पेट्रोल-डीजल के ₹3 बढ़ने से कितनी बढ़ेगी महंगाई ? जानें एसबीआई (SBI) की रिपोर्ट का पूरा हिसाब
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 18 May 2026 3:25 PM
SBI Research Report : पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा होने से क्या देश में तेल की खपत कम होगी? जानें एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट का पूरा गणित. आम जनता, महंगाई दर और सरकारी खजाने पर इसका क्या असर होने वाला है.
SBI Research Report : हाल ही में देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) के दाम लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन भारत में खुदरा कीमतें काफी समय से नहीं बढ़ी थीं, जिससे तेल कंपनियों (OMCs) को भारी घाटा हो रहा था.
अब देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) की रिसर्च टीम ने अपनी ‘इकोरैप’ रिपोर्ट में यह विश्लेषण किया है कि इस ₹3 की बढ़त का आम जनता की जेब, महंगाई और देश की वित्तीय स्थिति (Fiscal Situation) पर क्या असर होगा.
महंगाई पर कितना पड़ेगा असर ? (CPI Inflation)
रिपोर्ट के मुताबिक, इस ₹3 की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर (CPI Inflation) पर तुरंत असर पड़ेगा. मई और जून 2026 के महीनों में महंगाई में 0.15% से 0.20% (15-20 बेसिस पॉइंट्स) की बढ़त देखने को मिल सकती है. इस असर को देखते हुए एसबीआई रिसर्च ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की औसत महंगाई दर के अनुमान को संशोधित करके 4.7% कर दिया है.
क्या तेल की खपत (Consumption) कम होगी?
आमतौर पर माना जाता है कि तेल महंगा होने से लोग गाड़ियां कम चलाएंगे और खपत घट जाएगी. लेकिन एसबीआई की रिपोर्ट में पुराना ऐतिहासिक डेटा (Historical Data) खंगालते हुए एक दिलचस्प बात कही गई है. जब भी तेल के दाम बढ़ते हैं, तो शुरुआती कुछ दिनों या हफ्तों में खपत में थोड़ी गिरावट जरूर आती है. लेकिन बहुत जल्द जनता इस बदलाव को स्वीकार कर लेती है और खपत वापस पुराने स्तर पर लौट आती है. सालाना आधार पर देश में तेल की कुल खपत में कोई कमी दर्ज नहीं होती है.
तेल कंपनियों का ‘मोटा घाटा’ और ₹3 की मामूली राहत
केंद्रीय मंत्री के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि कीमतें न बढ़ने के कारण सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठा रही थीं, जो सालाना आधार पर 3.6 लाख करोड़ रुपये बैठता है. अब जो ₹3 प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए हैं, उससे तेल कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 में अपने कुल अनुमानित घाटे में 52,700 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी. हालांकि, यह राहत कंपनियों के कुल सालाना नुकसान का महज 15 प्रतिशत ही है.
सरकार अगर टैक्स ‘जीरो’ कर दे, तो क्या होगा ?
जनता अक्सर मांग करती है कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) को पूरी तरह खत्म कर दे. एसबीआई ने इसका भी पूरा गणित समझाया है. वर्तमान में पेट्रोल पर 11.9% और डीजल पर 7.8% एक्साइज ड्यूटी लगती है. अगर सरकार इसे घटाकर शून्य (Nil) कर दे, तो सरकार को 1.9 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा (यानी यह पैसा तेल कंपनियों/जनता के पास जाएगा).
यदि सरकार अपने दूसरे खर्चों में कटौती नहीं करती है, तो इस टैक्स छूट की वजह से देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 0.5% तक बढ़ सकता है. अगर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी शून्य करती है, तो राज्यों को मिलने वाले टैक्स हिस्से में भी ₹80,000 करोड़ का नुकसान होगा. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की ऊंची कीमतों से राज्यों को ₹30,000 करोड़ का फायदा भी हो रहा है, इसलिए राज्यों को होने वाला नेट (शुद्ध) नुकसान ₹50,000 करोड़ का होगा.
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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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