दोनों हाथ नहीं, मुंह से पकड़ा कलम और रच दिया इतिहास
चिराग जैन
Chirag Jain Inspirational Story: बांसवाड़ा के चिराग जैन ने मुंह से पेन पकड़कर दी परीक्षा और इतिहास रच दिया. उन्होंने बिजल के करंट में अपने दोनों हाथ खो दिए थे. लेकिन फिर भी हार नहीं मानी. बिना हाथ के कई सारी प्रतियोगिता परीक्षाएं दी और अब सफलता हासिल की है.
Chirag Jain Inspirational Story: सफलता की राह मुश्किल होती है. लेकिन इनती भी नहीं कि कड़ी मेहनत और लगन के बाद भी मुश्किलें आसान नहीं हों. हालात कितने भी बुरे थे लेकिन चिराग जैन की मेहनत के आगे मुश्किलों को भी घुटने टेकने पड़े. राजस्थान के रहने वाले इस युवक ने अपने दोनों हाथ एक दुर्घटना में खो दिए. फिर भी हार नहीं मानी और अनपे मुंह से पेन पकड़कर परीक्षा दी और सफलता हासिल कर ली. आइए, जानते हैं इनके संघर्ष के दिनों की कहानी.
करंट लगने के बाद खो दिए थे दोनों हाथ
चिराग जैन राजस्थान (Rajasthan News) के बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा के रहने वाले हैं. बिजली के करंट से चिराग ने अपने दोनों हाथ खो दिए थे. बावजूद उन्होंने पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा. लगातार मेहनत के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) की थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है.
मुंह से पेन पकड़ना और स्पीड मेंटेन करना मुश्किल था
ये सफर चिराग के लिए इतना आसान नहीं था. इलेक्ट्रिक शॉक के कारण उनके हाथ तो गए ही. साथ ही ऊपर के हिस्से में कोई सेंशन नहीं था. ऐसे में चिराग ने मुंह से पेन पकड़कर लिखना शुरू किया. कई बार पैरों की उंगलियों का सहारा लेकर भी लिखने की कोशिश की. शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं. मुंह से लिखने के लिए चिराग को काफी झुकना पड़ता था और स्पीड भी अच्छी नहीं थी. पेन को सही तरीके से पकड़ना, अक्षर लिखना और तय समय में जवाब पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी.
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लगातार अभ्यास से चिराग जैन की स्पीड बढ़ती गई
चिराग ने मुश्किल शुरुआत के बावजूद अभ्यास जारी रखा. वो कहते हैं न Practice Makes a Man perfect, बस इसी की राह पर चलते-चलते चिराग ने अपनी स्पीड बढ़ाई. जो काम शुरुआत में काफी मुश्किल लगता था, वह लगातार मेहनत के बाद उनकी आदत बन गई.
एक नहीं कई सारी राजस्थान सरकार की प्रतियोगिता परीक्षाएं दी हैं
इसी तैयारी के दम पर चिराग ने कई सरकारी परीक्षाओं में हिस्सा लिया. वह फर्स्ट ग्रेड शिक्षक, सेकंड ग्रेड शिक्षक और राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) जैसी परीक्षाओं में भी शामिल हो चुके हैं. उन्होंने कनिष्ठ लिपिक (LDC) भर्ती परीक्षा भी दी है.
RAS में 11 अंकों से चूके, लेकिन नहीं रुके
चिराग की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह RAS मुख्य परीक्षा तक पहुंचे. हालांकि अंतिम चयन से वह महज 11 मार्क्स से चूक गए. यह उनके लिए निराशा का मौका जरूर था, लेकिन उन्होंने तैयारी बंद नहीं की.
उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं पर फोकस किया. हर परीक्षा उनके लिए सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं थी, बल्कि खुद को साबित करने का एक और मौका थी.
परीक्षा केंद्र पर भी मिली तारीफें
लगातार प्रयासों का नतीजा आखिरकार मिला. चिराग ने RSMSSB की थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है. परीक्षा के दौरान भी उनके जज्बे को देखकर अन्य अभ्यर्थियों और परीक्षा केंद्र पर मौजूद स्टाफ ने उनकी सराहना की.
मुश्किल वक्त में भी राजस्थान के इस युवक ने नहीं मानी हार
चिराग ने यह साबित किया है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ा जा सकता है. दोनों हाथ खोने के बाद मुंह से पेन पकड़कर लिखना सीखने से लेकर शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने तक का उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो किसी मुश्किल के कारण अपने सपनों से पीछे हट जाते हैं.
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