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आईआईटी दिल्ली में 20 सीटों के साथ शुरू हुआ नया कोर्स, जानें क्या है खासियत

Updated at : 06 Feb 2024 12:12 PM (IST)
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आईआईटी दिल्ली में 20 सीटों के साथ शुरू हुआ नया कोर्स, जानें क्या है खासियत

आईआईटी दिल्ली के बायोलॉजी डिपार्मेंट में नए कोर्स की शुरुआत हुई है. दो वर्षीय मास्टर्स कोर्स एमएससी इन बायोलॉजी शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से शुरू होगा. इस साल इस कोर्स में 20 सीटें रखी गई हैं.

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आईआईटी दिल्ली के कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज में नए कोर्स की शुरुआत होने जा रही है. यह कोर्स नए सत्र से छात्रों के लिए शुरू किया जाएगा. एमएससी इन बायोलॉजी शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से शुरू होगा. दो वर्षीय मास्टर्स कोर्स में प्रवेश संयुक्त प्रवेश परीक्षा फॉर मास्टर्स (जेएएम 2024) के माध्यम से होगा.इस साल इस कोर्स में 20 सीटें रखी गई हैं.

बॉयोटेक्नोलॉजी मार्केट

जैविक विज्ञान में एम.एससी के कोर्स प्रभारी प्रो. मणिदीपा बनर्जी ने कहा कि हमने आधुनिक बॉयोटेक्नोलॉजी मार्केट में रोजगार के लिए छात्रों को तैयार करने के साथ-साथ उच्च स्तर की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करने के लिए पाठ्यक्रम का संतुलन सुनिश्चित किया है. बायोलॉजी में अध्ययन और खोज अनुसंधान में आईआईटी दिल्ली एक शैक्षणिक माहौल का एक समृद्ध उदाहरण है, जहां छात्र वैज्ञानिक प्रश्नों को हल करने के लिए नियमित रूप से विषयों का अध्ययन करते हैं.

आधुनिक बायोलॉजी

प्रोफेसर मणिदपा ने कहा कि विज्ञान और इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों में 30 से अधिक शैक्षणिक संस्थाओं और इन विभागों के बीच सहयोगात्मक वातावरण ने एक जीवंत पारिस्थिति का सिस्टम बनाया है, जो वैचारिक समझ के साथ-साथ आधुनिक जीव विज्ञान में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आदर्श है.

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कोर्स की विशेषताएं

  • वर्तमान नौकरी बाजार में बड़े डेटा विश्लेषण और प्रेजेंटेशन में अंतर को भरने के लिए इस पाठ्यक्रम में मुख्य विषय के रूप में क्वांटेटिव बायोलॉजी पर जोर दिया जाएगा.

  • छात्रों के पास चुनने के लिए ऐच्छिक विषयों के काफी विकल्प होंगे.

  • इसमें पाठ्यक्रम के साथ “करके सीखने” पर ज़ोर दिया जाएगा. कार्यक्रम के सभी मुख्य पाठ्यक्रमों में एक व्यावहारिक या विश्लेषण-आधारित चैप्टर्स हैं.

  • छात्रों को अंतिम सेमेस्टर में अकादमिक प्रयोगशालाओं के साथ-साथ स्टार्ट-अप/उद्योग सेटिंग्स में प्रोजेक्ट/इंटर्नशिप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उनका वास्तविक दुनिया का अनुभव और अंततः रोजगार क्षमता बढ़ेगी.

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Neha Singh

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By Neha Singh

Neha Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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