Kahbar Khazana: ट्रंप ने फोड़ा लेटर बम! टेंशन में आई दुनिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर कई देशों को लेटर भेजकर वैश्विक व्यापार जगत में तनाव बढ़ा दिया है. ट्रंप ने भारत के साथ व्यापार समझौते को करीब बताया, लेकिन शुल्क न देने पर सख्त रुख अपनाया. अमेरिका ने टैरिफ लागू करने की मियाद 1 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी है. भारत ने डेयरी और कृषि क्षेत्र में रियायत पर आपत्ति जताई है. पीयूष गोयल ने कहा, भारत केवल राष्ट्रीय हित में ही समझौता करेगा.
Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर इस बार एक लेटर बम फोड़कर पूरी दुनिया को टेंशन में डाल दिया है. हालांकि, उन्होंने कहा है कि भारत के साथ व्यापार वार्ता समझौते के करीब है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने कई देशों से आयातित उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ से संबंधित लेटर भेजना शुरू कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा, ‘‘हमने ब्रिटेन के साथ एक समझौता किया है, हमने चीन के साथ एक समझौता किया है. हम भारत के साथ एक समझौता करने के करीब हैं.’’
अमेरिका भेजना है सामान तो देना होगा पैसा
डोनाल्ड ट्रंप ने आगे कहा, ‘‘हमने दूसरे लोगों से भी मुलाकात की थी. हमें नहीं लगता कि हम समझौता कर पाएंगे. लिहाजा, हमने उन्हें एक लेटर भेजा है. अगर आप अपना सामान अमेरिका भेजना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए शुल्क का भुगतान करना होगा.’’
ट्रंप ने बढ़ाई टैरिफ लागू करने की मियाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी प्रशासन ने 2 जुलाई, 2025 से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ के निलंबन को 9 जुलाई, 2025 से बढ़ाकर 1 अगस्त, 2025 कर दिया है. इससे भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल गया है.
पीयूष गोयल की दो टूक
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत कोई भी व्यापार समझौता समयसीमा के आधार पर नहीं करता है. समझौते को तभी स्वीकार करेगा, जब यह पूरी तरह से अंतिम रूप ले लेगा, उचित रूप से संपन्न हो जाएगा और राष्ट्रीय हित में होगा.
डेयरी और कृषि क्षेत्र में रियायत चाहता है अमेरिका
अमेरिका भारत से कृषि और डेयरी क्षेत्र में रियायत चाहता है. इसका कारण यह है कि उसकी नजर भारतीय कृषि और डेयरी उद्योग पर टिकी है. कृषि और डेयरी क्षेत्र भारत के लिए अमेरिका को शुल्क रियायतें देने के लिए कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र हैं. भारत ने अब तक हस्ताक्षरित अपने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते में डेयरी क्षेत्र के दरवाजे नहीं खोले हैं.
ट्रंप प्रशासन ने कई देशों को भेजा लेटर
ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को कई देशों को ‘लेटर’ भेजे, जिसमें उन देशों के उत्पादों पर अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले शुल्कों का ब्योरा है. ट्रंप ने कहा, ‘‘हम विभिन्न देशों को लेटर भेजकर बता रहे हैं कि उन्हें कितना शुल्क देना होगा.’’
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बांग्लादेश समेत इन देशों को मिला अमेरिकी फरमान
ट्रंप प्रशासन की ओर से जिन देशों को लेटर भेजे गए हैं, उनमें बांग्लादेश, बोस्निया एवं हर्जेगोविना, कंबोडिया, इंडोनेशिया, जापान, कजाकिस्तान, लाओ पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक, मलेशिया, सर्बिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और ट्यूनीशिया को ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित पत्र भेजे गए हैं. ट्रंप ने कहा, ‘‘ये देश अमेरिका को लूट रहे हैं और हम पर ऐसे शुल्क लगा रहे हैं, जो पहले कभी किसी ने नहीं लगाए. कुछ ऐसे देश भी हैं, जो 200% शुल्क लगा रहे हैं और व्यापार को असंभव बना रहे हैं.’’
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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