नई शिक्षा नीति में क्या बदला? जानें कोडिंग, इंटर्नशिप और कॉलेज एग्जिट के नए नियम

Published by :Smita Dey
Published at :22 Apr 2026 10:26 PM (IST)
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New Education Policy

स्टूडेंट की सांकेतिक फोटो (Canva)

New Education Policy: नई शिक्षा नीति छात्रों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. यह पॉलिसी पढ़ाई को आसान, लचीला और फ्यूचर के हिसाब से तैयार बनाती है. अब नंबर लाना ही सबकुछ नहीं होगा, बल्कि स्किल और नॉलेज भी जरूरी होगी.

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New Education Policy: भारत में शिक्षा को लेकर लंबे समय से बदलाव की जरूरत लग रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) लागू की, जो छात्रों के सीखने के तरीके को पूरी तरह बदलने की कोशिश करती है. यह नीति सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्किल, समझ और क्रिएटिविटी पर भी जोर देती है. आइए जानते हैं कि इस नई नीति (New Education Policy) में क्या-क्या बड़ा बदलाव हुआ है.

New Education Policy: 10+2 का फॉर्मूला खत्म, अब 5+3+3+4 मॉडल

अब तक हमारे स्कूलों में 10वीं और फिर 12वीं का सिस्टम चलता था. नई नीति में इसे बदलकर 5+3+3+4 कर दिया गया है:

  • फाउंडेशन स्टेज (5 साल): इसमें 3 साल प्री-स्कूल और क्लास 1 और  2 शामिल हैं. 
  • प्रिपेरेटरी स्टेज (3 साल): क्लास  3 से 5 तक की पढ़ाई, जिसमें भविष्य की नींव रखी जाएगी.
  • मिडल स्टेज (3 साल): क्लास 6 से 8 तक, जहां कोडिंग और वोकेशनल कोर्स शुरू होंगे.
  • सेकेंडरी स्टेज (4 साल): क्लास  9 से 12 तक, जहां छात्र अपने पसंद के सब्जेक्ट चुन सकेंगे.

स्ट्रीम सिस्टम का झंझट खत्म

पहले अगर आपने साइंस ले ली, तो आप हिस्ट्री नहीं पढ़ सकते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं है. नई शिक्षा नीति में मल्टी-डिसीप्लिनरी (Multi-disciplinary) अप्रोच अपनाई गई है. यानी अगर कोई छात्र फिजिक्स के साथ म्यूजिक, केमिस्ट्री के साथ पॉलिटिकल साइंस पढ़ना चाहता है, तो वह आसानी से पढ़ सकता है. 

New Education Policy: नया असेसमेंट सिस्टम

अब बोर्ड परीक्षाओं का महत्व थोड़ा कम किया जाएगा और साल भर के परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया जाएगा. रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ टीचर के नंबर नहीं होंगे, बल्कि छात्र अपना खुद का मूल्यांकन (Self-assessment) भी करेंगे और उसके क्लासमेट भी उसे रेटिंग देंगे. इसका उद्देश्य यह है कि स्टूडेंट रट्टा मारने के बजाय कॉन्सेप्ट को समझें.

कक्षा 6 से ही शुरू होगी इंटर्नशिप और कोडिंग

नई शिक्षा नीति छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देती है. कक्षा 6 से ही छात्रों को कोडिंग सिखाई जाएगी, जो आज के डिजिटल युग के लिए बहुत जरूरी है. इसके अलावा, वोकेशनल एक्सपोजर के तहत छात्र कारीगरी, बागवानी या बिजली के काम जैसी चीजों में इंटर्नशिप कर सकेंगे, ताकि वे किताबी ज्ञान के साथ-साथ स्किल्स भी सीख सकें.

मातृभाषा में पढ़ाई को बढ़ावा

शुरुआती पढ़ाई बच्चों को उनकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में देने की कोशिश की जाएगी. इससे बच्चे अपनी भाषा में चीजों को जल्दी और बेहतर तरीके से समझते हैं. 

कॉलेज की पढ़ाई में एग्जिट और एंट्री की सुविधा

कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए सबसे अच्छी बात मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम है.

  • अगर आप 1 साल बाद कॉलेज छोड़ते हैं, तो आपको सर्टिफिकेट मिलेगा.
  • 2 साल बाद छोड़ते हैं, तो डिप्लोमा मिलेगा.
  • 3 या 4 साल पूरे करने पर डिग्री मिलेगी. इससे उन छात्रों का साल खराब नहीं होगा जिन्हें किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़नी पड़ती है. वे बाद में वहीं से पढ़ाई दोबारा शुरू कर सकते हैं.

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विदेशी यूनिवर्सिटी के लिए खुले रास्ते

अब दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज को भारत में अपने कैंपस खोलने की अनुमति दी जाएगी. इससे भारतीय छात्रों को अपने ही देश में रहकर ग्लोबल लेवल पर शिक्षा मिल सकेगी और उन्हें विदेशों में पढ़ाई के लिए जाना नहीं पड़ेगा.

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लेखक के बारे में

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स्मिता दे प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रही हैं. बुक्स पढ़ना, डांसिंग और ट्रैवलिंग का शौक रखने वाली स्मिता युवाओं को बेहतर करियर गाइड करना और नौकरी के लिए प्रोत्साहित करना पसंद करती हैं.

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