ट्रंप के टैरिफ मिसाइल का बैक फायर शुरू! झुलस उठा अमेरिकी शेयर बाजार, चौतरफा हाहाकार

Trump Tariff
Trump Tariff: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार से अमेरिकी शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. नैसडेक 6% और डाउ जोंस 4% टूटा. वैश्विक व्यापार युद्ध और महंगाई का खतरा बढ़ गया. भारत में सेंसेक्स 930 अंक, निफ्टी 345 अंक गिरा. फार्मा, आईटी, ऑटो शेयरों में दबाव बना हुआ है. क्या मंदी करीब है?
Trump Tariff: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ मिसाइल ने अब बैक फायर करना शुरू कर दिया है और उससे अमेरिकी शेयर बाजार को ही सबसे अधिक नुकसान होने लगा है. अमेरिका के शेयर बाजारों में चौतरफा हाहाकार मचा हुआ है. गुरुवार को नैसडेक करीब 6% टूट गया, डाउ जोंस 1600 या करीब 4% और स्टैंडर्ड एंड पूअर्स 500 भी करीब 5% तक का गोता लगा लिया. इससे पहले अमेरिकी शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट कोरोना काल की शुरुआत में 16 मार्च 2020 को दर्ज की गई थी.
वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नए टैरिफ लागू करने के बाद चीन और कनाडा ने भी पलटवार की चेतावनी दी है. इससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 26% और अन्य देशों पर 10% आयात शुल्क लगाया. जवाब में कनाडा ने अमेरिकी वाहनों पर 25% टैरिफ थोप दिया. इससे वैश्विक व्यापार संकट गहरा गया है.
भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
भारत के शेयर बाजार में बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित सूचकांक सेंसेक्स 930.67 अंक यानी 1.22% गिरकर 76,000 के स्तर से काफी नीचे 75,364.69 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 1,054.81 अंक गिरकर 75,240.55 तक आ गया था. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 345.65 अंक यानी 1.49% गिरकर 23,000 के नीचे 22,904.45 अंक पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान एक समय यह 382.2 अंक गिरकर 22,867.90 पर आ गया था.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उथल-पुथल
अमेरिकी एसएंडपी 500 में 5% और नैसडेक में 5.5% की गिरावट दर्ज की गई, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. एशियाई बाजार भी प्रभावित हुए हैं. जापान का निक्केई 3% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% नीचे आया.
उद्योगों पर असर
फार्मा, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी जा रही है. रिलायंस जैसे बड़े खिलाड़ियों के स्टॉक्स में भी बिकवाली का दबाव है. Nifty IT इंडेक्स 2% लुढ़का, जिसमें Coforge और Persistent Systems सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. धातु क्षेत्र के शेयर भी दबाव में हैं.
मुद्रास्फीति का बढ़ता जोखिम
अमेरिका में मंदी का सबसे बड़ा खतरा महंगाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ के कारण आयातित सामानों की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे मुद्रास्फीति में उछाल आ सकता है. दूसरी ओर डॉलर इंडेक्स में कमजोरी दिख रही है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है.
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क्या मंदी करीब है?
ट्रंप के टैरिफ फैसले से वैश्विक बाजारों में महंगाई की आशंका बढ़ी है, जिससे मंदी का खतरा गहराता दिख रहा है. डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्री ब्रेट रयान ने रॉयटर्स को बताया कि इन टैरिफ से अमेरिकी विकास दर में 1-1.5% की कमी आ सकती है, जिससे मंदी की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था अभी स्थिर दिख रही है और संकट के संकेत कम हैं.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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