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फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन समेत 3 को मिला अर्थशास्त्र का Nobel Prize, बैंक व वित्तीय संकट पर किया शोध

Updated at : 10 Oct 2022 5:33 PM (IST)
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फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन समेत 3 को मिला अर्थशास्त्र का Nobel Prize, बैंक व वित्तीय संकट पर किया शोध

नोबेल पुरस्कारों के विपरीत अर्थशास्त्र के पुरस्कार का उल्लेख अल्फ्रेड नोबेल की 1895 की वसीयत में नहीं था, बल्कि इस पुरस्कार की शुरुआत उनकी स्मृति में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने की थी. पहला विजेता 1969 में चुना गया था.

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स्टॉकहोम : रॉयल स्वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज में नोबेल समिति की ओर से सोमवार को अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है. इसमें फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन समेत अमेरिका के तीन अर्थशास्त्रियों को संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है. इन तीनों अर्थशास्त्रियों को बैंकों और वित्तीय संकट के शोध को लेकर दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है. अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाने वालों में बेन एस बर्नान्के, डगलस डब्ल्यू डायमंड और फिलिप एच डायबविग शामिल हैं.

फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन हैं बेन एस बर्नान्के

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्रियों को नोबेल पुरस्कार पाने वाले तीन अमेरिकियों में बेन एस बर्नान्के फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन हैं. इस पुरस्कार के तहत एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग नौ लाख अमेरिकी डॉलर) का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. पुरस्कार 10 दिसंबर को प्रदान किया जाएगा. नोबेल समिति ने कहा कि उनके शोध में बताया कि ‘बैंक को पतन से बचना क्यों महत्वपूर्ण है.’ समिति ने कहा कि 1980 के दशक की शुरुआत में अपने शोध के साथ इन अर्थशास्त्रियों ने वित्तीय बाजारों को विनियमित करने और वित्तीय संकट से निपटने की नींव रखी. करीब 68 साल के बेन एस बर्नान्के इस समय वाशिंगटन डीसी में द ब्रुकिंग्स इंस्टिट्यूशन के साथ जुड़े हैं. उन्होंने 1930 के दशक की महामंदी पर शोध किया और यह बताया कि यदि घबराए हुए बचतकर्ता अपनी जमा राशि निकालते हैं, तो बैंक की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है.

डिपॉजिट पर सरकारी गारंटी वित्तीय संकट को रोकने में सक्षम

इसके अलावा, इस साल का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाने वाले दो अन्य अर्थशास्त्रियों में करीब 68 साल के डगलस डब्ल्यू डायमंड शिकागो विश्वविद्यालय और करीब 67 साल के फिलिप एच डायबविग सेंट लुइस में वाशिंगटन विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं. इन दोनों ने अपने रिसर्च में बताया है कि कैसे जमा पर सरकारी गारंटी वित्तीय संकट को बढ़ने से रोक सकती है. अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार के लिए समिति के अध्यक्ष टोरे एलिंगसन ने कहा कि पुरस्कार विजेताओं की अंतर्दृष्टि ने गंभीर संकट और भारी-भरकम राहत पैकेज, दोनों से बचने की हमारी क्षमता में सुधार किया है.

कब शुरू हुआ अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

अन्य नोबेल पुरस्कारों के विपरीत अर्थशास्त्र के पुरस्कार का उल्लेख अल्फ्रेड नोबेल की 1895 की वसीयत में नहीं था, बल्कि इस पुरस्कार की शुरुआत उनकी स्मृति में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने की थी. पहला विजेता 1969 में चुना गया था. पिछले साल अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार डेविड कार्ड तथा जोशुआ एंग्रिस्ट और गुइडो इंबेन्स को दिया गया था. कार्ड को यह पुरस्कार न्यूनतम मजदूरी, आव्रजन और शिक्षा कैसे श्रम बाजार को प्रभावित करती है, इस बारे में शोध के लिए दिया गया. एंग्रिस्ट और इंबेन्स को पुरस्कार उन विषयों पर अध्ययन के लिए दिया गया, जो पारंपरिक वैज्ञानिक तरीकों से स्पष्ट नहीं होते हैं.

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फ्रांसीसी लेखिका एनी एरनॉक्स को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार

इस साल साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार फ्रांसीसी लेखिका एनी एरनॉक्स को दिया गया है. बेलारूस के जेल में बंद अधिकार कार्यकर्ता एलेस बियालियात्स्की, रूसी समूह ‘मेमोरियल’ और यूक्रेन के संगठन ‘सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है. यूक्रेन के संगठन को ऐसे समय पर पुरस्कार के लिए चुना गया है, जब यूक्रेन फरवरी से रूस के हमलों का सामना कर रहा है और दोनों देशों की सेनाएं कई इलाकों में आमने-सामने हो चुकी हैं. रसायन विज्ञान में इस वर्ष का नोबेल पुरस्कार कैरोलिन आर बर्टोज्जी, मोर्टन मेल्डल और के बैरी शार्पलेस को समान भागों में ‘अणुओं के एक साथ विखंडन’ का तरीका विकसित करने के लिए प्रदान किया गया है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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