हॉस्पिटल बेड पर मां को किया था वादा, भीलवाड़ा के नवनीत तहसीलदार से बने SDM

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 30 May 2026 11:45 AM

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नवनीत शर्मा (PC-इंस्टाग्राम)

RAS Success Story: राजस्थान के नवनीत हमेशा से पढ़ने में अच्छे थे. उन्होंने अपनी बीमार मां से वादा किया था कि वे SDM बनकर ही सांस लेंगे.

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RAS Success Story: अक्सर कहा जाता है कि छोटे शहरों के युवा बड़े सपने नहीं देखा करते हैं. इसी सोच के कारण राजस्थान के नवनीत शर्मा ने IIT का ख्वाब नहीं देखा. लेकिन जब सिविल सेवा की दुनिया में कदम रखने का मौका मिला तो उन्होंने आखिरी चांस तक प्रयास करना नहीं छोड़ा. आइए, जानते हैं राजस्थान के इस बेटी की सफलता की कहानी.

भीलवाड़ा के नवनीत ने देखे बड़े सपने

नवनीत राजस्थान के भीलवाड़ा के रहने वाले हैं. उन्होंने 2017 में 12वीं में 94.2 प्रतिशत मार्क्स लाकर परीक्षा पास की थी. 12वीं के बाद IIT की तैयारी करने के लिए कोटा जाने का सोचा. लेकिन बड़े सपने देखने के डर से उन्होंने अपनी इस इच्छा को मन में ही मार दिया. इसके बाद उन्होंने बीएससी बीएड कोर्स किया. लेकिन नवनीत को हमेशा से कुछ बड़ा करना था. उन्हें पता था कि माता-पिता की जिंदगी बेहतर बनानी है तो कुछ बड़ा करना होगा. इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया.

अस्पताल के बेड पर पड़ी मां से किया वादा

एक ऐसा फेज भी आया जब नवनीत की मां काफी बीमार पड़ गई थीं और उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा. उन्होंने अपनी मां का हाथ थामकर बोला, मैं RAS बनकर ही दम लूंगा. मां से किए इस वादे को निभाने के लिए नवनीत ने जी तोड़ मेहनत की.

नवनीत शर्मा (PC-इंस्टाग्राम)
नवनीत शर्मा (PC-इंस्टाग्राम)

40 लड़कों पर एक बाथरूम

नवनीत ने RAS परीक्षा की तैयारी के लिए शहर का रुख किया. जिस कमरे में वे रहते थे, उसमें न खिड़की थी न कुंडी. वे पेन की मदद से दरवाजा बंद करते थे. 40 लोगों पर एक कॉमन वाशरूम था. नहाने के लिए लंबी लाइन लगानी पड़ती थी. ऐसी कठिन परिस्थिती में भी उनका हौसला बुलंद रहा.

लाइब्रेरी में कटी कई रातें

नवनीत ऑनलाइन पढ़ाई करते थे तो उनकी लॉबी भी मजबूत नहीं थी. ऐसे में वे कई बार खुद से सवाल करते थे. डिप्रेशन में भी गए. उन्होंने लाइब्रेरी ज्वॉइन कर ली. कई बार वे लाइब्रेरी में ही सो जाते थे.

कॉलेज दिनों में लोग समझते थे आवारा

नवनीत अपने एक इंटरव्यू में बताते हैं कि उन्हें कॉलेज के दिनों में लोग आवारा कहते थे. जब उन्होंने तैयारी शुरू की तो भी बहुत से लोगों ने उनका मजाक बनाया करते थे. लेकिन उन्होंने बिना किसी की परवाह किए अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा.

मेन्स पेपर से 2 महीने पहले पड़े बीमार

नवनीत ने प्रीलिम्स तो क्यिलर कर लिया. लेकिन मेन्स परीक्षा के दौरान वे काफी बीमार पड़ गए. पेपर के 2 महीने पहले ही उनकी रीढ़ की हड्डी के पास का एक मांस फट गया, ये सब देर तक बैठने रहने के कारण हुआ था. नवनीत ने उसी हालत में 3 घंटे का मेन्स पेपर लिखा.

NAvneet Sharma With Family
बाएं- नवनीत शर्मा अपनी बहन के साथ, दाएं- अपनी मां के साथ (PC-इंस्टाग्राम)

बहन ने बढ़ाई हिम्मत

साल 2023 का रिजल्ट अक्टूबर 2025 में आया. नवनीत को रैंक मिली 87वीं, जिसके आधार पर उन्हें तहसीलदार की पोस्ट मिलती. लेकिन उन्हें तो SDM बनना था. ऐसे में वो दुविधा में पड़ गए. तब बहन ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जल्दी सक्सेस मिलना सही नहीं है, इससे आप लिमिटेड हो जाते हैं. ये बात नवनीत के मन में बैठ गई और उन्होंने तय किया कि फिर परीक्षा में शामिल होंगे.

2024 में मिली सफलता

साल 2024 के फाइनल रिजल्ट में नवनीत ने सफलता हासिल की. इस परीक्षा में भीलवाड़ा के नवनीत शर्मा ने पूरे राज्य में तीसरा स्थान लाकर बड़ी सफलता हासिल की है. नवनीत शर्मा ने अपने दूसरे प्रयास में SDM बनकर ही दम लिया.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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