भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने किया दावा, CAA लागू करने की प्रक्रिया से अछूता नहीं रहेगा बंगाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Nov 2022 6:55 PM
पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि देश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और पश्चिम बंगाल इससे अछूता नहीं रहेगा.तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी सीएए को कभी भी राज्य में लागू नहीं होने देगी.
पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (Shuvendu Adhikari) ने दावा किया कि देश में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है और पश्चिम बंगाल इससे अछूता नहीं रहेगा. उल्लेखनीय है कि केंद्र ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले और वर्तमान में गुजरात के दो जिलों में रह रहे हिंदुओं, सिखों, बौद्ध, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता कानून 1955 के तहत भारतीय नागरिकता देने का फैसला किया है. इसके एक दिन बाद ही शुभेंदु अधिकारी की यह टिप्पणी आयी है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार, गुजरात के आणंद और मेहसाणा जिलों में रहने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा पांच के तहत नागरिक के तौर पर पंजीकरण कराने की इजाजत दी जायेगी या कानून की धारा छह के तहत उन्हें देश के नागरिक का प्रमाण पत्र दिया जायेगा. यह नागरिकता नियम 2009 के प्रावधानों के अनुसार होगा. केंद्र की अधिसूचना पर पूछे गये सवाल के जवाब में श्री अधिकारी ने कहा गुजरात के दो जिलों में सीएए पहले लागू किया जा चुका है और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से आये कुछ अल्पसंख्यक समूहों को नागरिकता देने वाली अधिसूचना जारी की गयी है.
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तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी सीएए को कभी भी राज्य में लागू नहीं होने देगी. भाजपा देश में सीएए को लागू नह कर पायेगी. शुभेंदु अधिकारी 2023 के पंचायत चुनावों से पहले समाज के ध्रुवीकरण के तहत बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं.
केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि मैं केवल इतना कह सकता हूं कि अगर सीएए लागू होता है, तो यह मतुआ समुदाय सहित पिछड़ी जातियों के सदस्यों के लिए बहुत मददगार होगा. सीएए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है, लेकिन सरकार ने अधिनियम के तहत नियम अब तक नहीं बनाये हैं, इसलिए अब तक किसी को भी इसके तहत नागरिकता नहीं दी जा सकी है.
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