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Viksit Bharat G Ram G: वित्तीय बोझ या विकास योजना? ‘विकसित भारत-जी राम जी’ पर पंजाब-तेलंगाना की आपत्ति

Viksit Bharat G Ram G: ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना को लेकर पंजाब और तेलंगाना ने केंद्र सरकार के सामने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. राज्यों का कहना है कि मनरेगा की जगह लाई गई इस नई योजना में 60:40 लागत हिस्सेदारी से उन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा. बजट पूर्व बैठक में वित्त मंत्रियों ने रोजगार गारंटी कमजोर होने, सहकारी संघवाद को ठेस पहुंचने और सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव की आशंका जताई. पंजाब ने विशेष वित्तीय पैकेज की भी मांग रखी है.

Viksit Bharat G Ram G: पंजाब और तेलंगाना जैसे विपक्ष शासित राज्यों ने शनिवार को केंद्र सरकार के सामने प्रस्तावित ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं. राज्यों ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि नई योजना के तहत 60:40 के लागत-साझेदारी मॉडल से राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा. उनका कहना है कि पहले से सीमित संसाधनों के बीच यह नई व्यवस्था राज्यों की आर्थिक सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती है.

बजट पूर्व बैठक में उठा मुद्दा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ बजट पूर्व बैठक की अध्यक्षता की. इस अहम बैठक में मणिपुर के राज्यपाल, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम के मुख्यमंत्री, तथा अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री शामिल हुए. इस दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी भी मौजूद रहे. बैठक में कई राज्यों ने आर्थिक चुनौतियों, संसाधनों की कमी और नई योजनाओं से बढ़ते बोझ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया.

मनरेगा की जगह नई योजना पर विरोध

बैठक में विपक्ष शासित राज्यों ने मनरेगा में किए गए बदलावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। संसद ने पिछले महीने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी-जी राम जी’ विधेयक पारित किया था, जिसने करीब 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ले ली है. राज्यों का कहना है कि यह बदलाव रोजगार की गारंटी की मूल भावना को कमजोर करता है और सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है.

90:10 से 60:40 हुआ खर्च का अनुपात

नई ‘वीबी-जी राम जी’ योजना के तहत लागत वहन का अनुपात बदलकर 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य कर दिया गया है, जबकि मनरेगा के तहत यह 90:10 था। राज्यों का तर्क है कि इस बदलाव से उनकी वित्तीय जिम्मेदारी अचानक कई गुना बढ़ गई है. उनका कहना है कि ग्रामीण रोजगार जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना में केंद्र की भूमिका मजबूत होनी चाहिए थी, न कि राज्यों पर अधिक बोझ डालना.

पंजाब ने जताई कड़ी आपत्ति

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मनरेगा ढांचे में प्रस्तावित बदलावों पर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि नया मॉडल रोजगार गारंटी को कमजोर करेगा और राज्यों पर भारी वित्तीय दबाव डालेगा. चीमा ने योजना के मूल मांग-आधारित ढांचे और पुराने वित्त पोषण मॉडल को बहाल करने की मांग की. उन्होंने बैठक में दोहराया कि प्रस्तावित बदलाव न केवल रोजगार की सुरक्षा को कमजोर करते हैं, बल्कि राज्यों की वित्तीय स्थिति को भी अस्थिर बना सकते हैं.

तेलंगाना ने परामर्श के अभाव पर सवाल उठाए

तेलंगाना के वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों से पर्याप्त परामर्श किए बिना मनरेगा की जगह ‘वीबी-जी राम जी’ योजना लागू कर दी. उन्होंने कहा कि वित्त पोषण के तरीके को 90:10 से बदलकर 60:40 कर देना राज्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उनके मुताबिक, इससे नौकरी चाहने वालों को मांग-आधारित काम उपलब्ध कराने में बड़ी बाधा उत्पन्न हो सकती है और ग्रामीण रोजगार व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है.

विशेष पैकेज की भी मांग

इसके अलावा, पंजाब सरकार ने केंद्र से विशेष वित्तीय पैकेज की मांग भी की। पंजाब ने सीमा पर जारी तनाव और 2025 में आई बाढ़ की “दोहरी मार” का हवाला देते हुए कहा कि राज्य पहले ही भारी आर्थिक दबाव में है. ऐसे में नई योजना के तहत बढ़ी हिस्सेदारी राज्य के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकती है.

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केंद्र-राज्य संबंधों में नई बहस

‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना को लेकर उठी यह आपत्तियां एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों के बंटवारे पर बहस को तेज कर रही हैं. विपक्ष शासित राज्यों का कहना है कि विकास योजनाओं का बोझ समान रूप से और राज्यों की क्षमता को ध्यान में रखकर तय होना चाहिए, ताकि सहकारी संघवाद की भावना बनी रहे और रोजगार गारंटी जैसी अहम योजनाएं कमजोर न हों.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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