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Savitribai Phule Jayanti Speech: सावित्रीबाई फुले जयंती पर छोटा और आसान स्पीच, शिक्षक कहेंगे वाह-वाह

Savitribai Phule Jayanti Speech: सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा, समानता और सामाजिक सुधारों के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है. हर साल 3 जनवरी को भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती (Savitribai Phule Jayanti) मनाई जाती है. आइए, इस मौके पर 3 छोटे भाषण देखें.

Savitribai Phule Jayanti Speech: हर साल 3 जनवरी को भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई जाती है. सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा, समानता और सामाजिक सुधारों के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है. उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया और जीवन भर बाल विवाह, सती प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई. ऐसे में इस मौके पर स्कूल और कॉलेज में सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और स्टूडेंट्स स्पीच देते हैं.

Savitribai Phule Jayanti Speech In Hindi: छोटा और सरल भाषण

आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों,
आज हम उस महान महिला को नमन करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्होंने भारत में शिक्षा की पहली मशाल जलाई, सावित्रीबाई फुले.

जब लड़कियों को स्कूल जाना पाप माना जाता था, उस दौर में सावित्रीबाई फुले ने समाज की सोच को चुनौती दी. उन्होंने न सिर्फ लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला, बल्कि खुद शिक्षिका बनकर घर-घर शिक्षा का दीप जलाया. रास्ते में उन्हें अपमान, पत्थर और कीचड़ तक सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को बदलने की सबसे बड़ी ताकत है. आज हम जिस आजादी से पढ़ पा रहे हैं, उसमें सावित्रीबाई फुले के संघर्ष की छाया छुपी है. आज उनकी जयंती पर हम संकल्प लें कि हम शिक्षा को केवल डिग्री नहीं, बल्कि बदलाव का हथियार बनाएंगे.

सावित्रीबाई फुले अमर रहें.

Savitribai Phule Jayanti Speech In Hindi: नारी सशक्तिकरण की असली शुरुआत

साथियों,
आज हम जिस महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, उसकी नींव सावित्रीबाई फुले ने डेढ़ सौ साल पहले रख दी थी.

जब समाज में महिलाओं को घर की चार दीवारी में कैद रखा जाता था, उस समय सावित्रीबाई फुले ने किताब को हथियार बनाया. उन्होंने बालिकाओं, विधवाओं और शोषित वर्ग की महिलाओं के लिए स्कूल खोले और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया. उन्होंने सिखाया कि नारी केवल सहने के लिए नहीं बनी, बल्कि समाज को दिशा देने की ताकत भी उसमें है. उनकी सोच आज भी हमें यह याद दिलाती है कि अगर एक लड़की पढ़ती है, तो पूरी पीढ़ी आगे बढ़ती है.

आज हम उन्हें नमन करते हुए ये वादा करें कि किसी भी लड़की का सपना उसकी गरीबी या समाज की सोच के कारण अधूरा नहीं रहने देंगे.

Savitribai Phule Jayanti Speech In Hindi: बराबरी की लड़ाई की प्रतीक

आदरणीय उपस्थितजनों,
सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं थीं, वह बराबरी की लड़ाई की प्रतीक थीं.

उन्होंने जाति, वर्ग और लिंग के भेदभाव के खिलाफ शिक्षा को सबसे मजबूत हथियार बनाया. उन्होंने समाज को यह सिखाया कि इंसान की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसकी सोच और शिक्षा से होती है.

आज जब हम समानता और अधिकार की बात करते हैं, तो सावित्रीबाई फुले का संघर्ष हमें याद दिलाता है कि ये अधिकार हमें यूं ही नहीं मिले, बल्कि इसके पीछे एक साहसी महिला का इतिहास है. आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि हम उनकी सोच को सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार में भी उतारें.

सावित्रीबाई फुले हमें सिखाती हैं कि शिक्षा ही असली क्रांति है.

Shambhavi Shivani
Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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