CBSE 10 Social Science Exam: सीबीएसई क्लास 10वीं का सोशल साइंस सब्जेक्ट स्टूडेंट्स के लिए स्कोरिंग माना जाता है, लेकिन सही स्ट्रेटजी के बिना इसमें अच्छे मार्क्स लाना मुश्किल हो सकता है. बोर्ड द्वारा तय किए गए नए एग्जाम पैटर्न के अनुसार सोशल साइंस का पेपर 4 सेक्शन A, B, C और D में होगा. इसमें कुल 38 क्वेश्चन पूछे जाएंगे. पैटर्न को समझकर की गई तैयारी न केवल टाइम मैनेजमेंट में मदद करता है, बल्कि बेहतर मार्क्स हासिल करने का रास्ता भी आसान बनाती है. आइए जानते हैं कि बोर्ड एग्जाम में सोशल साइंस (CBSE 10 Social Science Exam) सब्जेक्ट की तैयारी कैसे करें ताकि परीक्षा में स्टूडेंट्स अच्छे मार्क्स ला सकें.
CBSE 10 Social Science Exam: सेक्शन-वाइज एग्जाम टिप्स
सेक्शन A – MCQs (20 मार्क्स)
सेक्शन A की तैयारी के लिए NCERT बुक अच्छे से पढ़ना चाहिए, क्योंकि MCQs सीधे टेक्स्ट से पूछे जाते है. मैप्स, चार्ट, डेट्स, टर्म्स और कॉन्सेप्ट पर फोकस करें और नियमित प्रैक्टिस करें. हमेशा गलत ऑप्शन को हटाकर सही आंसर चुनने की आदत डालें. सबसे पहले सेक्शन A के क्वेश्चन को सॉल्व करना चाहिए. इससे कॉन्फिडेंस बढ़ता है. रोजाना 25 से 30 MCQs हल करना चाहिए.
सेक्शन B – Very Short Answer (20 मार्क्स)
इस सेक्शन में आंसर 20-30 वर्ड्स में ही लिखें. हर चैप्टर के इंपोर्टेंट की-वर्ड्स अलग से याद करनी चाहिए. परिभाषा (Definition) साफ और सटीक हो. एग्जाम में इस सेक्शन में Keyword बेस्ड आंसर लिखें.
सेक्शन C – Short Answer (20 मार्क्स)
आंसर 60-80 वर्ड्स में लिखें और 2-3 पॉइंट्स में समझाएं. एग्जाम में पॉइंट्स को क्रम में लिखें और जरूरी शब्दों को अंडरलाइन करें. परीक्षा में लिखने की स्पीड और प्रेजेंटेशन पर फोकस करना चाहिए.
सेक्शन D – Long & Case Based Questions (20 मार्क्स)
आंसर को इंट्रोडक्शन, एक्सप्लेनेशन और कन्क्लूशन पार्ट में लिखें. बोर्ड एग्जाम में टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है, इसलिए पहले से लिखने की प्रैक्टिस करनी चाहिए. पिछले वर्षों के केस-आधारित क्वेश्चन जरूर सॉल्व करें. हमेशा बोर्ड एग्जाम में मैप, डायग्राम, फ्लोचार्ट आंसर में जोड़ना चाहिए. इससे मार्क्स अच्छे आते हैं.
CBSE 10 Social Science Exam : मॉक टेस्ट और रिवीजन
CBSE 10 Social Science Exam में अच्छे मार्क्स लाने के लिए मॉक टेस्ट और रिवीजन बहुत जरूरी होता है. मॉक टेस्ट देने से एग्जाम पैटर्न समझ में आता है और टाइम मैनेजमेंट में भी सुधार होने लगता है. रिवीजन से कॉन्सेप्ट क्लियर होता है. मॉक टेस्ट और रिवीजन से गलतियों का पता चलता है.
यह भी पढ़ें : 10th Board Exam 2026: साइंस में मिलेंगे पूरे मार्क्स, बस फॉलो करें ये 5 आसान टिप्स

