West Bengal : डीएलएड कॉलेजों में भर्ती के लिए किसने दिये कितने रुपये, पता लगा रही ईडी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Oct 2022 12:47 PM
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में ईडी की गिरफ्त में आये पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा पर्षद (डब्ल्यूबीबीपीइ) के पूर्व अध्यक्ष व तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य अभी न्यायिक हिरासत में हैं. इधर, ईडी माणिक ही नहीं, उनके परिजनों की संपत्ति भी खंगाल रही है.
पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गिरफ्त में आये पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा पर्षद(डब्ल्यूबीबीपीइ) के पूर्व अध्यक्ष व तृणमूल कांग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य (Manik Bhattacharya) अभी न्यायिक हिरासत में हैं. इधर, ईडी माणिक ही नहीं, उनके परिजनों की संपत्ति भी खंगाल रही है. ईडी (ED) के करीबी सूत्रों की मानें, तो राज्य में निजी डीएलएड कॉलेजों में भर्ती के लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रति अभ्यर्थी से करीब पांच हजार रुपये लिये गये हैं. माणिक के करीबी रहे व्यवसायी व शिक्षण संस्थानों के मालिक तापस से पूछताछ के बाद तृणमूल विधायक पर यह भी आरोप लगा है कि अभ्यर्थियों से ली गयी पांच-पांच हजार रुपये की राशि का हिस्सा उन तक पहुंचता था.
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ईडी यह भी जांच कर रही है कि कितने अभ्यर्थियों से पांच हजार रुपये की राशि ली गई है. कितने अभ्यर्थियों को स्कूलों में नौकरी मिली है? सूत्रों की मानें, तो इस बात का पता लगाने के लिए ईडी ने राज्य के डीएलएड कॉलेजों से संपर्क साधा है, ताकि यह पता चले कि वर्ष 2018 से 2022 के अंतराल में डीएलएड कॉलेज में भर्ती के लिए कितने अभ्यर्थियों ने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था. हालांकि, जांच के बाबत ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है.
इधर, माणिक के ठिकाने से करीब चार हजार अभ्यर्थियों की एक सूची मिली है, जिनमें ढाई हजार को नौकरी मिल चुकी है. ईडी यह भी जांच कर रही है कि नौकरी पानेवाले ढाई हजार अभ्यर्थियों में से किसी ने रिश्वत दी है या नहीं. ईडी सूत्रों का दावा है कि माणिक के बेटे शौभिक का एक संस्थान तो पहले से ही जांच के घेरे में है. उसके एक और संस्थान का पता चला है, जिसके जरिये 2.47 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है. ईडी को यह भी पता चला है कि शौभिक के संस्थान ‘मेसर्स अक्योर कंसल्टेंसी सर्विसेज’ के बैंक खातों में करीब 2.64 करोड़ रुपये जमा हैं. उक्त संस्थान पर आरोप है कि अक्तूबर, 2018 से अप्रैल, 2019 के बीच करीब 530 निजी कॉलेजों व शैक्षणिक संस्थानों को आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने के नाम पर 50-50 हजार रुपये लिये गये थे. पर उन्हें कोई सेवा नहीं दी गयी. अब तक इन संस्थानों के जरिये इडी ने जिन शिक्षण संस्थानों में छापेमारी की है, उनका भी आपसी लिंक तलाशा जा रहा है. वहीं, इडी को माणिक व उनके परिजनों की करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्ति की भनक भी लगी है.
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