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कोरोनावायरस महामारी के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने लोगों से की डिजिटल पेमेंट करने की अपील

Updated at : 27 Mar 2020 5:26 PM (IST)
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कोरोनावायरस महामारी के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने लोगों से की डिजिटल पेमेंट करने की अपील

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को सभी से लेनदेन में डिजिटल तौर तरीकों को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दिया. उनकी यह टिप्पणी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए किये जा रहे उपायों के लिहाज से काफी अहम है.

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मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को सभी से लेनदेन में डिजिटल तौर तरीकों को बढ़ावा दिये जाने पर जोर दिया. उनकी यह टिप्पणी कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए किये जा रहे उपायों के लिहाज से काफी अहम है. फिलहाल, पूरी दुनिया कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है. दुनियाभर में इससे मरने वालों का आंकड़ा 24,000 के पार पहुंच चुका है. इतना ही नहीं, देश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 17 हो चुकी है, जबकि संक्रमित लोगों की संख्या 700 का आंकड़ा पार कर चुकी है.

रिजर्व बैंक की ओर से व्यवस्था में नकदी बनाए रखने के लिए रेपो और सीआरआर में कटौती सहित कई उपायों की घोषणा के दौरान दास ने कहा कि कोरोना वायरस का संकट हमारे सामने है, लेकिन यह भी बीत जाएगा. हमें सावधानी बरतने की जरूरत है और सभी एहतियाती कदम उठाने हैं. मैं यह आपकी समझ पर छोड़ता हूं. साफ रहिए, सुरक्षित रहिए और डिजिटल अपनाइए.

उन्होंने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में भी वह आशावान बने हुए हैं. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.75 फीसदी की कटौती कर उसे 4.4 फीसदी कर दिया है. वहीं, बैंकों के नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में एक फीसदी की कटौती की गयी है. इससे बैंकों के पास ऋण देने के लिए 3.74 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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