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Retirement Planning: जाने 50 की उम्र में रिटायरमेंट की सुरक्षा और ग्रोथ कैसे पाएं?

Updated at : 11 Dec 2025 3:18 PM (IST)
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थोड़ी सी प्लानिंग आपका पूरा भविष्य बदल सकती है.

Retirement Planning: रिटायरमेंट की प्लानिंग अब आसान नहीं रही है. महंगाई और अनिश्चित करियर के बीच सिर्फ EPF पर भरोसा पर्याप्त नहीं है. EPF सुरक्षित और स्थिर है, वहीं NPS लंबे समय में ग्रोथ और मार्केट का फायदा देता है. युवा NPS से बढ़त हासिल कर सकते हैं और EPF सुरक्षा देता है. उम्र बढ़ने पर मिश्रित योजना बेहतर रहती है. दोनों का संतुलन रिटायरमेंट कॉर्पस को मजबूत बनाता है. यह तरीका आपके भविष्य को महंगाई और अनिश्चितताओं से बचाते हुए सुरक्षित और बढ़त वाला बनाता है. तो आइये आज हम आपको विस्तार में बताये की आखिर कौन ज्यादा बेहतर है EPF या NPS.

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Retirement Planning: आज के समय में रिटायरमेंट की प्लानिंग पहले जैसी आसान नहीं रही है. महंगाई लगातार बढ़ रही है, करियर के रास्ते अनिश्चित हैं और लंबे समय तक बचत की असली ताकत धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है. इसलिए अब सिर्फ EPF पर भरोसा करना अक्सर पर्याप्त नहीं माना जाता है. NPS जैसी योजनाओं के विकल्प भी अब फाइनेंशियल फैसलों में अहम रोल निभाते हैं.

EPF क्यों है सुरक्षित और भरोसेमंद?


EPF यानी एंप्लॉई प्रॉविडेंट फंड ज्यादातर सैलरीड कर्मचारियों का पहला रिटायरमेंट सेफ्टी नेट है. हर महीने ऑटोमैटिक कटौती होती है और आपका बैलेंस सुरक्षित तरीके से बढ़ता है. यह मार्केट के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है, जिससे लंबी अवधि में भी आपका पैसा स्थिर रहता है. लेकिन इसकी रिटर्न रेंज काफी सीमित होती है. अगर आप अक्सर नौकरी बदलते हैं या बीच में पैसे निकालते हैं, तो आपका कॉर्पस अपेक्षा से कम बढ़ सकता है.

NPS में है ग्रोथ का मौका, पर रिस्क भी है


NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम EPF से थोड़ा अलग है. इसमें आपका एक हिस्सा इक्विटी में जाता है, जिससे लंबे समय में ज्यादा ग्रोथ हो सकती है. खासकर 20-30 की उम्र में यह मार्केट की उतार-चढ़ाव सहकर बड़ा कॉर्पस बना सकता है. लेकिन ध्यान रहे यह हर साल स्थिर नहीं दिखेगा और मार्केट फ्लक्चुएशन के दौरान बैलेंस कम भी लग सकता है.

कब क्या चुनें?


अगर आप युवा हैं तो NPS को ग्रोथ इंजन के रूप में चुन सकते हैं और EPF को सुरक्षा के लिए रख सकते हैं. 40 की उम्र में लोग अक्सर दोनों का मिश्रण अपनाते हैं ताकि रिटायरमेंट कॉर्पस मजबूत बने रहे. 50 के बाद स्थिरता ज्यादा जरूरी होती है, इसलिए EPF मुख्य भूमिका निभाता है और NPS कम इक्विटी के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है.

दोनों को मिलाकर क्यों है फायदा?


आजकल कई लोग दोनों योजनाओं का इस्तेमाल करते हैं. EPF नीचे सुरक्षा देता है और NPS ऊपर ग्रोथ का मौका है. इस तरह रिटायरमेंट के लिए एक ऐसा बैलेंस्ड पोर्टफोलियो बनता है जो सिर्फ EPF या NPS से संभव नहीं है.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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