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COVID19 के खिलाफ लड़ाई के लिए टाटा ने खोले खजाने, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने दिया 1,500 करोड़ रुपये का योगदान

Updated at : 28 Mar 2020 7:59 PM (IST)
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COVID19 के खिलाफ लड़ाई के लिए टाटा ने खोले खजाने, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने दिया 1,500 करोड़ रुपये का योगदान

देश में कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से बीते 25 मार्च से आगामी 21 दिनों के लिए लागू लॉकडाउन

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नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते प्रकोप की वजह से बीते 25 मार्च से आगामी 21 दिनों के लिए लागू लॉकडाउन के बीच भारत के दिग्गज उद्योग घरानों में शुमार टाटा संस और टाटा ट्रस्ट ने क्रमश: 1,000 करोड़ रुपये और 500 करोड़ रुपये का योगदान किया है. टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा कि कोविड19 संकट से लड़ने की जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल आपातकालीन संसाधनों को तैनात करने की आवश्यकता है.

बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में अबतक 873 लोग आ चुके हैं, जबकि 19 लोगों की मौत हो चुकी है. देश में अभी इलाज के लिए वेंटिलेटर और मास्क से लेकर सैनिटाइजर तक की जरूरत है. ऐसे हालत में कई तरफ से मदद के हाथ भी उठने शुरु हो गये हैं.

रतन टाटा ने ट्वीट कर कहा, ‘COVID19 संकट मुश्किल चुनौतियों में से एक है, जिसका सामना हम सभी कर रहे हैं. टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां पहले भी देश की जरूरत के लिए खड़ी हुई हैं. इस समय की जरूरत सबसे बड़ी है.’

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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