धनबाद के निरसा की इतु मंडल ने रचा इतिहास, खेलो इंडिया यूथ गेम्स में बनी सबसे कम उम्र की प्रतिभागी

धनबाद की बेटी इतु मंडल ने इतिहास रच दिया है वो खेलो इंडिया यूथ गेम्स में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी है. वह ट्रैक्टर चालक की बेटी है, जिसे बचपन से ही कबड्डी से लगाव था.
Jharkhand News: धनबाद जिला के निरसा की रहने वाली इतु मंडल ने पंचकुला (हरियाणा) में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स में नया इतिहास रचा. शनिवार को अपना पहला रेड करने से पहले ही रिकॉर्ड बुक में प्रवेश कर लिया था. खेलो इंडिया गेम्स के इस संस्करण में 14 वर्ष पांच माह की ईतु सबसे कम उम्र की कबड्डी खिलाड़ी है.
ट्रैक्टर चालक की बेटी इतु मंडल को बचपन से ही कबड्डी से लगाव था. जब वह सिर्फ आठ साल की थी, तब से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया था. वह अंडर 18 युवा टीम का हिस्सा बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ी है. इतु ने कहा कि उसके माता-पिता हमेशा उसके कॅरियर के लिए चिंतित थे. लेकिन कभी नहीं डरी. वह नौ जून को हरियाणा से धनबाद लौटेगी.
कहा कि परिवार में सबसे बड़ी हैं. उनके माता-पिता ने खेलने की पूरी छूट दी है. कभी परिवार की जिम्मेदारियां निभाने का कोई दबाव नहीं डाला. उसकी छोटी बहन भी कबड्डी खिलाड़ी है. इतु का कहना है ‘मैं एक कोच बनना चाहती हूं. जैसे ही मैं खेल के बारे में पर्याप्त सीख लूंगी, मैं कोचिंग शुरू कर दूंगी. मैं युवाओं के साथ काम करना चाहती हूं, उन्हें कबड्डी से प्यार करने में मदद करना चाहती हूं.’
हाल के वर्षों में कबड्डी देश में अगला बड़ा खेल बनकर उभरा है. इसने न केवल ग्रामीण भारत में युवाओं को एक बड़ा मंच दिया है, बल्कि कई लोगों को मेगा स्टार भी बनाया है. उनमें से कुछ रातोंरात काफी अमीर भी बन गए हैं. 2016 में, महिलाओं के लिए एक पेशेवर कबड्डी लीग की भी शुरुआत की गयी है, जो युवा लड़कियों को खेल के लिए आकर्षित करती है. टीम मैनेजर आलोक कुमार ने बताया कि इतु बहुत ही मेहनती खिलाड़ी है. उससे झारखंड व देश को काफी उम्मीदें हैं.
साईं एन सी ओई साल्ट लेक कोलकाता में रविवार को हुए एक दिवसीय द्वितीय खेलो इंडिया खेलो ईस्ट जोन आर्चरी टूर्नामेंट में बोकारो के दुगदा निवासी दीपक कुमार सिंह ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ओलिंपिक राउंड (कंपाउंड ) की प्रतिस्पर्धा में रजत पदक हासिल किया. प्रतियोगिता में 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था. दीपक कुमार सिंह, एंजेला आर्चरी सेंटर में कोच एंजेला सिंह की देखरेख में प्रशिक्षण ले रहे हैं. उन्होंने अपनी सफलता का सारा श्रेय कोच को दिया. आगे की तैयारियों के बारे में बताया कि उनकी मंजिल है ओलिंपिक में पदक हासिल करना. इसके लिए कोच के मार्गदर्शन में कठिन परिश्रम कर रहे हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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