US-India Trade Deal: हाल ही में अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रम्प को व्यक्तिगत कॉल नहीं किया. लेकिन भारत आधारित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) का मानना है कि यह केवल एक बहाना है.
असली वजह क्या है?
ANI के रिपोर्ट के अनुसार, GTRI का कहना है कि बड़े व्यापार समझौते केवल नेताओं के इशारों या कॉल पर नहीं टिकते है. असल में ये समझौते नीति, टैरिफ, कृषि, डिजिटल ट्रेड और नियमों की जटिलताओं पर आधारित होते हैं. यानी किसी फोन कॉल की कमी के कारण डील नहीं टूटती, बल्कि नीतिगत मतभेद ही बड़ी वजह होते हैं.
अमेरिका ने क्यों आगे बढ़ाई अपनी डील्स?
लुटनिक ने कहा कि बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने कॉल करने पर सहमति जताई, लेकिन तब अमेरिका ने पहले से ही इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस के साथ व्यापार समझौते फाइनल कर लिए थे. GTRI ने बताया कि “अगर सिर्फ कॉल के कारण डील रुकती, तो फिर महीनों तक दोनों देश अपने स्तर पर बातचीत क्यों जारी रखते?”
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ट्रेड डील में देरी की असली कहानी
GTRI के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार में देरी का मतलब है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई बड़े मुद्दे अनसुलझे हैं. केवल व्यक्तिगत डिप्लोमेसी को वजह बताना असली नीति विवादों को छुपाने जैसा है. खासकर अमेरिका ने अगस्त 2025 से भारत से आने वाले कुछ सामानों पर 50% टैरिफ लगा रखा है.
क्या समझना जरूरी है?
यह कहना गलत होगा कि समझौता सिर्फ पीएम मोदी की कॉल न करने की वजह से नहीं हुआ है. असली चुनौती नीतिगत फैसले और जटिल ट्रेड मुद्दों को हल करना है. GTRI के अनुसार, इस डील की देरी युवा व्यापार और ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है.
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