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युवाओं के जिम्मे हिंदुस्तान, ऐसे सेक्टर जिनको सिर्फ यूथ चला रहे और जीडीपी में बड़ा योगदान है

Updated at : 12 Jan 2022 8:08 AM (IST)
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युवाओं के जिम्मे हिंदुस्तान, ऐसे सेक्टर जिनको सिर्फ यूथ चला रहे और जीडीपी में बड़ा योगदान है

भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां 25 साल से कम उम्र या 25 से 45 आयुवर्ग के युवा अपनी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता का दमखम दिखा रहे हैं.

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आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है. स्वामी विवेकानंद का जिस दौर में हुआ था, वह वक्त भी संकट ही का दौर था और आज जब भारत समेत दुनिया 21वीं सदी के दूसरे दशक में प्रवेश कर चुका है, तब भी संकट का ही दौर है. स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1984 में ही हो गई थी.

उन दिनों भारत सरकार ने कहा था कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन, आदर्श और काम करने का तरीका भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत हो सकते हैं. तभी से स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर मनाने की घोषणा कर दी गई. आज राष्ट्रीय युवा दिवस है, तो हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि 21वीं सदी के दूसरे दशक में हिंदुस्तान के युवाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर कैसे उठाया है और उनका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कितना योगदान है.

कम उम्र की श्रमशक्ति को लेकर दुनिया भर में भारत का स्थान अद्वितीय

भारत कई कारणों से दुनिया में अद्वितीय स्थान रखता है. खासकर देश की कुल आबादी में से अमीरों, उद्यमियों, कुशल-अकुशल कामगारों, उद्यमियों, स्टार्टअप कंपनियों के संचालन करने वालों के साथ-साथ श्रमशक्ति के तौर पर कम उम्र के युवाओं द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था में अपने योगदान की वजह से पूरी दुनिया में यह सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. 21वीं सदी के दूसरे दशक की शुरुआत से ही भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना महामारी की चपेट में है, लेकिन संकट के इस दौर में भी हिंदुस्तान के युवाओं ने पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर उठाने का जिम्मा संभालकर अद्वितीय प्रदर्शन किया है.

कुल आबादी में से 54 फीसदी 25 साल से कम उम्र के युवा

अब अगर हम देश में कम उम्र की श्रमशक्ति की बात करें, तो भारत की कुल आबादी में से करीब 54 फीसदी 25 साल के कम उम्र के युवा हैं, जिन्होंने अपने कंधों पर भारतीय अर्थव्यवस्था का बोझ उठाया हुआ है और सीधे-सीधे जीडीपी में उनका योगदान है. 18 अगस्त 2021 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, देश की कुल आबादी में करीब 62 फीसदी कामकाजी आयुवर्ग के लोग शामिल हैं और इन कामकाजी आयुवर्ग में भी करीब 54 फीसदी 25 साल से कम उम्र के लोग शामिल हैं, जिनकी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता का इस्तेमाल देश की तरक्की के लिए किया जा रहा है.

किन-किन सेक्टर्स में अपना दमखम दिखा रहे युवा

इसके साथ ही, अब अगर हम इस बात पर गौर करें कि भारत में 25 साल से कम उम्र या 25 से 45 आयुवर्ग के युवा भारतीय अर्थव्यवस्था के किन-किन सेक्टर्स में अपनी कार्यकुशलता और कार्यक्षमता का दमखम दिखा रहे हैं, तो ऐसे कम से कम दर्जन भर से अधिक क्षेत्र है, जहां इनकी मौजूदगी का पूरे का पूरा लाभ उठाया जा रहा है. 20वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं का आह्वान किया था. उन्हीं के सिद्धांतों पर अमल करते हुए 21वीं सदी के दूसरे दशक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान देश को संभालने की अपील भी युवाओं से ही की. इसी का परिणाम है कि आज सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी सेक्टर) , सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर), उद्योग क्षेत्र, कृषि क्षेत्र, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर, ऑटोमोबाइल सेक्टर, मीडिया, फैशन इंडस्ट्री, आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटलिटी), एफएमसीजी, विज्ञापन, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन, स्टार्टअप, रियल एस्टेट, सामान्य प्रशासन, रक्षा और वित्तीय क्षेत्र में युवाओं का योगदान बढ़ा है.

वर्ष 2020-21 भारत के जीडीपी में किस सेक्टर का कितना योगदान

अब अगर हम भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अहम सेक्टर के योगदान की बात करें, तो इसमें सर्विस सेक्टर यानी सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है. बताते चलें कि भारत की आर्थिक स्थिति का पैमाना जीडीपी के आधार पर तैयार होता है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों का योगदान रहता है. 27 अगस्त 2021 को मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2020-21 के दौरान 96.54 लाख करोड़ की मौजूदा कीमतों पर सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) के साथ सर्विस सेक्टर जीडीपी में सबसे अधिक योगदान करने वाला क्षेत्र बनकर उभरा. भारत के कुल जीवीए में अकेले सर्विस सेक्टर की करीब 54 फीसदी भागीदारी रही. इसके बाद 25.92 फीसदी योगदान के साथ उद्योग क्षेत्र दूसरे स्थान और 20.19 फीसदी योगदान के साथ कृषि क्षेत्र तीसरे स्थान पर रहा.

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2020-21 के जीडीपी में क्षेत्रों का योगदान (प्रतिशत में)

  • सेवा क्षेत्र : 53.89

  • उद्योग : 25.92

  • वित्त, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज : 22.05

  • कृषि क्षेत्र : 20.19 फीसदी

  • ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, दूरसंचार और मीडिया : 16.42

  • सामान्य प्रशासन, रक्षा क्षेत्र व अन्य : 15.42

  • मैन्यूफैक्चरिंग : 14.43

  • विनिर्माण : 7.16

स्रोत : स्टैटिस्टिक्स टाइम्स

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