विधि विधान से की गयी चैती काली की पूजा-अर्चना

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शिकारीपाड़ा में सिंहवाहिनी देवी व चैती काली की पूजा-अर्चना मंगलवार को आयोजित की गयी.

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प्रतिनिधि, शिकारीपाड़ा शिकारीपाड़ा में सिंहवाहिनी देवी व चैती काली की पूजा अर्चना मंगलवार को आयोजित की गयी. श्रद्धालुओं ने भगवती सिंहवाहिनी देवी को शृंगार की सामग्री ,फूल फल आदि अर्पित कर पूजा-अर्चना में शामिल हुए. मनोकामना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं द्वारा बकरे की बलि दी गयी. बताया जाता है कि गांव के सार्वजानिक कल्याण को लेकर सेवायत काजल पंडित के पूर्वजों व ग्रामीणों द्वारा काड़ाकाटा पहाड़ स्थित गुफा से सिंहवाहिनी देवी को विधि विधान से लाया गया था. सिंहवाहिनी देवी को लाने के दौरान गांव के बाहर सखुआ पेड़ के नीचे देवी को प्रतिष्ठित किया गया था. पेड़ के नीचे शुरुआत से ही चैत माह के चयनित तिथि पर सिंहवाहिनी देवी की परंपरागत पूजा की जाती है. इसमें मुख्य रूप से देवी की शृंगार सामग्री के साथ फल-फूल व मिष्ठान्न देवी के चरणों पर अर्पित की जाती है. बकरे की बलि चढ़ायी जाती है. सिंहवाहिनी देवी व चैती काली पूजा को संपन्न कराने में सेवायत विमला देवी, काजल पंडित,संतोष भंडारी, जर्मन राय, काबुल साहा , अभिषेक सिंह, अजित पाल आदि मुख्य भूमिका में रहे.

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