अब डेट फंड से कमाई पर कितना कटेगा टैक्स? जान लीजिए ये नए नियम

डेट म्यूचुअल फंड्स पर टैक्सेशन (Photo: Freepik)
Taxation of Debt Mutual Funds: क्या डेट फंड और FD पर अब एक जैसा टैक्स लगेगा? इंडेक्सेशन के बिना LTCG की नई दरें और टैक्स बचाने के स्मार्ट तरीके समझने के लिए यह आर्टिकल अंत तक पढ़ें.
Taxation of Debt Mutual Funds: अगर आप अपनी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपको टैक्स के नए नियमों को समझना बहुत जरूरी है. पिछले कुछ समय में सरकार ने डेट म्यूचुअल फंड (Debt Mutual Funds) के टैक्स नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिसने इन्वेस्टर्स की पूरी कैलकुलेशन बदल दी है. आइए जानते हैं कि अब आपको अपनी कमाई पर कितना हिस्सा सरकार को देना होगा.
क्या 1 अप्रैल 2023 के बाद सब कुछ बदल गया है?
हां, टैक्स के लिहाज से 1 अप्रैल 2023 एक ‘कट-ऑफ’ तारीख बन चुकी है. अगर आपने इस तारीख या इसके बाद कोई डेट म्यूचुअल फंड खरीदा है, तो अब ‘लॉन्ग टर्म’ जैसा कोई फायदा नहीं मिलेगा. चाहे आप इसे 2 साल रखें या 10 साल, आपकी पूरी कमाई (Capital Gains) को ‘Short Term’ ही माना जाएगा. इसका मतलब है कि यह पैसा आपकी कुल इनकम में जोड़ दिया जाएगा और आप जिस भी Income Tax Slab (जैसे 10%, 20% या 30%) में आते हैं, उसी के हिसाब से टैक्स लगेगा.
पुराने इन्वेस्टमेंट पर टैक्स की गणना कैसे होगी?
अगर आपने 1 अप्रैल 2023 से पहले पैसा लगाया था, तो आपके लिए नियम थोड़े नरम हैं.
- 2 साल से कम होल्डिंग: अगर आप इनवेस्टमेंट के 24 महीने के अंदर पैसा निकालते हैं, तो टैक्स स्लैब के हिसाब से लगेगा.
- 2 साल से ज्यादा होल्डिंग: अगर आप 24 महीने के बाद पैसा निकालते हैं, तो आपको 12.5% की दर से LTCG (Long Term Capital Gain) टैक्स देना होगा. ध्यान रहे कि अब इसमें ‘इंडेक्सेशन’ (महंगाई के हिसाब से खरीद की कीमत बढ़ाना) का फायदा नहीं मिलता है.
क्या FD और डेट फंड अब एक बराबर हैं?
टैक्स के मामले में अब डेट फंड काफी हद तक बैंक FD जैसे ही हो गए हैं, क्योंकि दोनों पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है. लेकिन डेट फंड अभी भी एक मामले में बेहतर हैं और वो है टैक्स का समय. FD पर आपको हर साल ब्याज पर टैक्स देना पड़ता है, चाहे आप पैसा निकालें या नहीं. वहीं, म्यूचुअल फंड में आपको टैक्स तभी देना होता है जब आप अपनी यूनिट्स को बेचते (Redeem) हैं. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड में होने वाले नुकसान (Loss) को आप दूसरे मुनाफे के सामने एडजस्ट (Set-off) कर सकते हैं, जो सुविधा FD में नहीं मिलती.
इन्वेस्ट करने से पहले क्या ध्यान रखें?
अब डेट फंड का चुनाव केवल टैक्स बचाने के लिए नहीं, बल्कि लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न के लिए करना चाहिए. FD में समय से पहले पैसा निकालने पर अक्सर पेनल्टी लगती है, जबकि ज्यादातर डेट फंड्स में कुछ समय बाद कोई एग्जिट लोड नहीं लगता. अगर आप 30% वाले टैक्स स्लैब में आते हैं, तो डेट फंड्स पर टैक्स की मार अब ज्यादा है. फिर भी, पोर्टफोलियो में स्थिरता और घाटे की भरपाई (Tax Set-off) की सुविधा के कारण ये अभी भी एक मजबूत ऑप्शन बने हुए हैं. इन्वेस्ट करने से पहले अपनी ‘होल्डिंग अवधि’ और ‘टैक्स स्लैब’ को जरूर तौल लें.
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लेखक के बारे में
By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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