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जहरीली Cough Syrup के बाद सख्त हुई सरकार, अब सभी दवा फैक्ट्रियों को जनवरी तक अपनाने होंगे अंतरराष्ट्रीय नियम

Updated at : 10 Nov 2025 3:49 PM (IST)
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जहरीली Cough Syrup के बाद सख्त हुई सरकार, अब सभी दवा फैक्ट्रियों को जनवरी तक अपनाने होंगे अंतरराष्ट्रीय नियम

जहरीली सिरप के बाद सरकार ने दवा फैक्ट्रियों पर सख्ती दिखाते हुए अंतरराष्ट्रीय नियम अनिवार्य कर दिया है.

Cough Syrup: भारत की दवा इंडस्ट्री एक बड़े मोड़ पर खड़ी है. जहरीली खांसी की सिरप से बच्चों की मौतों के बाद अब सरकार ने कमर कस ली है. जनवरी से पहले सभी दवा फैक्ट्रियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर काम करना ही होगा, वरना ताले लग सकते हैं. सवाल ये है की क्या छोटे उद्योग इतने कम वक्त में ये बदलाव कर पाएंगे? या फिर ये सख्ती देश की "फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड" की छवि को बचाने की आखिरी कोशिश है? आने वाले महीनों में तय होगा कि दवाओं की गुणवत्ता बचेगी या सस्ते इलाज का सपना टूट जाने वाला है.

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Cough Syrup: भारत की दवा नियामक संस्था (Drug Regulator) ने राज्यों को सख्त आदेश दिया है कि देश की हर दवा फैक्ट्री को जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक दवाइयां बनानी होंगी. सरकार ने ये फैसला तब लिया जब सितंबर के बाद से जहरीली खांसी की सिरप से बच्चों की मौत के मामले सामने आने लगे थे.

क्यों लिया गया ये फैसला?

पिछले साल भारत से बने खांसी के सिरप को अफ्रीका और सेंट्रल एशिया में 140 से ज्यादा बच्चों की मौत से जोड़ा गया था. इससे भारत की “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” वाली पहचान पर गहरा धब्बा लगा था. इसके बाद सरकार ने सभी दवा कंपनियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नियमों के हिसाब से अपने प्लांट सुधारने का आदेश दिया था.

छोटे उद्योगों के लिए मुश्किलें क्यों बढ़ीं?

बड़ी कंपनियों ने जून 2024 तक अपने प्लांट सुधार लिये थे, लेकिन छोटे उद्योगों को दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया था. अब सरकार ने साफ कहा है कि जनवरी से कोई छूट नहीं मिलेगी. छोटे दवा निर्माताओं का कहना है कि इतने कम समय में बदलाव करना उनके लिए बहुत महंगा साबित होगा और इससे कई फैक्ट्रियां बंद भी हो सकती हैं.

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क्या होगा अगर नियमों का पालन नहीं हुआ?

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल, राजीव सिंह रघुवंशी ने कहा है कि जो फैक्ट्रियां “शेड्यूल M” के नए नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर सख्त कार्रवाई होगी. राज्य सरकारों को तुरंत निरीक्षण शुरू करने के आदेश दिया गया हैं.

आगे क्या असर पड़ सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम दवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा, लेकिन साथ ही दवाइयां महंगी भी हो सकती हैं. छोटे उद्योगों को डर है कि अगर वे नियमों का पालन नहीं कर पाये तो नौकरियां जा सकती हैं और दवाओं की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती हैं.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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