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UPI: यूपीआई पर टूट पड़े लोग, 6 महीने में कर दिया 93.23 अरब का ट्रांजेक्शन

Updated at : 02 Apr 2025 8:42 PM (IST)
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UPI transaction

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UPI ने भारत के डिजिटल भुगतान को नए स्तर पर पहुंचा दिया है. 2024 की दूसरी छमाही में 42% की वृद्धि यह दर्शाती है कि UPI भविष्य में भी डिजिटल ट्रांजैक्शन का प्रमुख माध्यम बना रहेगा. PhonePe, Google Pay और Paytm की बाजार में मजबूत पकड़ बनी हुई है और सरकार के समर्थन से UPI का दायरा और भी बढ़ने की संभावना है.

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UPI: भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बना हुआ है. 2024 की दूसरी छमाही में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 42% बढ़कर 93.23 अरब तक पहुंच गई। यह जानकारी वर्ल्डलाइन की 2024 की दूसरी छमाही की ‘इंडिया डिजिटल भुगतान रिपोर्ट’ में दी गई है.

UPI में फोनपे, गूगल पे और पेटीएम का दबदबा

वर्ल्डलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई लेनदेन में PhonePe, Google Pay और Paytm का वर्चस्व बना हुआ है. दिसंबर 2024 में इन तीन ऐप्स की कुल हिस्सेदारी 93% थी, जबकि लेनदेन के मूल्य के मामले में यह 92% रही.

UPI लेनदेन में जबरदस्त बढ़ोतरी

2023 की दूसरी छमाही (जुलाई-दिसंबर) में यूपीआई लेनदेन की संख्या 65.77 अरब थी, जो 2024 में बढ़कर 93.23 अरब हो गई. इसी अवधि में यूपीआई के माध्यम से किए गए भुगतान का कुल मूल्य 31% बढ़कर 1,30,190 अरब रुपये हो गया, जो 2023 में 99,680 अरब रुपये था.

डिजिटल भुगतान के अन्य माध्यम

UPI के अलावा भारत में डिजिटल भुगतान के अलावा अन्य माध्यमों से भी पेंमेंट किया जाता है.

  • क्रेडिट कार्ड
  • डेबिट कार्ड और प्रीपेड कार्ड
  • मोबाइल वॉलेट और मोबाइल बैंकिंग
  • नेट बैंकिंग
  • POS (पॉइंट ऑफ सेल) लेनदेन

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UPI की लोकप्रियता बढ़ने के कारण

वर्ल्डलाइन इंडिया के सीईओ रमेश नरसिम्हन ने बताया कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, “UPI का व्यापक रूप से अपनाया जाना, POS बुनियादी ढांचे का विस्तार, मोबाइल लेनदेन की बढ़ती प्राथमिकता और डिजिटल ट्रांजैक्शन का समर्थन करने वाली नीतियां इस विकास को बढ़ावा दे रही हैं.”

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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