पुरानी पेंशन योजना में क्यों शामिल होना चाहते हैं ज्यादातर सरकारी कर्मचारी? जानें इसके फायदे
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 05 Jun 2023 7:37 PM
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2004 को बंद कर दिया था. इसका कारण यह था कि सरकार को पेंशन की पूरी रकम का भुगतान करना पड़ता था. सरकार ने पेंशन के मद में अपने खर्च कम करने के लिए पुरानी पेंशन योजना को बंद कर दिया था.
Old Pension Scheme : पुरानी पेंशन योजना और नई पेंशन योजना को लेकर भारत में बहस और राजनीति जारी है. केंद्र सरकार समेत तमाम भाजपा शासित राज्य नई पेंशन योजना को बढ़ावा देने में लगे हैं, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों में से कुछ ने अपने यहां पुरानी पेंशन योजना को दोबारा बहाल करने का फैसला किया है. इन राज्यों में राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब शामिल हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि नई-पुरानी की बहस के बीच देश के ज्यादातर कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना में ही रहना ज्यादा पसंद करते हैं. आखिर, ऐसा क्या है कि ज्यादातर कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना में ही रहना चाहते हैं. आइए जानते हैं पुरानी पेंशन योजना के फायदे…
2004 में एनडीए सरकार ने बंद कराई थी पुरानी पेंशन योजना
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2004 को बंद कर दिया था. इसका कारण यह था कि सरकार को पेंशन की पूरी रकम का भुगतान करना पड़ता था. सरकार ने पेंशन के मद में अपने खर्च कम करने के लिए पुरानी पेंशन योजना को बंद कर दिया था. पुरानी पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के वक्त अंतिम वेतन की आधी रकम पेंशन के तौर पर निर्धारित की जाती थी. सेवानिवृत्ति के समय पेंशन कर्मचारी की आखिरी वेतन और महंगाई के आंकड़ों के आधार पर पेंशन तय की जाती है. इसके साथ ही, पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों के वेतन से पैसों की कटौती नहीं की जाती है. पुरानी पेंशन योजना के तहत सरकारी कर्मचारी को दी जाने वाली पेंशन का भुगतान सरकार की ट्रेजरी के माध्यम से किया जाता है.
पुरानी पेंशन योजना के फायदे
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पुरानी पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्ति के वक्त कर्मचारियों को उनके वेतन की आधी रकम पेंशन के रूप में दी जाती है.
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अगर सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो पुरानी पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारी के परिजनों को पेंशन की राशि प्रदान की जाती है.
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पेंशन देने के लिए कर्मचारियों के वेतन से इस स्कीम के तहत किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाती है.
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पुरानी पेंशन योजना में सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को चिकित्सा भत्ता और मेडिकल बिलों की सुविधा भी दी जाती है.
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पुरानी पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को 20 लाख रुपये तक की ग्रेजुएटी की रकम दी जाती है.
क्या है नई और पुरानी पेंशन योजना में अंतर
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नई पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के वेतन से 10 फीसदी की कटौती की जाती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में वेतन से पेंशन के पैसे की कटौती नहीं की जाती है.
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पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) की सुविधा उपलब्ध होती थी, जबकि नई स्कीम में जीपीएफ की कोई सुविधा नहीं दी गई है.
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पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय अंतिम सैलरी की आधी रकम पेंशन के रूप में दी जाती थी, जबकि नई पेंशन योजना में इसकी कोई गारंटी नहीं है.
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पुरानी पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पैसों का भुगतान सरकारी राजकोष से किया जाता है, जबकि नई पेंशन योजना पूरी तरह शेयर बाजार पर टिकी है.
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नई पेंशन योजना में आपके पैसे को शेयर बाजार में लगाया जाता है, जिस पर टैक्स का भुगतान करना जरूरी है. वहीं, पुरानी पेंशन योजना में यह प्रावधान नहीं है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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