्वसनीय, संतुलित और पाठकों के लिए उपयोगी माना जाता है. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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