पीएचडी को लेकर बदल सकते हैं नियम, बिना Interview के होगा एडमिशन

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 08 Oct 2025 12:26 PM

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पीएचडी के नियम (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो क्रेडिट- फ्रीपिक)

PhD Guidelines: AICTE पीएचडी के कई नियमों में बदलाव करने जा रहा है. इनमें पीएचडी कोर्स की अवधि, इंटरव्यू, सुपरवाइजर आदि को लेकर नियम तय किए गए हैं. टेक्नीकल विषय के लिए पीएचडी करने वालों का दाखिला अब सिर्फ लिखित परीक्षा के आधार पर होगा.

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PhD Guidelines: अगर आप टेक्निकल विषय से पीएचडी करना चाहते हैं तो आपके लिए काम की खबर है. All India Council for Technical Education (AICTE) यानी कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद PhD कोर्सेज के लिए कई बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट और डिजाइन जैसे कोर्सेज के लिए किए जाएंगे. हालांकि, केंद्र सरकार से मंजरी मिलने के बाद ही इसे फाइनल किया जाएगा.  

PhD Interview: पीएचडी के लिए नहीं होगा इंटरव्यू?

सबसे बड़ा बदलाव ये होगा कि पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया (PhD Admission Process) से इंटरव्यू (Interview) को हटाने का. AICTE का उद्देश्य है कि दाखिला, रिसर्च और मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता आए. पहले उच्च शिक्षा संस्थान (एचईआई) 70:30 के अनुपात का पालन करते थे, जिसमें 70 प्रतिशत वेटेज लिखित परीक्षा (PhD written Exam) और 30 प्रतिशत वेटेज साक्षात्कार (PhD Interview) को दिया जाता था. वहीं अब नए निर्देशों के बाद, परीक्षा केवल लिखित होगी. वहीं संस्थान की प्रवेश परीक्षाओं के लिए 70 % और गेट या नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की योग्यता परीक्षाओं के लिए 30 प्रतिशत वेटेज होगा. 

क्या है इस बदलाव का उद्देश्य? 

AICTE का कहना है कि इन बदलावों से पीएचडी प्रवेश परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी. साथ ही इससे परीक्षा में पक्षपात कम होगा. वहीं मेरिट लिखित परीक्षा के आधार पर तैयार किया जाएगा. हालांकि, शिक्षा जगत के एक्सपर्ट इसके विरोध में भी हैं, उनका मानना है कि इससे छात्रों की कम्युनिकेशन स्किल और शोध क्षमता जैसे प्रमुख गुणों का आकलन नहीं हो पाएगा. 

PhD Duration: पीएचडी की अवधि क्या रहेगी?

पीएचडी की अवधि यूजीसी नियमों (UGC Guidelines) के आधार पर होगी. फुल टाइम पीएचडी करने वालों के लिए न्यूनतम 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष तय किया गया है. वहीं पार्ट टाइम पीएचडी के लिए न्यूनतम 4 वर्ष और अधिकतम 8 वर्ष. 

एआई के इस्तेमाल पर देनी होगी जानकारी 

पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लेने वाले छात्रों को यह बताना होगा कि उन्होंने जो रिसर्च पेपर तैयार किया, उसमें कितना एआई का इस्तेमाल किया गया है. पढ़ाई लिखाई में AI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए AICTE ने कहा कि रिसर्च करने वाले छात्रों को यह बताना होगा कि उन्होंने अपने शोध कार्य में AI का कितना प्रतिशत इस्तेमाल किया है. 

सुपरविजन के नियम में क्या बदलाव हुआ?  

सुपरविजन के नियम यूजीसी जैसे ही रहेंगे. लेकिन इसमें विजिटिंग फैकल्टी, प्रैक्टिस प्रोफेसर और एमेरिटस प्रोफेसर शामिल हैं. ये सभी सीमित संख्या में पीएचडी छात्रों को को-सुपरवाइज कर सकते हैं. 

यह भी पढ़ें- यूजीसी ने जारी की लिस्ट, इन Colleges में होगी डिस्टेंस लर्निंग

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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