सेविंग्स अकाउंट हुआ पुराना, SIP के जरिए अमीर बनने का आया जमाना

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SIP vs Savings Account: सेविंग्स अकाउंट के कम ब्याज से परेशान हैं? जानें कैसे भारतीय युवा SIP के जरिए महंगाई को मात देकर छोटी रकम से बड़ा फंड बना रहे हैं.

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SIP vs Savings Account: आज के दौर के युवा अब केवल पैसा बचाने में नहीं, बल्कि उसे बढ़ाने में यकीन रखते हैं. हाल के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है. मार्च के महीने में भारत में SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए रिकॉर्ड 32,087 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट हुआ है. अब कुल SIP खाते बढ़कर लगभग 9.72 करोड़ हो चुके हैं. यह इस बात का साफ संकेत है कि भारतीय युवा अब बैंक के सेविंग्स अकाउंट से हटकर शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की ओर रुख कर रहे हैं. 

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सेविंग्स अकाउंट से मोहभंग क्यों?

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सालों से हम यही सुनते आए हैं कि पैसा बैंक में सुरक्षित रहता है. सुरक्षित तो रहता है, लेकिन बढ़ता नहीं है.  सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला 3-4% का ब्याज महंगाई (Inflation) को मात देने में नाकाम साबित हो रहा है. अगर महंगाई दर 6% है और आपका पैसा 3% की दर से बढ़ रहा है, तो असल में आपके पैसे की वैल्यू कम हो रही है. इसी वजह से युवा अब बैंक को केवल रोजमर्रा के खर्चों और इमरजेंसी फंड के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, न कि अमीर बनने के लिए. 

SIP में ऐसा क्या है खास?

SIP की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी है. आप महीने के मात्र 500 रुपये से इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं.  इसके सबसे बड़े फायदे हैं:

  • अनुशासन: पैसा हर महीने अपने आप आपके खाते से कट जाता है, जिससे इनवेस्टमेंट की आदत बनी रहती है.
  • कंपाउंडिंग की शक्ति: छोटे-छोटे इनवेस्टमेंट लंबे समय में एक बहुत बड़ा फंड बन जाते हैं. 
  • बाजार का जोखिम कम: जब बाजार गिरता है, तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बढ़ता है, तो कम. इसे ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ कहते हैं, जो रिस्क को कम करती है. 

क्या SIP शुरू करना ही काफी है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट शुभम गुप्ता (Growthvine Capital) का मानना है कि SIP सिर्फ एक रास्ता है, मंजिल नहीं. अक्सर लोग देखा-देखी में SIP तो शुरू कर देते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उन्होंने पैसा कहां लगाया है. इन्वेस्ट करने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपका लक्ष्य क्या है. क्या आप 2 साल बाद कार खरीदना चाहते हैं या 20 साल बाद के लिए रिटायरमेंट फंड बनाना चाहते हैं? बिना लक्ष्य के इन्वेस्ट करना बिना पते के चिट्ठी भेजने जैसा है. 

क्या इसमें कोई रिस्क भी है?

फिनएटवर्क के फाउंडर सौरभ बंसल के अनुसार, ‘ब्लाइंड पार्टिसिपेशन’ यानी बिना सोचे-समझे इन्वेस्ट करना खतरनाक हो सकता है. इक्विटी SIP शेयर बाजार से जुड़ी होती है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव होना लाजिमी है. अगर आपको अगले 1-2 साल में पैसों की जरूरत है, तो इक्विटी SIP की जगह डेट फंड जैसे सुरक्षित ऑप्शन बेहतर हो सकते हैं. 

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