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History of Chess: ऐसे हुई थी शतरंज खेलने की शुरुआत, पहले कहा जाता था चतुरंग

Updated at : 03 Dec 2022 9:40 AM (IST)
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History of Chess: ऐसे हुई थी शतरंज खेलने की शुरुआत, पहले कहा जाता था चतुरंग

History of Chess:  भारत में शतरंज खेलने की शुरुआत भी पांचवी-छठी शताब्दी के समय से मानी जाती है. यहां जानें कैसे हुई थी शतरंज खेलने की शुरुआत

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History Of Chess: माना जाता है कि शतरंज के खेल का आविष्कार भारत में होने के बाद यह पारसी देशों में प्रचलित हुआ, इसके बाद पूरे विश्व में पहुंचा. भारत में शतरंज खेलने की शुरुआत भी पांचवी-छठी शताब्दी के समय से मानी जाती है. यहां जानें कैसे हुई थी शतरंज खेलने की शुरुआत

पहले कहा जाता था चतुरंग

शतरंज के खेल की जब भारत में शुरुआत हुई थी तब इसका ये नाम नहीं था. उस वक्त इसे ‘चतुरंग’ के नाम से जाना जाता था. लेकिन समय के साथ इसका नाम बदल गया और वर्तमान में इसे हिंदी में ‘शतरंज’ बुलाया जाता है.हालांकि इसे दुनियाभर में इसे ‘चेस’ के नाम से जाना जाता है. जो कि भारत से ईरान होते हुए दुनिया में फैलने के बाद इसे यूरोपीय देशों से द्वारा दिया गया नाम है.

ऐसे हुई खेल की शुरूआत

माना जाता है कि 1500 साल पहले गुप्त साम्राज्य के दौरान शतरंज या चतुरंगा का खेल अस्तित्व में आया. यह खेल 6वीं शताब्दी के दौरान भभारत में फला-फूला, जो सेना के चार डिवीजन – पैदल सेना, घुड़सवार सेना, हाथी और रथ या आधुनिक दिन के मोहरे, शूरवीर, किश्ती और बिशप पर आधारित था. तब इस खेल  को चतुरंग कहा जाता था. ये खेल असल में एक युद्ध वाले फॉर्मेट का खेल खेल था. मध्ययुगीन काल में जैसे अगर राजा ने आत्मसमर्पण कर दिया, तो यह उसके राज्य के नुकसान का प्रतीक होता था, ठीक उसी तरह जैसे राजा के पकड़े जाने पर शतरंज के खेल में खिलाड़ी हार जाता है.

महाभारत के समय से भी है संबंध

शतरंज के खेल के उद्भव के बारे में इसकी प्राचीनता को महाभारत के समय से भी जोड़ा जाता है. हालांकि इसकी अधिक लोकप्रियता गुप्तकाल में हुई थी. यही नहीं भारत में इस तरह के और भी कई खेलों का उद्भव प्राचीन समय में हुआ है.शतरंज भारत की ओर से दुनिया को खेल के तौर पर एक महान उपहार है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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