वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करना होगा आसान, टिकट की कीमत कम करने की तैयारी में रेलवे

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वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करना होगा आसान, टिकट की कीमत कम करने की तैयारी में रेलवे

देश की सबसे आधुनिक एवं तेज रफ्तार वाली वंदेभारत ट्रेनों का सबसे लंबा सफर करीब 10 घंटे का है जबकि सबसे छोटा सफर तीन घंटे का है. इनमें से कुछ ट्रेनों में सीटों के खाली रहने की समस्या दूर करने के लिए किराये की समीक्षा की जा रही है.

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रेलवे कम दूरी वाली कुछ वंदे भारत ट्रेनों में सीटें खाली रहने की स्थिति को देखते हुए किराया कम करने के लिए टिकटों की कीमत की समीक्षा कर रहा है. बताया जा रहा है कि छोटी दूरी वाली कुछ वंदेभारत ट्रेनों में सीटें पूरी तरह भर नहीं पा रही हैं. ऐसी स्थिति में रेलवे उनके किराये की समीक्षा कर किराये में कटौती करने की योजना बना रहा है.

फिलहाल वंदे भारत ट्रेन में टिकट की कीमत इतनी है

इंदौर-भोपाल, भोपाल-जबलपुर और नागपुर-बिलासपुर जैसी वंदे भारत ट्रेनों के किराये की समीक्षा की जा रही है. इन सभी ट्रेनों में सीटें काफी हद तक खाली चल रही हैं. जून के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल-इंदौर वंदेभारत ट्रेन में केवल 29 प्रतिशत सीटें भरी हुई थीं जबकि इंदौर-भोपाल ट्रेन में 21 प्रतिशत सीट आरक्षित थीं. करीब तीन घंटे का सफर तय करने वाली इस ट्रेन में एसी चेयर कार का किराया 950 रुपये है जबकि एक्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 1525 रुपये रखा गया है. जबकि करीब 4.5 घंटे लंबा सफर तय करने वाली इस ट्रेन का एसी चेयर कार का किराया 1055 रुपये है जबकि एक्जीक्यूटिव चेयर कार के टिकट की कीमत 1880 रुपये रखी गई है.

वंदे भारत का सबसे लंबा सफर 10 घंटे का, जबकि छोटा सफर तीन घंटे का

देश की सबसे आधुनिक एवं तेज रफ्तार वाली वंदेभारत ट्रेनों का सबसे लंबा सफर करीब 10 घंटे का है जबकि सबसे छोटा सफर तीन घंटे का है. इनमें से कुछ ट्रेनों में सीटों के खाली रहने की समस्या दूर करने के लिए किराये की समीक्षा की जा रही है.

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देश के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दौड़ रही वंदे भारत

अभी तक देश के 24 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में वंदेभारत ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। इनमें से कासरगोड-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस में 183 प्रतिशत बुकिंग रहती है और यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली वंदेभारत ट्रेन है. गांधीनगर-मुंबई सेंट्रल, वाराणसी-नयी दिल्ली, देहरादून-अमृतसर और मुंबई-शोलापुर के बीच चलने वाली वंदेभारत ट्रेनों में भी 100 प्रतिशत से अधिक बुकिंग रहती है.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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